Ladli Behna Yojana: लाड़ली बहनों के लिए आई बड़ी खुशखबरी, CM मोहन यादव ने विधानसभा में बताया कब से मिलेंगे 3000 रुपए, नए पंजीयन पर भी दिया बड़ा बयान
By Ashish Meena
फ़रवरी 23, 2026
Ladli Behna Yojana : मध्यप्रदेश विधानसभा में सोमवार को लाड़ली बहना योजना को लेकर चर्चा हुई। महिलाओं के लिए शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना पर विपक्ष ने कई सवाल उठाए। नए पंजीयन क्यों नहीं हो रहे? 3000 रुपये प्रतिमाह देने का वादा कब पूरा होगा? और 60 साल की उम्र पूरी होते ही नाम क्यों काट दिया जाता है?
इन सवालों के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 3000 रुपये देने का वादा भाजपा के संकल्प पत्र में है और यह वादा 2028 तक पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि “किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है, हम तीन हजार रुपये देकर रहेंगे।” नए पंजीयन को लेकर उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे सब होगा। कांग्रेस के सदस्य सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और विरोध स्वरूप बहिर्गमन कर गए।

क्या है सरकार की योजना?
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि लाड़ली बहना योजना की राशि चरणबद्ध तरीके से बढ़ाई जा रही है। शुरुआत में यह योजना 1000 रुपये प्रतिमाह से शुरू हुई थी। बाद में इसे बढ़ाकर 1250 और फिर 1500 रुपये किया गया। वर्ष 2025-26 में 1500 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से अब तक 18,528 करोड़ रुपये महिलाओं को दिए जा चुके हैं। सरकार का दावा है कि यह राशि महिलाओं के शिक्षा, पोषण और घरेलू जरूरतों में मदद कर रही है। 3000 रुपये प्रतिमाह देने की घोषणा पांच साल की अवधि के लिए की गई है। यानी 2028 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह चुनावी वादा नहीं बल्कि दीर्घकालिक योजना है।
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नए पंजीयन पर क्या बोले मंत्री?
प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक महेश परमार ने नए पंजीयन न होने पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने 3000 रुपये का वादा किया लेकिन अभी तक लागू नहीं किया। महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने जवाब में बताया कि योजना की शुरुआत से लेकर अब तक 1,31,06,525 महिलाओं का पंजीयन किया गया है। इनमें से 1,25,29,051 पंजीयन वर्तमान में सक्रिय हैं। हालांकि, नए पंजीयन को लेकर उन्होंने कहा कि फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। मुख्यमंत्री ने इस पर कहा कि “धीरे-धीरे सब होगा।”

60 वर्ष की आयु के बाद क्यों हटता है नाम?
लाड़ली बहना योजना में यह प्रावधान है कि यदि किसी हितग्राही की मृत्यु हो जाती है या उसकी उम्र 60 वर्ष से अधिक हो जाती है तो उसे योजना से बाहर कर दिया जाता है। सरकार का कहना है कि 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को अन्य योजनाओं में पात्रता के अनुसार आवेदन करने का मौका दिया जाता है। विपक्ष ने इस नियम को लेकर भी सवाल उठाए और इसे अन्यायपूर्ण बताया।
विपक्ष का विरोध और बहिर्गमन
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने नए पंजीयन शुरू करने की तारीख पूछी। साथ ही कुछ मंत्रियों पर कथित बयानबाजी और धमकाने के आरोप भी लगाए गए।मुख्यमंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर विपक्ष ने नारेबाजी की और सदन से बहिर्गमन कर दिया। सरकार का कहना है कि योजना पारदर्शी तरीके से चल रही है और इसका लाभ करोड़ों महिलाओं को मिल रहा है।
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लाड़ली बहना योजना का असर
लाड़ली बहना योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। सरकार का दावा है कि इस योजना से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को सीधा लाभ मिला है। घरेलू खर्च में मदद, बच्चों की पढ़ाई में सहयोग, पोषण और स्वास्थ्य पर खर्च, छोटी बचत की शुरुआत। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं के आत्मविश्वास में भी वृद्धि हुई है।
