हरदा में आदिवासी किसान के साथ हैवानियत! दबंगों ने बेरहमी से पीटा, थूककर किया अपमानित, खुद को बताया ‘करणी सेना’ का सदस्य

By Ashish Meena
जनवरी 19, 2026

हरदा में आदिवासी किसान के साथ हैवानियत: मध्य प्रदेश के हरदा जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ के रहटगांव थाना क्षेत्र के ग्राम कपासी में एक आदिवासी किसान और उसके साथियों के साथ दबंगों द्वारा न केवल मारपीट की गई, बल्कि उन्हें जातिसूचक गालियाँ देकर और थूककर अपमानित भी किया गया। आरोपियों ने खुद को करणी सेना से जुड़ा बताते हुए पीड़ित परिवार को जान से मारने की धमकी दी है।

मामूली पूछताछ पर भड़के युवक

घटना 18 जनवरी 2026 की शाम की है। पीड़ित आदिवासी किसान अपने खेत में सिंचाई (पालेवा) का काम देख रहा था। इसी दौरान टेमागांव–कपासी रोड पर एक स्पोर्ट्स बाइक पर सवार दो युवक बार-बार चक्कर लगा रहे थे। जब किसान ने उनसे वहां रुकने का कारण पूछा, तो बाइक सवार आगबबूला हो गए। आरोपियों ने खेत की बाड़ से लकड़ी उखाड़कर किसान पर हमला कर दिया, जिससे उसके हाथ में गंभीर चोट आई।

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योगेंद्र सिंह मौर्य का नाम आया सामने

किसान के विरोध करने पर आरोपियों ने फोन कर अपने साथियों को बुला लिया। कुछ ही देर में एक चार पहिया वाहन से करीब 8 दबंग मौके पर पहुंचे। पीड़ित के अनुसार, हमलावरों का नेतृत्व टिमरनी निवासी योगेंद्र सिंह मौर्य कर रहा था। भीड़ ने निहत्थे किसान को चारों तरफ से घेर लिया और लात-घूंसों से पीटना शुरू कर दिया।

थूककर अपमानित किया और जान से मारने की धमकी दी

जब किसान को बचाने उसके दोस्त मनोज उइके और सुदामा धुर्वे आगे आए, तो हमलावरों ने उन्हें भी नहीं बख्शा। आरोप है कि हमलावरों ने खुद को ‘करणी सेना’ का रसूखदार सदस्य बताया और आदिवासी युवकों से जबरन माफी मंगवाई। हैवानियत यहीं नहीं रुकी, एक आरोपी ने मनोज उइके के ऊपर थूककर उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया। दबंगों ने चेतावनी दी कि “अगर थाने में रिपोर्ट की, तो जान से मार देंगे।”

पुलिस की कार्रवाई और मेडिकल रिपोर्ट

मारपीट में किसान के सीने, पीठ और हाथ में गहरी चोटें आई हैं। वहीं, मनोज उइके के पैर और कान पर गंभीर प्रहार किए गए हैं। घटना के बाद घायलों ने रहटगांव थाने पहुंचकर आपबीती सुनाई।

पुलिस ने योगेंद्र सिंह मौर्य और अन्य अज्ञात साथियों के विरुद्ध मारपीट, गाली-गलौज और SC/ST एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उन अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है जो फोर व्हीलर गाड़ी में सवार होकर आए थे।

मध्य प्रदेश में आदिवासियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा की घटनाओं ने सरकार और प्रशासन पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। हरदा की यह घटना सत्ता और संगठन के नाम पर की जा रही गुंडागर्दी का जीता-जागता उदाहरण है। अब देखना यह है कि क्या पुलिस रसूखदार आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर पीड़ित को न्याय दिला पाती है?

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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