कलवार में पिछले 10 दिनों से भूखे बैठे है किसान, धरनास्थल पर पहुंचे भाजपा नेता संतोष मीणा, हर कदम पर साथ खड़े रहने का दिया आश्वासन

By Ashish Meena
सितम्बर 28, 2025

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र विदिशा के गांव कलवार में इंदौर-बुधनी रेल लाइन परियोजना के लिए हो रहे उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसानों का गुस्सा चरम पर है। अपनी पुश्तैनी ज़मीन बचाने के लिए पिछले 10 दिनों से किसान भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इस आंदोलन को आसपास के कई गांवों का व्यापक समर्थन मिल रहा है।

तीन किसानों की बिगड़ी तबीयत, आंदोलन अब भी तेज़
भूख हड़ताल के दौरान किसानों की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। हाल ही में, रामहेत सीरा, भूरू पठान और लेखराज झाला की स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसके बावजूद, किसान रवि मीणा, संतोष छानवाल और मुंशी पठान अभी भी अपनी मांगों पर डटे हुए हैं और उनका अनशन जारी है।

बीजेपी नेता ने दिया समर्थन, जल्द समाधान का आश्वासन
शनिवार को, बीजेपी नेता संतोष मीणा ने भूख हड़ताल पर बैठे किसानों से मुलाक़ात की और उन्हें हर कदम पर साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया। संतोष मीणा ने जिन किसानों कि तबियत बिगड़ी उनके घर पहुंचकर उनका हाल चाल जाना। यह वही संतोष मीणा हैं जिन्होंने पिछले आंदोलन के दौरान भी कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से इस विषय पर चर्चा की थी। संतोष मीणा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा किसान हितैषी रही है और इस समस्या का समाधान जल्द ही बातचीत के जरिए निकाला जाएगा।

क्या है किसानों की मुख्य मांग?
यह प्रदर्शन कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र विदिशा के खातेगांव विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले कलवार गांव में चल रहा है। अनशन पर बैठे किसान रवि मीणा ने बताया कि वे वर्षों से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। दो साल पहले उन्होंने पंजाब की तर्ज़ पर 8 महीने तक लगातार आंदोलन किया था।

किसानों की प्रमुख माँगे निम्नलिखित हैं
रेल लाइन का रूट परिवर्तन
उनकी मांग है कि कलवार घाट से धनतालाब घाट तक रेलवे लाइन के रूट को बदला जाए और इसे सरकारी या वन भूमि में से निकाला जाए ताकि उपजाऊ कृषि भूमि का नुकसान न हो।

बाज़ार मूल्य से चार गुना मुआवजा
किसानों का कहना है कि जिस तरह इंदौर जिले में आउटर रिंग रोड परियोजना में गाइडलाइन बढ़ाकर मुआवजा दिया गया था, उसी तरह इंदौर-बुधनी रेलवे लाइन से प्रभावित गांवों की भी गाइडलाइन बढ़ाई जाए और उन्हें बाज़ार मूल्य से चार गुना मुआवजा दिया जाए। किसान ज़ोर देकर कह रहे हैं कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका यह जमीनी संघर्ष जारी रहेगा।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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