धुलेटी के जश्न में नदी-तालाब में नहाने गए लोग… और फिर मच गई चीख-पुकार! गुजरात में दर्दनाक हादसा

By Ashish Meena
मार्च 6, 2026

जहां पूरा देश होली और रंगोत्सव के जश्न में डूबा हुआ था, वहीं गुजरात के कई जिलों से आई खबरों ने लोगों को स्तब्ध कर दिया। रंग खेलने के बाद नदी और तालाब में नहाने गए कई लोगों की डूबने से मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब लोग धुलेटी का उत्सव मना रहे थे।

गुजरात के अलग-अलग जिलों में हुए इन हादसों में 24 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। कई परिवारों के लिए त्योहार का दिन मातम में बदल गया। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि त्योहार के दौरान नदी और तालाबों में नहाने से बचें और सावधानी बरतें।

धुलेटी के जश्न में बदला मातम

गुजरात में होली के अगले दिन धुलेटी का त्योहार बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। लोग रंगों के साथ जश्न मनाते हैं और कई जगहों पर पानी में नहाकर रंग साफ करते हैं। लेकिन इस बार धुलेटी का उत्सव कई परिवारों के लिए दुखद साबित हुआ। राज्य के अलग-अलग जिलों में नदी, तालाब और पानी के अन्य स्रोतों में नहाने गए लोग गहरे पानी में चले गए और डूबने की घटनाएं सामने आईं। इन हादसों ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। जिन घरों में सुबह तक रंगों का उत्सव था, वहां कुछ ही घंटों में शोक का माहौल छा गया।

महीसागर जिले में सबसे बड़ा हादसा

सबसे बड़ी घटना गुजरात के महीसागर जिले में सामने आई। कोठंबा के पास राघवना मुवाड़ा गांव में चार युवक एक तालाब में नहाने गए थे। बताया जा रहा है कि नहाने के दौरान अचानक वे गहरे पानी में चले गए और बाहर नहीं निकल सके। जब आसपास के लोगों को घटना का पता चला तो तुरंत मदद की कोशिश की गई, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। चारों युवकों की मौत की खबर से पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई।

कई जिलों से सामने आई डूबने की घटनाएं

गुजरात के कई अन्य जिलों से भी इसी तरह की दर्दनाक घटनाएं सामने आई हैं। अरावली, सूरत, अमरेली, पंचमहल, राजकोट, मेहसाणा, देवभूमि द्वारका और नर्मदा जैसे जिलों में भी डूबने की घटनाएं दर्ज की गईं। इन सभी हादसों को मिलाकर मृतकों की संख्या 24 से अधिक बताई जा रही है। त्योहार के दिन इतने लोगों की मौत ने प्रशासन और समाज दोनों को चिंता में डाल दिया है।

बच्चों की मौत से बढ़ा दर्द

इन हादसों में केवल युवा ही नहीं बल्कि बच्चे भी शिकार बने। पंचमहल जिले के नवा जांभु फली इलाके में दो मासूम बच्चे रायचंद और जैमीन डामोर भी पानी में डूब गए। बताया जा रहा है कि वे अन्य लोगों के साथ पानी में गए थे, लेकिन अचानक गहराई बढ़ने के कारण बाहर नहीं निकल सके। बच्चों की मौत की खबर से पूरे इलाके में मातम का माहौल बन गया।

रेस्क्यू टीमों ने घंटों चलाया अभियान

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं। रेस्क्यू टीमों ने कई घंटों तक खोज अभियान चलाया और पानी से शवों को बाहर निकाला। इसके बाद शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेजा गया। प्रशासन ने इन सभी मामलों की जांच शुरू कर दी है।

त्योहारों के दौरान बढ़ जाती हैं ऐसी घटनाएं

विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारों के दौरान इस तरह की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं। होली के समय लोग रंग खेलने के बाद नदी या तालाब में नहाने के लिए जाते हैं। लेकिन कई जगहों पर पानी की गहराई का सही अंदाजा नहीं होता और सुरक्षा इंतजाम भी नहीं होते। ऐसी स्थिति में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

प्रशासन की अपील: गहरे पानी से दूर रहें

इन हादसों के बाद प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि त्योहार के दौरान लोग उत्साह में अक्सर जोखिम उठाने लगते हैं। नदी, तालाब और बांध जैसे स्थानों पर नहाने से पहले सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। प्रशासन ने यह भी कहा कि अगर किसी जगह पर पानी की गहराई अधिक हो तो वहां जाने से बचना चाहिए।

 

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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