मध्यप्रदेश के इस गांव में मिला पुराना खजाना, मिट्टी से निकलने लगे सोने के सिक्के-बिस्किट, लूटने पहुंचा पूरा गांव, मचा हड़कंप

By Ashish Meena
जनवरी 30, 2026

मिट्टी से निकलने लगे सोने के सिक्के: बुंदेलखंड की धरती एक बार फिर अपने ऐतिहासिक रहस्यों और छिपे हुए खजाने को लेकर चर्चा में है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के राजगढ़ गांव में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सड़क किनारे पड़ी मिट्टी से सोने के सिक्के और बिस्किट निकलने लगे। यह खबर जंगल की आग की तरह फैली और देखते ही देखते आधी रात को ही पूरा गांव फावड़े, कुदाली और तसले लेकर खजाने की तलाश में सड़क पर उतर आया।

बारिश ने खोला ‘राजगढ़ किले’ का गहरा राज

घटना बमीठा थाना क्षेत्र के चंद्रनगर चौकी के अंतर्गत आने वाले राजगढ़ गांव की है। जानकारी के अनुसार, ऐतिहासिक राजगढ़ किले (चंदेल कालीन) को ओबेरॉय ग्रुप द्वारा लीज पर लिया गया है, जहाँ वर्तमान में एक लग्जरी होटल का निर्माण कार्य चल रहा है। होटल के स्टाफ क्वार्टर के लिए की गई खुदाई से निकली मिट्टी को स्वर्गेश्वर धाम जाने वाले रास्ते पर डाला गया था।

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बीते दिनों हुई बारिश के कारण जब मिट्टी की ऊपरी परत बही, तो उसमें से चमकती हुई धातु दिखाई दी। जब ग्रामीणों ने पास जाकर देखा तो वे दंग रह गए; मिट्टी में पुराने सिक्के और सोने जैसे दिखने वाले बिस्किट दबे हुए थे।

करोड़ों का हो सकता है खजाना

स्थानीय बुजुर्गों और जानकारों का मानना है कि यह खजाना चंदेल काल (Chandela Era) से जुड़ा हो सकता है। राजगढ़ किले और उसके आसपास दबे खजाने की लोककथाएं दशकों से सुनी जाती रही हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि खुदाई में मिले सिक्के काफी प्राचीन हैं और उन पर ऐतिहासिक लिपियां या चिह्न अंकित हैं। यदि ये सिक्के वास्तव में चंदेल कालीन स्वर्ण मुद्राएं हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमत करोड़ों रुपये हो सकती है।

देर रात से खुदाई जारी, प्रशासन अलर्ट

गाँव के सरपंच रमेश बिल्ला ने बताया कि खजाने की खबर मिलते ही बुधवार की रात से ही लोगों की आवाजाही शुरू हो गई थी। टॉर्च की रोशनी में लोग रात भर मिट्टी छानते रहे। कई लोगों को सिक्के मिलने की बात भी सामने आ रही है। हालांकि, स्थिति को बिगड़ता देख बमीठा पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंच गया है। प्रशासन ने लोगों को समझाने की कोशिश की है कि ऐतिहासिक धरोहर पर सरकार का अधिकार होता है, लेकिन ‘किस्मत’ चमकाने की होड़ में लोग मानने को तैयार नहीं हैं।

पुरातत्व विभाग को दी गई सूचना

प्रशासन अब इस मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को शामिल करने की तैयारी कर रहा है। विशेषज्ञों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि ये सिक्के किस धातु के हैं और कितने पुराने हैं। फिलहाल सुरक्षा के लिहाज से उस क्षेत्र की निगरानी बढ़ा दी गई है जहाँ मिट्टी डाली गई थी।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।