किसानों के आगे फिर झुकी मध्यप्रदेश सरकार, मुआवजा बढ़ाने का दिया आश्वासन

By Ashish Meena
फ़रवरी 26, 2026

पिछले डेढ़ साल से चल रहा विरोध आखिरकार रंग लाया। उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को लेकर नाराज किसान जब उज्जैन कूच की तैयारी में थे, तभी भोपाल में हुई एक अहम बैठक ने पूरा घटनाक्रम बदल दिया। करीब एक हजार किसान 150 से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ कलेक्ट्रेट घेरने निकलने वाले थे। राशन और बिस्तर तक बांध लिए गए थे। लेकिन मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद तस्वीर बदल गई।

मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों की प्रमुख मांग मान ली। प्रस्तावित एलिवेटेड यानी ऊंची सड़क को अब जमीनी स्तर पर बनाने का फैसला किया गया है। साथ ही मुआवजा बढ़ाने का भी आश्वासन दिया गया है। इसके बाद किसानों ने अपना आंदोलन फिलहाल टाल दिया। यह दूसरा मौका है जब किसानों के दबाव के बाद सरकार को फैसला बदलना पड़ा है।

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उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर पर क्यों था विवाद?

उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन सिटी के बड़े विजन का हिस्सा बताया गया है। सरकार का कहना है कि यह फोर-लेन सड़क भविष्य की जरूरत है और इससे ट्रैफिक जाम और हादसों में कमी आएगी। खासकर जानापाव रूट पर ट्रांसपोर्टेशन को मजबूत करने के लिए इसे जरूरी माना गया।

लेकिन किसानों की आपत्ति सड़क की ऊंचाई और मुआवजे को लेकर थी। प्रस्ताव था कि सड़क 15 से 20 फीट ऊंचाई पर एलिवेटेड बनेगी। इससे गांवों की आपसी कनेक्टिविटी टूटने का खतरा था। खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता और सिंचाई व्यवस्था पर भी असर पड़ता।

किसानों का कहना था कि अगर सड़क जमीनी स्तर पर बने और बाजार दर पर मुआवजा मिले, तो उन्हें आपत्ति नहीं है। इसी मांग को लेकर वे लगातार विरोध कर रहे थे। उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को लेकर यही मुख्य विवाद था।

सीएम मोहन यादव का ऐलान: एलिवेटेड नहीं, जमीन पर बनेगी सड़क

भोपाल में किसानों के प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ा फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि किसानों के सुझाव के अनुसार ग्रीनफील्ड फोर-लेन प्रोजेक्ट अब जमीनी स्तर पर बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिन किसानों की जमीन प्रभावित होगी, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाएगा। सरकार किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है। इस घोषणा के बाद किसान नेताओं ने मुख्यमंत्री का आभार जताया।

उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की ऊंचाई कम करने का यह फैसला किसानों के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है। इससे गांवों की कनेक्टिविटी बनी रहेगी और खेती-किसानी पर कम असर पड़ेगा।

मुआवजा बढ़ाने का भरोसा, क्या मिलेगा बाजार रेट?

किसानों की दूसरी बड़ी मांग मुआवजे को लेकर थी। उनका कहना था कि जमीन अधिग्रहण में बाजार मूल्य से कम कीमत दी जा रही है। इस कारण कई किसान आर्थिक नुकसान में जा रहे थे।

कलेक्टर और प्रशासन ने भरोसा दिया है कि प्रभावित किसानों को बेहतर मुआवजा दिया जाएगा। जावरा-उज्जैन ग्रीनफील्ड रोड से प्रभावित किसानों को भी उज्जैन-इंदौर रोड के किसानों के बराबर मुआवजा देने की बात कही गई है।

हालांकि अभी अंतिम दरें घोषित नहीं हुई हैं, लेकिन मुआवजा बढ़ाने के आश्वासन से किसानों में राहत की भावना है। उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के तहत उज्जैन के 7 और इंदौर के 21 गांव प्रभावित हैं। वहीं उज्जैन-जावरा कॉरिडोर में उज्जैन के 53 और रतलाम के 9 गांव शामिल हैं।

डेढ़ साल से चल रहा था आंदोलन

किसानों का कहना है कि वे पिछले डेढ़ साल से विरोध कर रहे थे। कई बार ज्ञापन दिए गए, बैठकें हुईं, लेकिन समाधान नहीं निकला। जब प्रशासन ने एलिवेटेड रोड का प्लान आगे बढ़ाया, तो नाराजगी और बढ़ गई।

बुधवार को अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने की तैयारी थी। अगर आंदोलन शुरू हो जाता, तो हालात बिगड़ सकते थे। लेकिन मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से मामला फिलहाल शांत हो गया है।

यह दूसरी बार है जब किसानों के दबाव के कारण सरकार को फैसला बदलना पड़ा। इससे पहले उज्जैन सिंहस्थ क्षेत्र में लैंड पूलिंग एक्ट को लेकर भी सरकार को अपना निर्णय वापस लेना पड़ा था।

 

 

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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