उज्जैन में ओले से फसल हुई बर्बाद, किसान ने की आत्महत्या, खेत में लगाई फांसी, अप्रैल में थी बहन की शादी
By Ashish Meena
जनवरी 28, 2026
किसान ने की आत्महत्या : मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले से एक अत्यंत हृदयविदारक घटना सामने आई है। मंगलवार रात हुई अचानक आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने न केवल फसलों को तबाह किया, बल्कि एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां भी छीन लीं। तराना तहसील के खेड़ा जामुनिया गांव में रहने वाले 30 वर्षीय किसान पंकज मालवीय ने अपनी 6 बीघा गेहूं की फसल को बर्बाद होते देख खेत में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
सोशल मीडिया पर आखिरी दर्द
आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाने से पहले पंकज ने अपनी बर्बाद हो चुकी फसल का वीडियो बनाया और उसे वॉट्सएप स्टेटस पर लगाया। वीडियो के बैकग्राउंड में उन्होंने फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ का दर्द भरा गाना— ‘तड़प-तड़प के इस दिल से आह निकलती रही, मुझको सजा दी प्यार की, ऐसा क्या गुनाह किया…’ लगाया था। यह स्टेटस उनके दिल के उस दर्द को बयां कर रहा था, जो वे फसल खोने के बाद महसूस कर रहे थे।
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बहन की शादी की चिंता और टूटते सपने
पंकज के सिर पर पिता का साया पहले ही उठ चुका था और वह घर का अकेला कमाने वाला सदस्य था। परिवार में बूढ़ी मां, पत्नी और दो छोटे बच्चे (8 साल का बेटा और 5 साल की बेटी) हैं। घर में खुशियों का माहौल था क्योंकि महज दो दिन पहले ही उनकी छोटी बहन की सगाई हुई थी और अप्रैल में शादी तय थी।
पंकज ने शादी के लिए बयाना (एडवांस) भी दे दिया था। ओलावृष्टि के बाद उन्होंने अपने समधी ईश्वर लाल परमार को फोन कर रोते हुए कहा था, “फसल तो खत्म हो गई, अब बहन की शादी कैसे कर पाऊंगा?” अपनों के समझाने के बावजूद फसल बर्बादी का बोझ वह सहन नहीं कर सके।
राजनीतिक हलचल और मुआवजे की मांग
घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय विधायक महेश परमार पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए प्रशासन से मांग की है कि परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। विधायक ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो वे एसडीएम कार्यालय का घेराव करेंगे।
प्रशासन का रुख: सर्वे के निर्देश
उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार ओलावृष्टि से हुए नुकसान का सर्वे युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है। तहसीलदार, आरआई और पटवारियों की टीमें गांव-गांव जाकर फसलों के नुकसान का आकलन कर रही हैं ताकि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा मिल सके।
अन्नदाता की यह स्थिति समाज और सरकार दोनों के लिए चिंता का विषय है। प्रकृति की मार और आर्थिक तंगी ने एक और युवा किसान की जान ले ली। अब सबकी नजरें प्रशासन पर हैं कि पीड़ित परिवार को कितनी जल्दी सहायता पहुंचाई जाती है।
