MP में 2 मार्च से बसें बंद? त्योहार से पहले सफर पर मंडराया संकट

By Ashish Meena
फ़रवरी 23, 2026

होली आने वाली है, रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंड पर टिकटों की पूछताछ बढ़ गई है। लेकिन इसी खुशियों के माहौल के बीच एक खबर ने पूरे मध्यप्रदेश में हलचल मचा दी है। एमपी बस हड़ताल 2026 की चेतावनी ने यात्रियों की धड़कनें तेज कर दी हैं।

बस ऑपरेटरों ने ऐलान किया है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो 2 मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। इसका सीधा असर होली से पहले यात्रा करने वाले लाखों लोगों पर पड़ सकता है। अगर बस सेवा बंद होती है, तो गांव जाने वाले मजदूर, छात्र और नौकरीपेशा लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ सकती है।

टैक्स वृद्धि बना बड़ा मुद्दा

एमपी बस हड़ताल 2026 का सबसे बड़ा कारण टैक्स में बढ़ोतरी बताया जा रहा है। बस ऑपरेटरों का कहना है कि पहले जो टैक्स 12 प्रतिशत था, उसे बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। उनका आरोप है कि यह बढ़ोतरी अचानक की गई और इससे परिवहन व्यवसाय पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ा है।

बस मालिकों का कहना है कि डीजल की कीमतें पहले से ही ऊंची हैं। इसके अलावा मेंटेनेंस खर्च, फिटनेस सर्टिफिकेट, परमिट फीस और अन्य प्रशासनिक शुल्क लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में टैक्स बढ़ने से उनकी आमदनी और कम हो गई है। कई छोटे और मध्यम बस ऑपरेटरों का दावा है कि वे पहले ही घाटे में काम कर रहे हैं।

यूनियन के अनुसार, अगर सरकार ने टैक्स में राहत नहीं दी, तो कई छोटे बस संचालकों को अपना व्यवसाय बंद करना पड़ सकता है। इससे प्रदेश में निजी बस सेवाओं की संख्या कम हो सकती है और यात्रियों को लंबे समय तक परेशानी उठानी पड़ सकती है।

मोटर व्हीकल एक्ट संशोधन पर बस यूनियन की नाराजगी

एमपी बस हड़ताल 2026 की एक और बड़ी वजह मोटर व्हीकल एक्ट में हालिया संशोधन है। बस ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष पांडेय ने बताया कि 24 दिसंबर 2025 से लागू नए नियमों में सख्ती बढ़ाई गई है। यूनियन का कहना है कि नए नियमों में जुर्माना और लाइसेंस संबंधी प्रावधान काफी कड़े कर दिए गए हैं। छोटे बस ऑपरेटरों को डर है कि मामूली गलती पर भी भारी जुर्माना लग सकता है। उनका आरोप है कि बिना व्यापक चर्चा और संवाद के ये बदलाव लागू किए गए। बस संचालकों की मांग है कि सरकार इन संशोधनों पर पुनर्विचार करे या कुछ धाराओं में राहत दे। उनका कहना है कि नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन नियम इतने सख्त न हों कि व्यवसाय चलाना ही मुश्किल हो जाए।

55 जिलों के प्रतिनिधियों ने लिया बड़ा फैसला

सागर के बंडा रोड स्थित एक निजी गार्डन में आयोजित प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में 55 जिलों से आए बस यूनियन के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में लंबी चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया कि 23 फरवरी से मुख्यमंत्री और परिवहन आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे।

अगर सात दिन के भीतर सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं होती, तो 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। इस घोषणा के बाद पूरे प्रदेश में एमपी बस हड़ताल 2026 को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यूनियन ने साफ कहा है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा। यानी होली से पहले प्रदेश में बस सेवाएं ठप होने की आशंका बढ़ गई है।

सरकार के सामने चुनौती

सरकार के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है। एक ओर बस ऑपरेटर टैक्स में राहत और नियमों में बदलाव की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर लाखों यात्रियों की सुविधा भी जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते बातचीत से समाधान निकाल लिया जाए, तो हड़ताल टल सकती है। लेकिन अगर बातचीत विफल रहती है, तो होली से पहले परिवहन व्यवस्था चरमरा सकती है। एमपी बस हड़ताल 2026 सिर्फ बस मालिकों और सरकार के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ने वाला है।

 

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।