LPG संकट के बीच केरोसिन की हुई वापसी, पेट्रोल पंपों पर होगी बिक्री, सरकार ने नियमों में दी ढील

By Ashish Meena
मार्च 29, 2026

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के चलते तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे दुनिया के कई देश ईंधन संकट का सामना कर रहे हैं. भारत को भी इस संकट का सामना करना पड़ रहा है. इस स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार कई कदम उठा रही है. इसी सिलसिले में सरकार ने अब घरों तक केरोसिन (मिट्टी का तेल) की आपूर्ति सुगम बनाने के लिए पेट्रोलियम सुरक्षा और लाइसेंसिंग नियमों में अस्थायी ढील दी है.

केंद्र सरकार के 29 मार्च को जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत 60 दिनों के लिए सुपीरियर केरोसिन ऑयल (SKO) की एड-हॉक आपूर्ति की अनुमति दी है ताकि आम लोगों को ईंधन की कमी का सामना न करना पड़े. इनमें दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात भी शामिल हैं.

इन बदलावों के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा संचालित चुनिंदा पेट्रोल पंपों को केरोसिन स्टोर और वितरित करने की अनुमति दी गई है. प्रत्येक चयनित आउटलेट अधिकतम 5,000 लीटर तक केरोसिन रख सकेगा और हर जिले में अधिकतम दो पेट्रोल पंपों को इसके लिए नामित किया जाएगा.

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अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि केरोसिन के स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े डीलरों और वाहनों को पेट्रोलियम रूल, 2002 के कुछ लाइसेंसिंग प्रावधानों से छूट दी गई है, ताकि सप्लाई चेन को तेज किया जा सके और अंतिम छोर तक डिस्ट्रीब्यूशन सुनिश्चित हो सके. हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि केरोसिन की आपूर्ति केवल घरेलू उपयोग- जैसे खाना पकाने और रोशनी के लिए ही की जाएगी, ताकि इसका दुरुपयोग रोका जा सके.

इस फैसले के तहत उन क्षेत्रों में भी अस्थायी रूप से PDS के जरिए केरोसिन आपूर्ति फिर शुरू की जा रही है, जहां इसे पहले चरणबद्ध तरीके से बंद कर दिया गया था, ताकि मौजूदा फ्यूल रिटेल नेटवर्क के जरिए तेजी से डिस्ट्रीब्यूशन सुनिश्चित किया जा सके. इस दौरान पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) की ओर से जारी सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश और ऑपरेशनल प्रोटोकॉल लागू रहेंगे.

बता दें कि भारत में केरोसिन की बिक्री पर पूरी तरह एक साथ देशभर में रोक नहीं लगाई गई थी, बल्कि इसे चरणबद्ध तरीके से कम किया गया. केंद्र सरकार ने 2015 के बाद से उज्ज्वला योजना और सौभाग्य योजना के जरिए एलपीजी और बिजली कनेक्शन को बढ़ावा देना शुरू किया. साथ ही पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS/राशन दुकानों) के माध्यम से सब्सिडी वाले केरोसिन (मिट्टी का तेल) की बिक्री धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से बंद की गई. दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ ने 2018-2020 के बीच सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत केरोसिन की बिक्री बंद कर दी और खुद को केरोसिन मुक्त घोषित किया.

पीडीएस के जरिए सब्सिडाइज केरोसिन की बिक्री रोकने के पीछे का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण कम करना, पेट्रोल/डीजल में मिलावट रोकना और सब्सिडी का बोझ घटाना था. 2020 तक अधिकांश जगहों पर इसका डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क लगभग समाप्त हो चुका था. जिन राज्यों में अब भी एलपीजी और बिजली की पहुंच सीमित थी, वहां केरोसिन की सीमित आपूर्ति जारी रखी गई.

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।