कलयुगी मां ने ढाई साल की बेटी की हत्या की, बोली- लगातार परेशान कर रही थी, गुस्से में आकर रूमाल से गला घोंट दिया
By Ashish Meena
जनवरी 16, 2026
मां ने ढाई साल की बेटी की हत्या की: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से दिल को दहला देने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ एक माँ ने अपनी ही ढाई साल की सगी मासूम बेटी की बेरहमी से हत्या कर दी। ममता को शर्मसार कर देने वाली इस वारदात के पीछे जो वजह सामने आई है, उसने समाज और पुलिस प्रशासन दोनों को स्तब्ध कर दिया है। आरोपी महिला का कहना है कि बच्ची उसे “लगातार परेशान” कर रही थी, जिससे गुस्सा होकर उसने यह खौफनाक कदम उठाया।
10 जनवरी को हुई थी वारदात, अब हुआ खुलासा
यह सनसनीखेज मामला छिंदवाड़ा के चांद थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम परसगांव का है। 10 जनवरी 2026 को ढाई साल की मासूम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। बच्ची के पिता रामदास चौरिया (40) ने पुलिस को सूचना दी थी कि उसकी बेटी की अज्ञात कारणों से मौत हुई है। शुरुआत में इसे प्राकृतिक मौत माना जा रहा था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मामले की दिशा ही बदल दी।
रूमाल से घोंटा गया था गला
पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि बच्ची की मौत सामान्य नहीं थी, बल्कि उसका गला घोंटा गया था। इसके बाद प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षक ललित बैरागी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जांच तेज की। जब शक की सुई मां संगीता चौरिया (35) की ओर घूमी, तो पुलिस ने उससे कड़ाई से पूछताछ की।
गुस्से और तनाव में खोया आपा
पूछताछ के दौरान आरोपी मां संगीता ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि वह काफी समय से तनाव में थी और बच्ची की छोटी-छोटी हरकतों और उसके परेशान करने से वह तंग आ गई थी। 10 जनवरी को जब बच्ची रो रही थी, तब संगीता ने गुस्से में आकर कान में बांधने वाले रूमाल से बच्ची का गला घोंट दिया और फिर हाथों से भी गला दबाया, जिससे मासूम की मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस की कार्रवाई: आरोपी मां भेजी गई जेल
पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर 13 जनवरी 2026 को आरोपी माँ के खिलाफ हत्या (IPC/BNS की संबंधित धाराएं) का मामला दर्ज किया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी संगीता चौरिया को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे छिंदवाड़ा जिला जेल भेज दिया गया है।
इस मामले के खुलासे में चांद थाना प्रभारी ललित बैरागी और उनकी टीम की अहम भूमिका रही, जिन्होंने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर 48 घंटे के भीतर सच सामने ला दिया। यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि यह बदलती जीवनशैली और बढ़ते मानसिक तनाव का एक डरावना चेहरा भी है। मासूमों के प्रति बढ़ती हिंसा समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
