देवास जिले में आधुनिक खेती से लाखों कमा रहे किसान, संभागायुक्त ने किसानों से उन्नत तकनीक की खेती और मुनाफा जाना

By Ashish Meena
फ़रवरी 26, 2026

देवास जिले के सोनकच्छ तहसील में किसान नारायण सिंह सेंधव ने आधुनिक खेती का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जो अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। उन्होंने खेती को केवल फसल उगाने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे उद्योग के रूप में विकसित किया। नारायण सिंह ने अपने खेत की हर गतिविधि का रिकॉर्ड रखा है, जिसमें बीज बोने से लेकर पौधों की देखभाल, सिंचाई, पोषण और फसल कटाई तक की पूरी जानकारी शामिल है।

हाल ही में संभागायुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर ऋतुराज सिंह उनके खेत पहुंचे और देखा कि किस तरह हाईटेक तकनीक, सुपरवाइजर की निगरानी और पेशेवर प्रबंधन से खेती में मुनाफा बढ़ाया जा सकता है। यह अनुभव न केवल प्रशासनिक अधिकारियों के लिए बल्कि किसानों के लिए भी सीखने योग्य रहा।

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सुपरवाइजर और बैलेंस शीट से पूर्ण निगरानी

नारायण सिंह का कहना है कि आधुनिक खेती में हर कदम का लेखा-जोखा रखना जरूरी है। उनके खेत में 6 सुपरवाइजर कार्यरत हैं, जो हर प्रक्रिया की निगरानी करते हैं। इसमें पौधों की जर्मिनेशन, बीमारियों से सुरक्षा, पोषण और पोलीनेशन तक शामिल है।

हर काम का बैलेंस शीट में रिकॉर्ड रखा जाता है। कब पौधा बोया गया, कितनी खाद और पानी दिया गया, कितने श्रमिक लगे, कितना खर्च हुआ यह सब व्यवस्थित तरीके से दर्ज है। इस व्यवस्थित प्रबंधन से फसल की गुणवत्ता और मुनाफा दोनों बढ़ते हैं।

हाईटेक उपकरण और मशीनरी से तेजी से उत्पादन

नारायण सिंह के खेत में आधुनिक मशीनरी का भी प्रयोग हो रहा है। उनके पास ऐसी मशीन है जो 1 दिन में 4 लाख बीज सीडिंग कर देती है। इसके अलावा 15 लाख की दूसरी मशीन खरीदने की योजना भी है।

बीज की जर्मिनेशन, पौधों की देखभाल और समय पर पोषण से पौधे 20 दिन में तैयार हो जाते हैं। इसके कारण, बीज में से लगभग 90% पौधों की बिक्री हो जाती है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता है।

करेला की फसल से लाखों का मुनाफा

नारायण सिंह के अनुसार, सालाना 1 एकड़ में उगाए गए करेलों से लगभग 8 लाख रुपए की आमदनी होती है। इस साल उनकी करेला फसल मंडी में 80 रुपए प्रति किलो बिक रही है। इसके अलावा सफेद करेला की फसल जल्द बिक्री के लिए तैयार होगी, जिसका अनुमानित मूल्य 105-110 रुपए प्रति किलो है।

उनके कुल 14 हेक्टेयर खेत से सालाना 20-25 लाख रुपए तक की आय होती है। यह सिर्फ व्यक्तिगत लाभ ही नहीं है, बल्कि 40 से अधिक लोगों को रोजगार भी मिलता है।

सरकारी योजनाओं और कृषि उद्योग का समर्थन

कृषि विभाग और उद्यानिकी विभाग की योजनाओं से किसानों को सहायता राशि भी मिलती है। सरकार लगातार किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने और कृषि आधारित उद्योग लगाने के लिए प्रेरित कर रही है।

नारायण सिंह का उदाहरण दिखाता है कि कैसे खेती को उद्योग की तरह प्रबंधित करके आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है। यह मॉडल अन्य किसानों के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा का काम कर सकता है।

 

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।