MP के इस जिले में 300 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा फ्लाईओवर, लगभग ढाई से तीन किलोमीटर होगी लंबाई

By Ashish Meena
फ़रवरी 6, 2026

संस्कारधानी जबलपुर के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। शहर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाकों में शुमार गढ़ा-मेडिकल क्षेत्र को जल्द ही भीषण ट्रैफिक जाम से स्थायी राहत मिलने वाली है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने गढ़ा क्षेत्र में लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से एक नए फ्लाईओवर का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है।

3 किलोमीटर लंबा होगा शहर का ‘सातवां’ फ्लाईओवर

प्रस्तावित फ्लाईओवर की लंबाई लगभग ढाई से तीन किलोमीटर होगी। यह फ्लाईओवर त्रिपुरी चौक, मेडिकल तिराहा और नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के सामने के पूरे हिस्से को कवर करेगा। वर्तमान में जबलपुर में छह फ्लाईओवर कार्य कर रहे हैं, और यह प्रोजेक्ट सफल होने पर शहर को अपना सातवां फ्लाईओवर मिलेगा।

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MP बजट 2026 से बड़ी उम्मीदें

सूत्रों के अनुसार, मध्य प्रदेश के आगामी बजट 2026 में इस प्रोजेक्ट को प्रशासनिक स्वीकृति और फंड आवंटन मिलने की प्रबल संभावना है। PWD ने इसके डिजाइन और निर्माण अवधि का पूरा खाका तैयार कर शासन को भेज दिया है।

क्यों जरूरी है यह फ्लाईओवर?

मेडिकल इमरजेंसी में वरदान: मेडिकल कॉलेज होने के कारण इस मार्ग पर एंबुलेंस की आवाजाही सबसे ज्यादा रहती है। वर्तमान में जाम के कारण गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुँचने में देरी होती है। फ्लाईओवर बनने से एंबुलेंस बिना किसी बाधा के सीधे अस्पताल पहुँच सकेंगी।

जाम से आजादी: त्रिपुरी चौक और गढ़ा बाजार का इलाका पीक आवर्स में घंटों जाम रहता है। फ्लाईओवर बनने के बाद थ्रू-ट्रैफिक ऊपर से निकल जाएगा, जिससे स्थानीय सड़कों पर दबाव कम होगा।

बेहतर कनेक्टिविटी: यह फ्लाईओवर गढ़ा, त्रिपुरी और तिलवारा की ओर जाने वाले यातायात को सुगम बनाएगा, जिससे ईंधन और समय दोनों की बचत होगी।

स्मार्ट सिटी की दिशा में बड़ा कदम

जबलपुर को एक स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी अनिवार्य है। अधिकारियों का कहना है कि यह फ्लाईओवर न केवल यातायात को सुधारेगा, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगा। गढ़ा और आसपास के निवासियों ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है, क्योंकि यह उनकी वर्षों पुरानी मांग थी।

यदि बजट 2026 में इस फ्लाईओवर को हरी झंडी मिलती है, तो यह जबलपुर के शहरी विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा। विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं के लिए यह प्रोजेक्ट किसी ‘लाइफ-लाइन’ से कम नहीं होगा।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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