देवास: खातेगांव तहसील के इस गांव में 5 महीने से नहीं मिला राशन, सड़क पर उतरे ग्रामीण, बस स्टैंड पर किया चक्काजाम, SDM ने दिया ये आश्वासन

By Ashish Meena
फ़रवरी 10, 2026

मध्य प्रदेश के देवास जिले की खातेगांव तहसील के ग्राम राजौर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को लेकर गंभीर संकट गहरा गया है। पिछले पाँच महीनों से राशन की किल्लत झेल रहे ग्रामीणों का सब्र सोमवार को जवाब दे गया। सरकारी राशन दुकान के डीलर की कथित अनियमितताओं और प्रशासन की अनदेखी से नाराज सैकड़ों ग्रामीणों ने खातेगांव बस स्टैंड पर चक्काजाम कर दिया, जिससे घंटों तक आवागमन प्रभावित रहा।

भूख से जंग लड़ रहे ग्रामीण

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें लंबे समय से पात्रता के बावजूद अनाज नहीं दिया जा रहा है। पात्र हितग्राही परिवारों को सरकारी राशन न मिलने के कारण उन्हें ऊंचे दामों पर बाजार से अनाज खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पोर्टल पर फर्जी अंगूठे (Biometric Fraud) लगाकर उनके हक का राशन गबन किया जा रहा है और खाद्य विभाग के अधिकारी इस पर मौन साधे हुए हैं।

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प्रशासनिक उपेक्षा पर भड़का गुस्सा

सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी शिकायत लेकर एसडीएम (SDM) कार्यालय पहुंचे थे। करीब आधे घंटे तक इंतजार करने के बाद जब कोई जिम्मेदार अधिकारी उनसे मिलने नहीं आया, तो ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। नारेबाजी करते हुए ग्रामीण खातेगांव बस स्टैंड पहुंचे और मुख्य मार्ग पर धरने पर बैठ गए।

नारेबाजी और चक्काजाम

चक्काजाम के दौरान ग्रामीणों ने खाद्य विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मौके पर थाना प्रभारी विजय सिंह लोधी और तहसीलदार अवधेश यादव ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी एसडीएम को बुलाने और ठोस कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।

SDM का लिखित आश्वासन और जाँच के आदेश

स्थिति को देखते हुए एसडीएम प्रवीण प्रजापति स्वयं मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को थाना परिसर में चर्चा के लिए बुलाया। चर्चा के दौरान एसडीएम ने स्वीकार किया कि वितरण व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।

उन्होंने ग्रामीणों को लिखित आश्वासन दिया कि दो दिन के भीतर राजौर में राशन वितरण की वैकल्पिक व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी। राशन गबन और फर्जीवाड़े की विस्तृत जाँच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। आगामी माहों में वितरण की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

“दो दिन में समाधान नहीं तो बड़ा आंदोलन”

एसडीएम के लिखित भरोसे के बाद ग्रामीणों ने चक्काजाम समाप्त किया। हालांकि, ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर उन्हें अनाज नहीं मिला और लापरवाह अधिकारियों पर एक्शन नहीं हुआ, तो वे दोबारा उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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