2026 में इन 5 राज्यों में होंगे विधानसभा चुनाव, भाजपा के टारगेट पर पश्चिम बंगाल, केरल में कांग्रेस की वापसी के आसार! जानें कहां-कैसे बन रहे चुनावी समीकरण

By Ashish Meena
जनवरी 3, 2026

Elections in 2026 : इस साल पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं। यह अप्रैल-मई के दरमियान होने हैं। फिलहाल, इनमें से एक राज्य में BJP के मुख्यमंत्री हैं और एक केन्द्र शासित प्रदेश में BJP अपने सहयोगी दल के साथ सरकार में है। इन राज्यों में कांग्रेस के पास एक भी CM नहीं है। हालांकि तमिलनाडु में वह गठबंधन के जरिए सरकार का हिस्सा बनी हुई है।

NDA vs INDIA ब्लॉक की तुलना करें तो तीन राज्यों में INDIA ब्लॉक के पास सत्ता है। वहीं, NDA के पास एक राज्य और एक केन्द्र शासित प्रदेश है। इस साल इन राज्यों की सत्ता में परिवर्तन के कितने आसार हैं और यहां क्या चुनावी समीकरण बन रहे हैं? इन्हीं सवालों के जवाब इस आर्टिकल में जानने की कोशिश करेंगे…

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असम
यहां पिछले दो चुनाव में BJP सबसे बड़ी पार्टी रही। CM भी BJP के ही रहे। 2016 में सर्वानंद सोनवाल मुख्यमंत्री बने। 2021 से हिमंता बिस्वा सरमा सत्ता संभाल रहे हैं। 2016 से पहले लगातार 15 साल तक यहां कांग्रेस के तरुण गोगई CM रहे। 2026 में उनके बेटे गौरव गोगई ही कांग्रेस का CM चेहरा हो सकते हैं। फिलहाल वह असम प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष हैं।

2026 में होने वाले चुनाव के लिए BJP का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। हालांकि कांग्रेस भी ज्यादा पीछे नहीं दिखती। वह गठबंधन के सहारे BJP को चुनौती दे सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि NDA और कांग्रेस गठबंधन में 2% वोट शेयर का ही अंतर रहा है, जिसे पाटना ज्यादा मुश्किल काम नहीं।

विधानसभा चुनाव 2021 में NDA का वोट शेयर 45% रहा, वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले महाजोत अलायंस का वोट शेयर 43.4 रहा। इसी तरह लोकसभा चुनाव 2024 में भी यह अंतर 2% से कम ही रहा। NDA को 40.4 फीसदी और INDIA ब्लॉक को 38.6 प्रतिशत वोट हासिल हुए।

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पश्चिम बंगाल
पिछले 15 साल से यहां तृणमूल कांग्रेस की सरकार है। इससे पहले 33 साल यहां मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) की सरकार रही। यानी यहां पिछले 5 दशकों से न तो कांग्रेस की सरकार बनी और न ही BJP की। आज से 48 साल पहले यहां जरूर कांग्रेस के पास सत्ता थी। लेकिन फिलहाल यह पार्टी यहां मुकाबले में कहीं नजर नहीं आ रही है।

BJP के लिए यह राज्य बेहद अहम है। वह यहां मुख्य विपक्षी पार्टी है। हालिया बिहार चुनाव में धमाकेदार जीत के बाद BJP का पूरा फोकस अब पश्चिम बंगाल पर है। पार्टी यहां इलेक्शन मोड में भी आ चुकी है। हालांकि TMC का कैडर भी BJP की तरह ही मजबूत है। ऐसे में BJP के लिए बंगाल जीतना इस बार भी इतना आसान नहीं है।

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एक फैक्ट यह भी है कि एक साल पहले हुए लोकसभा चुनाव में BJP और TMC के बीच 7% वोट शेयर का अंतर था। इसे पाटना BJP के लिए चुनौती रहने वाला है। उधर, कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन के लिए यहां खोने के लिए कुछ नहीं बचा है।

BJP को यहां लेफ्ट, कांग्रेस और AIMIM से फायदा मिलेगा। यह दोनों पार्टियां TMC के वोट काटने वाली साबित हो सकती हैं। इसके अलावा हुमायूं कबीर का भी फैक्टर है। बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने का ऐलान करने वाले विधायक हुमायूं कबीर को TMC ने सस्पेंड कर दिया है। वह नई पार्टी बना चुके हैं। ऐसे में वह बड़ी संख्या में TMC के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं।

केरल
यहां पिछले 10 साल से लेफ्ट फ्रंट (LDF) की सरकार है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) के नेता पिनराई विजयन मुख्यमंत्री हैं। कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी है। इस बार कांग्रेस की लीडरशिप वाला UDF गठबंधन यहां सरकार बना सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में यहां कांग्रेस का परफॉर्मेंस शानदार रहा था।

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10 साल से लगातार सत्ता में रहने के कारण वामपंथी दलों को सत्ता विरोधी लहर से नुकसान होता दिखाई दे रहा है। हाल ही में हुए निकाय चुनावों से यह साफ हुआ है। निकाय चुनाव में कांग्रेस गठबंधन वाले UDF को ज्यादातर जगहों पर जीत मिली थी।

हाल ही में BJP ने भी यहां इतिहास रचा है। पहली बार केरल के किसी कार्पोरेशन में BJP को मेयर पद मिला है। तिरुवनंतपुरम निकाय चुनाव में BJP ने जीत दर्ज की है। इससे पहले पिछले लोकसभा चुनाव में भी तिरुवनंतपुरम सीट पर शशि थरूर को BJP प्रत्याशी राजीव चंद्रशेखर से कड़ी टक्कर मिली थी। त्रिशुर में तो BJP को जीत भी मिली थी। यानी BJP भी यहां अब अहम किरदार में है। वह विधानसभा चुनाव में कुछ छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन कर मैदान में उतरेगी हालांकि इक्का-दुक्का सीट पर ही यह पार्टी चुनौती देते हुए दिख रही है।

तमिलनाडु
बीते कुछ दशकों से यहां बारी-बारी से DMK और AIADMK का राज रहा है। कांग्रेस और BJP के लिए यहां ज्यादा कुछ नहीं है। हालांकि BJP के मुकाबले कांग्रेस का प्रदर्शन थोड़ा बेहतर रहा है। यह पार्टी लंबे अरसे से DMK के साथ गठबंधन में है। वहीं, BJP हमेशा से AIADMK को सपोर्ट करती रही है।

पिछले विधानसभा चुनाव में DMK और कांग्रेस गठबंधन को एकतरफा जीत मिली थी। लोकसभा चुनाव में भी इस अलायंस ने विपक्षी अलायंस का सुपड़ा साफ कर दिया था। राज्य में DMK का प्रभाव अच्छा है। जयललिता के गुजर जाने के बाद AIADMK लगातार कमजोर हो रही है।

अगर बात सिर्फ कांग्रेस और BJP की करें तो पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को यहां 9 सीट हासिल हुई थी, इसके उलट BJP का खाता नहीं खुल पाया था। BJP के लिए तमिलनाडु में सत्ता हासिल करना अभी भी बेहद दूर नजर आता है।

वैसे, DMK के लिए इस बार का चुनाव पहले की तरह आसान नहीं रहने वाला है। ऐसा इसलिए क्योंकि तमिल फिल्मों के सुपरस्टार विजय थलापति की TVK पार्टी भी मैदान में होगी। विजय को अच्छा जनसमर्थन मिल रहा है। उनकी लोकप्रियता स्टालिन को सत्ता में वापसी से रोक सकती है।

पुडुचेरी
इस केन्द्र शासित प्रदेश में AINR कांग्रेस की सरकार है। एन रंगास्वामी मुख्यमंत्री हैं। इन्होंने 2011 में कांग्रेस से अलग होकर यह पार्टी बनाई थी। 2016 में यहां कांग्रेस की सरकार थी। 2021 में यहां कांग्रेस और DMK ने मिलकर चुनाव लड़ा था। 2026 में होने वाले चुनाव में भी यह गठबंधन कायम रहेगा। इस बार इस अलायंस को सत्ता विरोधी लहर का फायदा मिलते नजर आ रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक साल पहले हुए लोकसभा चुनाव में यहां की एक सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी विजय हुए थे।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।