सरकारी कर्मचारियों को मिलेंगे 400 करोड़ रुपए, हाईकोर्ट ने सरकार को दिया आदेश, एक कर्मचारी को 3.55 लाख तक मिलेंगे
By Ashish Meena
जनवरी 11, 2026
MP News : मध्य प्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारियों के लिए न्याय की बड़ी जीत हुई है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रोबेशन पीरियड (परिवीक्षा अवधि) के दौरान वेतन में की जा रही 70%, 80% और 90% की कटौती को पूरी तरह से अवैध और असंवैधानिक करार दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त आदेश दिया है कि प्रभावित कर्मचारियों को उनकी काटी गई राशि एरियर (Arrears) के साथ वापस लौटाई जाए।
94,300 कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ
इस फैसले से दिसंबर 2019 के बाद भर्ती हुए लगभग 94,300 कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा और सरकारी खजाने पर करीब 400 करोड़ रुपये से अधिक का भार आने का अनुमान है।
कोर्ट ने क्यों बताया इस नियम को ‘काला कानून’?
जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस दीपक खोट की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सरकार का यह कदम ‘समान काम, समान वेतन’ के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
भेदभावपूर्ण नीति
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) से चयनित अधिकारियों को पूरा वेतन मिल रहा था, जबकि कर्मचारी चयन मंडल (ESB) के माध्यम से भर्ती तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की सैलरी काटी जा रही थी। कोर्ट ने इसे नैसर्गिक न्याय के खिलाफ माना।
100% काम तो 100% वेतन
जब सरकार कर्मचारियों से पहले दिन से ही पूरा काम ले रही है, तो वेतन में कटौती का कोई तार्किक आधार नहीं है।
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संविधान का उल्लंघन
कोर्ट ने 2019 के GAD (सामान्य प्रशासन विभाग) के उस परिपत्र को ही अवैध घोषित कर दिया जिसके तहत यह नियम लागू किया गया था।
इन पदों पर तैनात कर्मचारियों को मिलेगी राहत
यह फैसला कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) द्वारा आयोजित लगभग सभी भर्तियों पर लागू होगा, जिनमें शामिल हैं।
लिपिक वर्ग: सहायक ग्रेड-3, स्टेनो, डेटा एंट्री ऑपरेटर, लेखापाल।
क्षेत्रीय पद: पटवारी, तकनीकी सहायक, लैब टेक्नीशियन, सब-इंजीनियर।
निरीक्षक पद: स्वच्छता निरीक्षक, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी।
चतुर्थ श्रेणी: भृत्य, चौकीदार, सफाई कर्मी और नगर निगम के बेलदार/माली।
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3 लाख 55 हजार रुपए का एरियर मिलेगा!
जनवरी 2020 में भर्ती हुआ एक प्राथमिक शिक्षक, जिसका पे-ग्रेड 2400 रुपए था, उसे इस फैसले से लगभग 3 लाख 55 हजार रुपए का एरियर मिलेगा। यह राशि उसके तीन साल के वेतन में हुई कटौती (पहले साल 30%, दूसरे साल 20% और तीसरे साल 10%) के बराबर है।

सरकार के पास अब क्या विकल्प हैं?
हाई कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद मोहन यादव सरकार के सामने दो मुख्य रास्ते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
सरकार इस फैसले के खिलाफ देश की सबसे बड़ी अदालत जा सकती है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ‘समानता के अधिकार’ के आधार पर यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में भी बरकरार रह सकता है।
एरियर का भुगतान
सरकार तत्काल आदेश जारी कर कर्मचारियों को खुश कर सकती है, जिससे प्रदेश के लाखों परिवारों को आर्थिक संबल मिलेगा। यह फैसला न केवल आर्थिक राहत है, बल्कि उन युवाओं के आत्मसम्मान की जीत भी है जो सालों की मेहनत के बाद सरकारी सेवा में आए और कटौती का दंश झेल रहे थे।

कमलनाथ सरकार ने लागू किया था ये नियम
बता दें कि साल 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने ये नियम लागू किया था। इसके तहत नई भर्तियों में कर्मचारियों को प्रोबेशन पीरियड के दौरान 70%, 80% और 90% वेतन दिया जा रहा था। सरकार के इस फैसले के खिलाफ कर्मचारियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने कहा- जब सरकार कर्मचारियों से 100 प्रतिशत काम ले रही है, तो प्रोबेशन के नाम पर वेतन में कटौती का कोई औचित्य नहीं है।
आखिरी फैसला मुख्यमंत्री लेंगे
सूत्रों का कहना है कि सरकार इस पर मंथन कर रही है कि हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देना है या फिर कर्मचारियों को एरियर की राशि देना है। इस पर आखिरी फैसला मुख्यमंत्री लेंगे। यदि सरकार कर्मचारियों को राहत देती है तो कितने कर्मचारियों को एरियर का फायदा मिलेगा और ये किस तरह से मिलेगा?

शिवराज सरकार का अधूरा वादा और कोर्ट तक मामला
साल 2020 में एमपी में सत्ता परिवर्तन हुआ। कमलनाथ सरकार गिर गई और एक बार फिर शिवराज सरकार सत्ता में आई। साल 2023 के विधानसभा चुनाव के पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस नियम को बदलने की घोषणा की थी।
उन्होंने चुनावी सभाओं में कहा था कि प्रोबेशन पीरियड को चार साल से घटाकर वापस दो साल किया जाएगा। मगर, यह घोषणा कभी धरातल पर नहीं उतर सकी। सरकारी वादे के पूरा न होने और लगातार हो रहे आर्थिक नुकसान के कारण कर्मचारियों ने अंततः न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
