इंदौर का चमेली देवी स्कूल खुलेआम उड़ा रहा नियमों की धज्जियां! RTE से बचने के लिए पोर्टल पर छिपाई बच्चों की संख्या, मान्यता पर गहराया संकट
By Ashish Meena
फ़रवरी 15, 2026
Chameli Devi School: शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) के तहत गरीब बच्चों को प्रवेश देने में आनाकानी करने वाले निजी स्कूलों पर अब जिला प्रशासन का डंडा चलना शुरू हो गया है। ताजा मामला इंदौर के चमेलीदेवी स्कूल (Chameli Devi School Indore) का है, जहाँ निरीक्षण के दौरान आरटीई नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ती पाई गईं। स्कूल प्रबंधन ने पोर्टल पर बच्चों की संख्या वास्तविक संख्या से करीब आधी दिखाई थी, ताकि कम बच्चों को मुफ्त शिक्षा देनी पड़े।
निरीक्षण में हुआ बड़ा खुलासा
जिला परियोजना समन्वयक (DPC) संजय कुमार मिश्र ने जब स्कूल का औचक निरीक्षण किया, तो वे हैरान रह गए। स्कूल में नर्सरी के दो सेक्शन संचालित हो रहे थे, जिनमें उपस्थिति रजिस्टर के अनुसार क्रमशः 40 और 34 (कुल 74) बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। लेकिन जब राज्य शिक्षा केंद्र के पोर्टल की जांच की गई, तो वहां केवल 39 बच्चों की ही एंट्री मिली।
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क्यों की जा रही है यह ‘धांधली’?
नियमों के अनुसार, निजी स्कूलों को अपनी कुल सीटों का 25 फीसदी हिस्सा आरटीई के तहत आरक्षित करना होता है। यदि स्कूल पोर्टल पर बच्चों की कुल संख्या कम दिखाएगा, तो उसे 25% कोटे के तहत कम गरीब बच्चों को प्रवेश देना होगा। इस तरह की धोखाधड़ी से इंदौर के कई पात्र और जरूरतमंद बच्चे मुफ्त शिक्षा के अधिकार से वंचित रह जाते हैं।
डीपीसी का अल्टीमेटम
डीपीसी संजय कुमार मिश्र ने स्कूल प्रबंधन और प्राचार्य को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिए हैं कि आज शाम तक सभी बच्चों का डेटा पोर्टल पर अपडेट किया जाए। यदि निर्धारित समय सीमा में संख्या दुरुस्त नहीं की गई, तो कार्रवाई की जाएगी।
पूरे इंदौर में चलेगा ‘सत्यापन अभियान’
इंदौर एक बड़ा महानगर है और यहाँ निजी स्कूलों की संख्या मध्य प्रदेश में सर्वाधिक है। डीपीसी ने स्पष्ट किया है कि चमेलीदेवी स्कूल केवल एक उदाहरण है। अब बीआरसी (BRC) स्तर पर सभी निजी स्कूलों का औचक निरीक्षण होगा। नर्सरी, केजी-1 और केजी-2 के बच्चों की संख्या का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया जाएगा। यू-डाइस (U-DISE) पोर्टल पर गलत जानकारी देने वाले स्कूलों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई होगी।
चमेलीदेवी स्कूल में पकड़ी गई यह अनियमितता इंदौर के शिक्षा विभाग की सक्रियता को दर्शाती है। आगामी सत्र 2026-27 के लिए आरटीई प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए यह कदम बेहद जरूरी है। अभिभावकों और जागरूक नागरिकों की उम्मीद है कि प्रशासन ऐसे ‘शिक्षा माफियाओं’ पर लगाम कसना जारी रखेगा।
