कलम पर भारी पड़ी भीड़…इंदौर में तीन तलाक पर किताब लिखने आई कर्नाटक की लेखिका के साथ मारपीट, डेढ़ महीने बाद भी नहीं हुई FIR
By Ashish Meena
अप्रैल 6, 2026
इंदौर। मिनी मुंबई कहे जाने वाले इंदौर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ कलम की सिपाही को भीड़ की हिंसा का शिकार होना पड़ा। कर्नाटक की एक महिला लेखिका, जो मशहूर ‘शाहबानो तीन तलाक प्रकरण’ पर शोध करने और किताब लिखने इंदौर आई थीं, उन्हें ‘बच्चा चोर’ होने के झूठे शक में बेरहमी से पीटा गया। घटना के करीब डेढ़ महीने बीत जाने के बाद भी लेखिका न्याय के लिए भटक रही है।
क्या है पूरा विवाद?
कर्नाटक की लेखिका परवीन के अनुसार, वह नवंबर 2025 से शाहबानो केस पर रिसर्च कर रही थीं। सोशल मीडिया के जरिए शाहबानो के परिवार से संपर्क हुआ और 13 फरवरी को वह इंदौर पहुँचीं। खजराना इलाके में 15 फरवरी को उनके साथ मारपीट हुई। मामले में अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है। उनका कहना है कि बच्चा चोर बताकर भीड़ ने उनकी पिटाई की थी और थाने में समझौता करा दिया। 16 फरवरी को कर्नाटक लौटने के बाद से वह लगातार ऑनलाइन शिकायत कर रही हैं।
लेखिका का दावा है कि परिवार के सदस्यों ने जानकारी साझा करने के बदले 25 लाख रुपये की मांग की थी। 15 फरवरी को जब परवीन खजराना स्थित शाहबानो के घर पहुँचीं और करीब दो घंटे की बातचीत रिकॉर्ड की, तब विवाद शुरू हुआ। लेखिका का आरोप है कि उन्हें एक नए एग्रीमेंट पर साइन करने को मजबूर किया गया, जिसकी शर्तें पहले से अलग थीं। इनकार करने पर वहां मौजूद युवकों ने अभद्रता की और एग्रीमेंट फाड़कर उनके मुंह पर फेंक दिया।
‘बच्चा चोर’ का शोर और भीड़ का हमला
जब परवीन वहां से ऑटो में बैठकर निकलने लगीं, तभी साजिश के तहत ‘बच्चा चोर’ का शोर मचा दिया गया। देखते ही देखते भीड़ इकट्ठा हो गई और लेखिका के साथ मारपीट शुरू कर दी गई। उनके कपड़े खींचे गए और उन्हें मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। लेखिका ने खजराना पुलिस और एक आरक्षक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि थाने में उन्हें सुरक्षा देने के बजाय उन पर दबाव बनाया गया।
शाहबानो के परिवार से की गई दो घंटे की महत्वपूर्ण रिसर्च रिकॉर्डिंग को जबरन डिलीट करवाया गया। आरोप है कि समझौते के लिए 2 लाख रुपये की मांग की गई।
डेढ़ महीने से न्याय की गुहार
कर्नाटक लौटने के बाद जब परवीन ने सोशल मीडिया पर अपनी पिटाई का वीडियो देखा, तो उन्होंने ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई। लेखिका का कहना है कि वह पिछले डेढ़ महीने से इंदौर पुलिस के आला अधिकारियों से संपर्क कर रही हैं, लेकिन अब तक दोषियों के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं हुई है।
यह घटना न केवल इंदौर की छवि पर दाग लगाती है, बल्कि एक लेखिका की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी बड़ा हमला है। ‘बच्चा चोर’ की अफवाह फैलाकर किसी की जान जोखिम में डालना एक गंभीर अपराध है। अब देखना यह है कि इंदौर पुलिस इस मामले में एफआईआर दर्ज कर दोषियों को सलाखों के पीछे भेजती है या नहीं।
