MP: भोजशाला में आज नमाज और पूजा एक साथ, हजारों पुलिसकर्मी तैनात, ड्रोन-AI से की जा रही निगरानी, चप्पे-चप्पे पर नजर
By Ashish Meena
जनवरी 23, 2026
नमाज और पूजा एक साथ: मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी धार की भोजशाला में आज बसंत पंचमी का पर्व विशेष उत्साह और कड़ी सुरक्षा के बीच मनाया जा रहा है। इस वर्ष बसंत पंचमी शुक्रवार (जुमे के दिन) पड़ने के कारण प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत पूजा और नमाज के लिए अलग-अलग समय और पुख्ता इंतजाम किए हैं।
सूर्योदय से शुरू हुआ वाग्देवी का अनुष्ठान
शुक्रवार सुबह सूर्योदय के साथ ही हिंदू श्रद्धालुओं ने मां सरस्वती (वाग्देवी) की आराधना शुरू कर दी है। मंदिर परिसर में हवन, पूजन और धार्मिक पाठ का सिलसिला सूर्यास्त तक जारी रहेगा। बसंत पंचमी को मां सरस्वती के प्रकटोत्सव के रूप में मनाया जाता है, इसलिए देशभर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
पूजा और नमाज का समय तय
गुरुवार को हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट व्यवस्था दी है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक मां सरस्वती की पूजा और अनुष्ठान करने की पूरी छूट। दोपहर 1:00 बजे से 3:00 बजे तक जुमे की नमाज अदा करने की अनुमति। कोर्ट ने जिला प्रशासन को शांति व्यवस्था बनाए रखने और दोनों पक्षों के अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
छावनी में तब्दील हुई धार
किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए धार शहर को अभेद्य किले में बदल दिया गया है। स्थानीय पुलिस के अलावा CRPF और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के 8000 से ज्यादा जवान तैनात हैं।
तकनीक का इस्तेमाल
पहली बार सुरक्षा के लिए AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित कैमरों, हाई-रेजोल्यूशन ड्रोन और चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी का जाल बिछाया गया है। भोजशाला को 6 सेक्टरों में और पूरे शहर को 7 जोन में बांटा गया है। हर जोन की निगरानी एसपी (SP) स्तर के अधिकारी कर रहे हैं।
धार एसपी मयंक अवस्थी का बयान
सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते हुए धार एसपी मयंक अवस्थी ने कहा, “हमने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। शहर की एक-एक गली और संवेदनशील क्षेत्रों पर हमारी पैनी नजर है। श्रद्धालुओं को सुचारू रूप से दर्शन मिल रहे हैं और नमाज के लिए भी शांतिपूर्ण व्यवस्था की गई है।”
भोजशाला विवाद का इतिहास
धार की भोजशाला को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद बताता है। वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की व्यवस्था के तहत यहां मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज की अनुमति रहती है, लेकिन बसंत पंचमी पर विशेष आयोजन होते हैं।
धार प्रशासन के लिए बसंत पंचमी और जुमे का एक ही दिन पड़ना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन तकनीक और भारी बल की तैनाती से शांतिपूर्ण आयोजन की उम्मीद है। श्रद्धालु भारी संख्या में ‘जय मां वाग्देवी’ के उद्घोष के साथ मंदिर पहुंच रहे हैं।
