मोहन कैबिनेट में क्या-क्या हुआ तय? 33,240 करोड़ की मंजूरी के साथ किसानों को मिला बड़ा तोहफा

By Ashish Meena
मार्च 11, 2026

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 10 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए। इस बैठक में सरकार ने सात प्रमुख विभागों की योजनाओं को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने के लिए 33,240 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी। इसके साथ ही किसानों, युवाओं, उद्योगों और ग्रामीण विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की गईं।

कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों का असर प्रदेश के लाखों लोगों पर पड़ेगा। सरकार ने किसानों के लिए गेहूं और उड़द पर बोनस देने का फैसला किया, वहीं युवाओं के लिए “मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड-गवर्नेस” कार्यक्रम को मंजूरी दी गई। इसके अलावा स्वास्थ्य, उद्योग, जनजातीय विकास और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी कई योजनाओं को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

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मध्य प्रदेश कैबिनेट ने 33,240 करोड़ रुपये के बजट को दी मंजूरी

कैबिनेट बैठक का सबसे बड़ा फैसला विभिन्न विभागों की योजनाओं के लिए 33,240 करोड़ रुपये की मंजूरी देना रहा। यह राशि वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक विभिन्न योजनाओं के संचालन के लिए खर्च की जाएगी।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को योजनाओं के संचालन के लिए 7,127 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी गई है। वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए 3,773 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।

एमएसएमई विभाग को उद्योगों और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए 11,361 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसके अलावा जनजातीय कार्य विभाग के लिए 1,645 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

खनिज साधन विभाग के लिए 6,090 करोड़ रुपये से अधिक का बजट तय किया गया है, जबकि योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के लिए 2,064 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।

 

किसानों के लिए बड़ा फैसला: गेहूं और उड़द पर बोनस

कैबिनेट बैठक में किसानों के लिए भी अहम घोषणा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदने पर 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देगी।

इसके अलावा दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उड़द की खरीद पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का भी फैसला किया गया है। इस फैसले के साथ मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जिसने उड़द खरीद पर बोनस देने की घोषणा की है। सरकार का मानना है कि इस कदम से किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी और दलहन उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

युवाओं के लिए “मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स” कार्यक्रम

कैबिनेट ने युवाओं के लिए “मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम” को भी मंजूरी दी है। इस कार्यक्रम के लिए लगभग 190 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। यह कार्यक्रम अगले तीन वर्षों तक लागू रहेगा। इसके माध्यम से युवाओं को प्रशासनिक कार्यों में शामिल किया जाएगा और उन्हें शासन की कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे युवाओं को नई दिशा मिलेगी और प्रशासनिक व्यवस्था में नई सोच आएगी।

7 जिलों के लिए “एक जिला-एक उत्पाद” योजना

कैबिनेट बैठक में “एक जिला-एक उत्पाद” परियोजना को भी मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत सात जिलों के पारंपरिक उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा।
इन जिलों में सीधी, दतिया, अशोकनगर, भोपाल, धार, सीहोर और उज्जैन शामिल हैं। इन जिलों के विशेष उत्पादों के संरक्षण, विकास और विपणन के लिए अगले पांच वर्षों में 37.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

इस योजना के तहत कारीगरों और शिल्पकारों को प्रशिक्षण, ब्रांडिंग, डिजिटलीकरण और बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार

कैबिनेट ने स्वास्थ्य क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। सरकार ने मैहर, कैमोर और निमरानी में तीन नए कर्मचारी राज्य बीमा औषधालय खोलने की मंजूरी दी है।
इन औषधालयों के संचालन के लिए डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ के कुल 51 पदों का सृजन किया जाएगा। इससे करीब 15,686 पंजीकृत श्रमिकों और उनके 62,744 परिवारजनों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा। इसके अलावा सिंगरौली जिले के चितरंगी में कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश सहित सात नए पदों की भी स्वीकृति दी गई है।

चीतों के लिए तीसरा घर बनेगा नौरादेही

कैबिनेट बैठक में वन्यजीव संरक्षण से जुड़ा भी एक अहम फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि रानी दुर्गावती अभयारण्य यानी नौरादेही को चीतों का तीसरा घर बनाया जाएगा।

मध्य प्रदेश सरकार अगले कुछ महीनों में यहां चीतों को छोड़ने की तैयारी कर रही है। इससे राज्य में चीतों के तीन सुरक्षित आवास बन जाएंगे। इसके साथ ही सरकार मगर, घड़ियाल और कछुओं को भी विभिन्न जल क्षेत्रों में छोड़ने की योजना बना रही है, ताकि जैव विविधता को बढ़ावा मिल सके।

पचमढ़ी बनेगा पर्यावरण मॉडल

कैबिनेट बैठक में पर्यटन और पर्यावरण से जुड़ी पहल पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि पचमढ़ी को जर्मनी की एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने “ग्रीन डेस्टिनेशन” के रूप में प्रमाणित किया है। यह मध्य प्रदेश में पर्यटन विकास के प्रयासों का परिणाम है। सरकार अब पचमढ़ी को देश का एक आदर्श पर्यावरण मॉडल बनाने की दिशा में काम करेगी।

 

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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