इंदौर: भागीरथपुरा की हर गली से उठ रही अर्थी, शमशान बनीं गलियां, 28 मौतों के बाद भी कई मरीज वेंटिलेटर पर, शुद्ध पानी के लिए तरस रहे लोग

By Ashish Meena
जनवरी 26, 2026

पानी के लिए तरस रहे लोग: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर का भागीरथपुरा क्षेत्र इन दिनों मौत के साये में जी रहा है। दूषित पानी (Contaminated Water) के कारण फैली बीमारी ने अब तक कई परिवारों को उजाड़ दिया है। रविवार को एक और दुखद खबर सामने आई, जब क्षेत्र के सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता, रिटायर्ड शिक्षक और कांग्रेस वार्ड अध्यक्ष राजाराम बौरासी (75) का इलाज के दौरान निधन हो गया। इसके साथ ही इस त्रासदी में जान गंवाने वालों का आधिकारिक और अनौपचारिक आंकड़ा 28 तक पहुंच गया है।

दूसरों को अस्पताल पहुंचाने वाले ने खुद अस्पताल में तोड़ा दम

राजाराम बौरासी केवल एक राजनीतिक पद पर नहीं थे, बल्कि वे भागीरथपुरा के ‘संकटमोचक’ बने हुए थे। क्षेत्र के लोग बताते हैं कि जब से दूषित पानी का संकट शुरू हुआ, बौरासी जी दिन-रात बीमार लोगों को अस्पताल पहुँचाने और डॉक्टरों की मदद करने में जुटे थे।

स्वजनों के अनुसार, शुक्रवार को उन्हें उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। हालत बिगड़ने पर शनिवार को उन्हें सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ रविवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने हृदय रोग और डायबिटीज का हवाला देते हुए दूषित पानी से मौत की पुष्टि पर संशय जताया है, लेकिन स्थानीय निवासी इसे सीधे तौर पर जल प्रदूषण से जोड़ रहे हैं।

शमशान बनीं भागीरथपुरा की गलियां

भागीरथपुरा की स्थिति इतनी भयावह है कि शायद ही कोई ऐसी गली बची हो जहाँ से अंतिम यात्रा न निकली हो। रहवासियों का कहना है कि “कल तक जो हमारे साथ स्वस्थ थे, आज वे इस दुनिया में नहीं हैं। हमें विकास नहीं, सिर्फ शुद्ध पानी (Pure Water) चाहिए।”

अभी भी कई जिंदगियां दांव पर

दूषित पानी के कारण बीमार होने का सिलसिला थमा नहीं है। वर्तमान में 10 से अधिक मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें से 04 मरीज आईसीयू (ICU) में जीवन-मौत के बीच जूझ रहे हैं। 02 मरीज वेंटिलेटर पर हैं, जिनकी हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है।

सियासी उबाल- जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा

इस त्रासदी पर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “भाजपा सरकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार और अहंकार ने जहरीला पानी पिलाकर अब तक 28 निर्दोष लोगों की जान ले ली है। आखिर इन लोगों का अपराध क्या था?”

इन परिवारों ने खोया अपना चिराग

सुमित्रा देवी(50), अशोकलाल पंवार(70), गोमती रावत(50), उर्मिला यादव(69), जीवनलाल बरेडे(75), सीमा प्रजापत(35), संतोष बिगोलिया(72), अव्यान साहू( छह माह), श्रवण खुपराव(81), रामकली(47), नंदलाल(75), उमा कोरी(29), मंजूला (70), ताराबाई(60), हीरालाल(65), अरविंद लिखर(40), गीताबाई(60), हरकुंवर बाई(75), शंकर भाया(70), ओमप्रकाश शर्मा(69), कमलाबाई(59), सुनीता वर्मा(49), भगवानदास(64), सुभद्रा बाई(78), हेमंत गायकवाड़(51), विद्या बाई(82), बद्री प्रसाद(63), राजाराम बौरासी(75)।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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