देवास: नेमावर-हंडिया में आदेश की उड़ी धज्जियां! शराब और मांस बिक्री पर लगा है प्रतिबंध, फिर भी चोरी-छिपे चल रहा अवैध कारोबार

By Ashish Meena
फ़रवरी 18, 2026

मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी माँ नर्मदा के तट पर स्थित दो प्रमुख तीर्थ स्थलों, नेमावर और हंडिया की पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। धर्मस्व विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत नेमावर और हंडिया में शराब और मांस की बिक्री को पूरी तरह प्रतिबंधित (Complete Ban) कर दिया गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ धर्मस्व विभाग का पत्र

21 जनवरी 2026 को धर्मस्व विभाग द्वारा जारी एक पत्र सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस आदेश का मुख्य उद्देश्य तीर्थ नगरी की मर्यादा, आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक वातावरण को सुरक्षित रखना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि माँ नर्मदा के इन घाटों पर श्रद्धालुओं की आस्था सर्वोपरि है, और किसी भी प्रकार की अभक्ष्य सामग्री का विक्रय यहाँ स्वीकार्य नहीं होगा।

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नियम तो बने, लेकिन क्या कार्रवाई प्रभावी है?

सरकारी आदेश के बावजूद स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं। नेमावर और हंडिया के निवासियों और श्रद्धालुओं का आरोप है कि कागजों पर प्रतिबंध लगने के बाद भी अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पाई है। सूत्रों के अनुसार, चोरी-छिपे मांस और मदिरा का अवैध कारोबार अब भी जारी है।

सवाल उठ रहे हैं कि जब मंत्रालय स्तर से आदेश जारी हो चुके हैं, तो स्थानीय पुलिस और प्रशासन सख्ती क्यों नहीं दिखा रहा? नेमावर को ‘नाभि स्थल’ माना जाता है और हंडिया का भी अपना प्राचीन धार्मिक महत्व है। यहाँ प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु नर्मदा स्नान और पूजन के लिए आते हैं। ऐसे में शराब और मांस की दुकानें न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाती हैं, बल्कि पवित्र स्थल की सुरक्षा और शांति को भी भंग करती हैं।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

अब सबकी नजरें प्रशासन पर टिकी हैं। क्या जिला प्रशासन इन क्षेत्रों में सर्चिंग अभियान चलाएगा? क्या अवैध विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द कर उन पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी? स्थानीय लोगों की मांग है कि पवित्र नर्मदा तट पर ‘नो टॉलरेंस’ नीति अपनाई जाए ताकि माँ नर्मदा की गरिमा सुनिश्चित हो सके।

नेमावर और हंडिया को ‘पवित्र नगरी’ का वास्तविक स्वरूप प्रदान करने के लिए केवल आदेश काफी नहीं हैं, बल्कि प्रशासन की इच्छाशक्ति की भी आवश्यकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार के इस सराहनीय निर्णय को जमीन पर कितनी मजबूती से लागू किया जाता है।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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