इस राज्य में अब तीसरा बच्चा पैदा करने पर मिलेंगे 25,000 रुपए, राज्य की गिरती प्रजनन दर को देखते हुए मुख्यमंत्री ने किया बड़ा ऐलान
By Ashish Meena
मार्च 7, 2026
आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य की गिरती प्रजनन दर को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने विधानसभा में एक नई जनसंख्या प्रबंधन नीति का प्रस्ताव रखा है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य में जन्म दर को बढ़ाना और भविष्य में संभावित जनसांख्यिकीय संकट को टालना है।
मुख्यमंत्री का कहना है कि पहले जनसंख्या बढ़ना एक समस्या माना जाता था, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। कई विकसित देशों की तरह भारत के कुछ हिस्सों में भी जन्म दर तेजी से घट रही है। ऐसे में आंध्र प्रदेश सरकार अब जनसंख्या वृद्धि को बोझ नहीं बल्कि **एक अवसर और वरदान** के रूप में देख रही है। इसी सोच के साथ सरकार नई नीति लागू करने जा रही है।
आंध्र प्रदेश की जनसंख्या नीति क्या है
आंध्र प्रदेश सरकार की प्रस्तावित जनसंख्या प्रबंधन नीति का उद्देश्य राज्य में गिरती प्रजनन दर को सुधारना है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने विधानसभा में बताया कि राज्य की टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) लगातार कम होती जा रही है।
1993 में राज्य की प्रजनन दर करीब 3.0 थी, जो अब घटकर 1.5 तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है। अगर यही स्थिति जारी रही तो आने वाले वर्षों में राज्य में युवा आबादी कम होती जाएगी और बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है। सरकार का मानना है कि युवा कार्यबल की कमी से आर्थिक विकास की गति भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए इस समस्या से निपटने के लिए नई नीति बनाई जा रही है।
तीसरे बच्चे पर आर्थिक प्रोत्साहन
नई जनसंख्या नीति के तहत सरकार तीसरे बच्चे के जन्म पर विशेष आर्थिक सहायता देगी। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अगर किसी परिवार में तीसरे बच्चे का जन्म होता है तो उन्हें 25,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
इसके अलावा सरकार उस बच्चे को पांच साल तक हर महीने 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता भी देगी। इतना ही नहीं, तीसरे बच्चे को 18 साल की उम्र तक मुफ्त शिक्षा प्रदान की जाएगी। सरकार का मानना है कि आर्थिक सहायता मिलने से परिवारों को बच्चों की परवरिश में मदद मिलेगी और लोग अधिक बच्चों के बारे में सोचने के लिए प्रेरित होंगे।
माता-पिता को मिलेगा विशेष अवकाश
आंध्र प्रदेश सरकार ने इस नीति में माता-पिता के लिए भी कई सुविधाओं की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि तीसरे बच्चे के जन्म पर माता को 12 महीने का मातृत्व अवकाश दिया जाएगा।
इसके साथ ही पिता को भी 2 महीने का पितृत्व अवकाश मिलेगा। सरकार का मानना है कि बच्चे के शुरुआती समय में माता-पिता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसलिए दोनों को समय देना जरूरी है। यह कदम परिवार और कार्यस्थल के बीच संतुलन बनाने में मदद करेगा।
‘लाइफ साइकिल सिस्टम’ से महिलाओं को सहयोग
सरकार इस नीति के तहत महिलाओं के लिए एक विशेष 5 चरणों वाला लाइफ साइकिल सिस्टम शुरू करेगी। इसमें मातृत्व, शक्ति, नैपुण्यम, क्षेम और संजीवनी जैसे कार्यक्रम शामिल होंगे।
इन कार्यक्रमों का उद्देश्य महिलाओं को स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं देना है। इसके तहत महिलाओं के लिए मातृत्व सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी बनाए जाएंगे। इन केंद्रों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और आईवीएफ (IVF) सेवाएं उपलब्ध होंगी। इससे उन दंपतियों को मदद मिलेगी जिन्हें संतान प्राप्ति में कठिनाई होती है।
कामकाजी महिलाओं के लिए नई सुविधाएं
आंध्र प्रदेश सरकार ने कामकाजी महिलाओं के लिए भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। विशाखापत्तनम में 172 करोड़ रुपये की लागत से एक बड़ा महिला हॉस्टल बनाया जाएगा। इस हॉस्टल में कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित और सुविधाजनक आवास मिलेगा। इसके अलावा शहरों में She Cabs यानी महिलाओं के लिए सुरक्षित कैब सेवा भी शुरू की जाएगी। सरकार का मानना है कि अगर महिलाओं को सुरक्षित और बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तो वे कामकाजी जीवन में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकेंगी।
हर 50 बच्चों पर बनेगा चाइल्ड केयर सेंटर
नई नीति के तहत सरकार बच्चों के लिए भी कई सुविधाएं शुरू करने जा रही है। इसके तहत हर 50 बच्चों पर एक चाइल्ड केयर सेंटर बनाया जाएगा।
इन केंद्रों में बच्चों की देखभाल के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य और पोषण पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों पर पिंक टॉयलेट भी बनाए जाएंगे, ताकि महिलाओं और बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
आर्थिक विकास से जुड़ा है जनसंख्या संतुलन
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का कहना है कि जनसंख्या संतुलन सीधे राज्य की अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है। अगर युवा आबादी कम होती जाएगी तो उद्योग और सेवाओं के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की संख्या भी घट जाएगी।
2023 की रिपोर्ट के अनुसार आंध्र प्रदेश में हर साल करीब 6.70 लाख बच्चों का जन्म हो रहा है। अगर यही स्थिति बनी रही तो 2047 तक बुजुर्गों की संख्या 23 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
महिला कार्यबल बढ़ाने पर भी जोर
सरकार का मानना है कि आर्थिक विकास के लिए महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ाना जरूरी है। फिलहाल राज्य में महिला कार्यबल की भागीदारी करीब 31 प्रतिशत है। सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 59 प्रतिशत तक पहुंचाना है। इसके लिए महिलाओं को रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी बेहतर सुविधाएं देने की योजना बनाई जा रही है।
स्थानीय चुनाव में भी मिला अवसर
आंध्र प्रदेश की गठबंधन सरकार ने पहले ही एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने स्थानीय निकाय चुनाव में उन लोगों को भी चुनाव लड़ने का मौका दिया है जिनके दो से अधिक बच्चे हैं। इसके अलावा ‘तल्लीकी वंदनम’ योजना के तहत भी बच्चों की संख्या की सीमा हटाकर आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया गया है। इससे सरकार का उद्देश्य यह दिखाना है कि अब जनसंख्या बढ़ना कोई समस्या नहीं बल्कि भविष्य के लिए जरूरी है।
