कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, अब बेकार नहीं जाएंगी बची हुई छुट्टियां, हर साल मिलेगा पैसा
By Ashish Meena
अप्रैल 7, 2026
क्या आपके ऑफिस की छुट्टियां हर साल इसलिए बर्बाद हो जाती हैं क्योंकि आप काम के बोझ तले उन्हें ले नहीं पाते? अक्सर प्राइवेट सेक्टर में कर्मचारियों की शिकायत रहती है कि साल के अंत में उनकी मेहनत की कमाई जैसी ‘लीव’ (Leaves) बिना किसी फायदे के लैप्स हो जाती हैं। लेकिन अब वक्त बदल गया है।
1 अप्रैल से प्रभावी हुए न्यू लेबर कोड (New Labour Code) के नए नियमों ने कर्मचारियों को एक बड़ी राहत दी है। अब आपकी बची हुई छुट्टियां न केवल सुरक्षित रहेंगी, बल्कि वे आपकी कमाई का जरिया भी बनेंगी। आइए समझते हैं कि सरकार के इस नए नियम का फायदा आपको कैसे मिलेगा।
अब हर साल होगा हिसाब
पुराने नियमों के मुताबिक, अधिकांश कंपनियों में छुट्टियों के बदले पैसा (Leave Encashment) तभी मिलता था जब कर्मचारी इस्तीफा देता था या रिटायर होता था। कुछ गिनी-चुनी कंपनियां ही सालाना आधार पर पैसे देती थीं। लेकिन न्यू लेबर कोड ने इसे अनिवार्य बना दिया है। अब हर कंपनी को अपनी पॉलिसी में बदलाव कर बची हुई छुट्टियों का भुगतान करना होगा।
क्या है 30 दिनों वाला नया नियम?
नए लेबर कोड के तहत ‘ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन’ (OSH Code) के नियमों में स्पष्ट किया गया है कि कर्मचारियों की छुट्टियां अब ‘कैरी फॉरवर्ड’ (अगले साल के लिए जुड़ना) की जाएंगी।
यदि आपकी जमा छुट्टियां अगले साल के लिए फॉरवर्ड होते-होते 30 दिन से अधिक हो जाती हैं, तो कंपनी के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह अतिरिक्त छुट्टियों के बदले आपको नकद भुगतान (Cash Payment) करे।
उदाहरण के लिए: अगर साल के अंत में आपके खाते में 45 छुट्टियां बची हैं, तो नियम के अनुसार 30 छुट्टियां अगले साल के लिए सुरक्षित रखी जा सकती हैं, लेकिन बाकी बची 15 छुट्टियों का पैसा कंपनी को उसी साल आपके बैंक खाते में डालना होगा।
छुट्टियां वेस्ट होने का डर हुआ खत्म
अक्सर कर्मचारी इस डर से छुट्टियां लेते थे कि साल खत्म होने पर वे शून्य हो जाएंगी। अब सरकार ने इसे कर्मचारियों के ‘हक’ के रूप में स्थापित किया है। ज्वाइनिंग के समय मिलने वाली छुट्टियों का कोटा अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगा।
विशेष बात: यह नियम उन सभी संस्थाओं और कंपनियों पर लागू होगा जो लेबर कोड के दायरे में आती हैं। इससे न केवल कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर भी पारदर्शिता आएगी।
