नर्मदापुरम में शर्मनाक लापरवाही: एंबुलेंस को ग्रामीणों ने धक्का देकर किया स्टार्ट, इलाज में देरी से घायल की मौत
By Ashish Meena
मार्च 17, 2026
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बेहद दर्दनाक और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। यहां एक सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को समय पर इलाज नहीं मिल पाया, क्योंकि अस्पताल परिसर में खड़ी एंबुलेंस स्टार्ट ही नहीं हो सकी। मजबूरी में ग्रामीणों को एंबुलेंस को धक्का लगाकर चालू करना पड़ा, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
यह घटना माखननगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की है, जहां गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को जिला अस्पताल रेफर किया गया था। लेकिन एंबुलेंस की तकनीकी खराबी और व्यवस्थागत लापरवाही के कारण इलाज में देरी हुई और घायल राजेश मालवीय ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश और नाराजगी पैदा कर दी है।
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नर्मदापुरम में सड़क हादसे के बाद अस्पताल पहुंचाए गए घायल
जानकारी के अनुसार सोमवार रात ग्राम माना के पास दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर हो गई। इस दुर्घटना में राजेश मालवीय और एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के तुरंत बाद 108 एंबुलेंस को फोन किया गया, लेकिन काफी देर तक एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। घायल की हालत बिगड़ती देख परिजन और ग्रामीणों ने इंतजार करने के बजाय निजी वाहन की मदद से दोनों घायलों को माखननगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।
घायलों को अस्पताल पहुंचाने में करीब 10 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ी। अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच की और स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें तुरंत जिला अस्पताल नर्मदापुरम रेफर कर दिया।
एंबुलेंस स्टार्ट नहीं हुई तो भड़के ग्रामीण
जब परिजन और ग्रामीणों ने अस्पताल परिसर में खड़ी एंबुलेंस से घायलों को जिला अस्पताल ले जाने की मांग की तो अस्पताल स्टाफ ने गाड़ी खराब होने की बात कहकर इंकार कर दिया। यह सुनते ही ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई और अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू हो गया।
स्थिति तनावपूर्ण होते देख पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा। पुलिस के पहुंचने के बाद अस्पताल प्रशासन पर दबाव बना और आखिरकार घायलों को एंबुलेंस में बैठाकर जिला अस्पताल भेजने की तैयारी की गई।
लेकिन जब एंबुलेंस स्टार्ट करने की कोशिश की गई तो वह चालू ही नहीं हुई। काफी कोशिशों के बाद भी वाहन स्टार्ट नहीं हुआ, जिससे मौके पर मौजूद लोगों का गुस्सा और बढ़ गया।
ग्रामीणों ने धक्का लगाकर चालू की एंबुलेंस
जब एंबुलेंस बार-बार कोशिश के बावजूद स्टार्ट नहीं हुई तो मजबूरी में ग्रामीणों ने खुद ही उसे धक्का लगाकर स्टार्ट करने की कोशिश की। कई लोगों ने मिलकर एंबुलेंस को धक्का लगाया, जिसके बाद किसी तरह वाहन चालू हो सका।
लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग गया। इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाते समय घायल राजेश मालवीय की हालत और बिगड़ गई और रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय पर एंबुलेंस मिल जाती और वाहन ठीक स्थिति में होता तो शायद घायल की जान बचाई जा सकती थी।
विधायक निधि से दी गई थी एंबुलेंस
इस घटना में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। जिस एंबुलेंस से घायलों को ले जाया जा रहा था, वह विधायक निधि से दान में दी गई थी। 108 एंबुलेंस सेवा के जिला प्रबंधक ने स्पष्ट किया कि यह वाहन उनके विभाग के अंतर्गत नहीं आता है। उन्होंने बताया कि इस एंबुलेंस की देखरेख और रखरखाव की जिम्मेदारी माखननगर के बीएमओ की है। इस बयान के बाद स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी और लापरवाही को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों ने लगाए गंभीर आरोप
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल परिसर में खड़ी एंबुलेंस अक्सर खराब रहती है। कई बार उसमें डीजल नहीं होता और कई बार बैटरी खराब होने की समस्या सामने आती है।
लोगों का कहना है कि अगर वाहन की समय पर मरम्मत और देखभाल की जाती तो इस तरह की घटना नहीं होती। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में कई बार व्यवस्थाएं कागजों में ठीक दिखाई जाती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालत काफी खराब है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। एक ओर सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसी घटनाएं पूरे सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी पहले से ही एक बड़ी समस्या है। अगर उपलब्ध संसाधनों का भी सही तरीके से उपयोग और रखरखाव नहीं किया जाए तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
