MP: पिता ने 10 साल की बेटी से किया दुष्कर्म, फिर थाने में फंदे पर झूला, पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
By Ashish Meena
फ़रवरी 27, 2026
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले का मुलताई थाना क्षेत्र सोमवार को उस समय सुर्खियों में आ गया, जब बेटी से दुष्कर्म के आरोपी एक पिता ने पुलिस लॉकअप में ही फांसी लगाने की कोशिश कर दी। यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि पुलिस हिरासत की व्यवस्था और संवेदनशीलता पर भी बड़ा सवाल बनकर सामने आई है।
बताया जा रहा है कि आरोपी को अपनी ही नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार कर थाने लाया गया था। लेकिन कुछ ही देर बाद उसने लॉकअप में चादर फाड़कर फंदा बनाया और गेट से लटक गया। पुलिस को जैसे ही जानकारी मिली, अफरा-तफरी मच गई। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां अब उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
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क्या है पूरा मामला?
बैतूल के मुलताई थाना क्षेत्र में रहने वाला एक व्यक्ति लंबे समय से अपनी ही बेटी के साथ गलत काम कर रहा था। परिवार के भीतर चल रही इस भयावह घटना का खुलासा तब हुआ, जब पीड़िता की मां को शक हुआ और उसने दरवाजा खुलवाने की कोशिश की।
घटना वाले दिन आरोपी पुराने मकान में बेटी के साथ था। अंदर से आवाजें आ रही थीं। मां ने दरवाजा खोलने को कहा, लेकिन आरोपी ने गेट नहीं खोला। इसके बाद मां ने तुरंत डायल-112 पर कॉल किया। पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने उसके खिलाफ पोक्सो एक्ट और दुष्कर्म की धाराओं में मामला दर्ज किया। लेकिन थाने लाए जाने के कुछ ही समय बाद उसने लॉकअप में आत्महत्या की कोशिश कर दी।
लॉकअप में फांसी लगाने की कोशिश कैसे हुई?
यह सवाल अब पूरे बैतूल जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, आरोपी को लॉकअप में रखा गया था। वहीं उसे एक चादर दी गई थी। उसी चादर को उसने फाड़कर फंदा बनाया और गेट से लटक गया। कुछ समय बाद पुलिसकर्मियों की नजर उस पर पड़ी। तुरंत उसे नीचे उतारा गया और मुलताई अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक इलाज के बाद हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। फिलहाल आरोपी ICU में भर्ती है और जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। इस मुलताई लॉकअप सुसाइड प्रयास ने पुलिस की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आमतौर पर ऐसे संवेदनशील मामलों में आरोपियों पर खास निगरानी रखी जाती है।
बेटी से दुष्कर्म का आरोप
बेटी से दुष्कर्म का यह मामला पूरे इलाके को झकझोर देने वाला है। एक पिता, जो अपने बच्चों का रक्षक होता है, उसी पर गंभीर आरोप लगना समाज के लिए चिंताजनक संकेत है। बताया जा रहा है कि आरोपी लंबे समय से अपनी ही बेटी के साथ गलत हरकतें कर रहा था। बच्ची डर के कारण चुप थी। मां को जब सच्चाई का अंदेशा हुआ, तब उसने हिम्मत दिखाकर पुलिस को बुलाया। इस तरह के मामलों में पीड़िता पर मानसिक और भावनात्मक असर गहरा होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बच्चों को काउंसलिंग और कानूनी सहायता की जरूरत होती है, ताकि वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।
पुलिस हिरासत में आत्महत्या की कोशिश
बैतूल मुलताई लॉकअप सुसाइड प्रयास के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर आरोपी फंदा लगाने में कैसे सफल हो गया? पुलिस हिरासत में बंद किसी भी आरोपी पर लगातार नजर रखी जाती है। खासकर जब मामला दुष्कर्म और पोक्सो एक्ट से जुड़ा हो, तो आरोपी की मानसिक स्थिति पर भी ध्यान दिया जाता है।
इस घटना के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। यह भी देखा जा रहा है कि क्या लॉकअप में सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं।कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि पुलिस की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।
क्या कहता है कानून?
भारत में पुलिस हिरासत में आत्महत्या या आत्महत्या का प्रयास गंभीर मामला माना जाता है। पुलिस को यह सुनिश्चित करना होता है कि हिरासत में बंद व्यक्ति की सुरक्षा पूरी तरह से बनी रहे। पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों में आरोपी को सख्त धाराओं का सामना करना पड़ता है। यदि आरोपी ठीक हो जाता है, तो उसके खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। इस मुलताई लॉकअप सुसाइड प्रयास ने कानूनी प्रक्रिया को और जटिल बना दिया है, क्योंकि अब आरोपी की चिकित्सकीय स्थिति भी जांच और ट्रायल को प्रभावित कर सकती है।
