MP कर्मचारियों की सैलरी कटौती केस में नया मोड़, 1 लाख कर्मचारियों का एरियर अटक सकता है
By Ashish Meena
मार्च 5, 2026
मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों से जुड़ा एक बड़ा मामला फिर चर्चा में आ गया है। करीब 1 लाख कर्मचारियों को वेतन और एरियर मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अब इस पर अनिश्चितता बढ़ती नजर आ रही है। कारण यह है कि वेतन कटौती मामले में राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रही है।
दरअसल, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पहले ही एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा था कि जिन कर्मचारियों की प्रोबेशन पीरियड के दौरान सैलरी कम की गई थी, उन्हें पूरा वेतन और एरियर दिया जाना चाहिए। लेकिन अब राज्य सरकार इस फैसले को चुनौती देने की तैयारी में है। अगर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचता है तो कर्मचारियों को मिलने वाला लगभग 400 करोड़ रुपये का एरियर फिलहाल रुक सकता है।
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प्रोबेशन पीरियड में सैलरी कटौती का पूरा मामला
मध्य प्रदेश में सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया पहले अलग तरीके से चलती थी। साल 2018 से पहले कर्मचारी चयन मंडल के जरिए तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती होने वाले कर्मचारियों के लिए दो साल का प्रोबेशन पीरियड तय था। इस दौरान कर्मचारियों को नियुक्ति के पहले दिन से ही पूरा वेतन मिलना शुरू हो जाता था।
लेकिन साल 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने इस नियम में बड़ा बदलाव किया। सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी कर प्रोबेशन पीरियड को दो साल से बढ़ाकर चार साल कर दिया। इसके साथ ही सैलरी देने का तरीका भी बदल दिया गया।
नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को चार साल तक पूरी सैलरी नहीं बल्कि स्टाइपेंड दिया जाने लगा। पहले साल कर्मचारियों को मूल वेतन का 70 प्रतिशत दिया जाता था। दूसरे साल यह बढ़ाकर 80 प्रतिशत किया गया। तीसरे साल कर्मचारियों को 90 प्रतिशत वेतन मिलता था और चौथे साल जाकर उन्हें पूरा वेतन मिलने का प्रावधान रखा गया। इसके अलावा यह भी तय किया गया कि जब तक कर्मचारियों का चार साल का प्रोबेशन पीरियड पूरा नहीं होगा, तब तक उन्हें वरिष्ठ कर्मचारियों की श्रेणी में नहीं माना जाएगा।
एमपी हाईकोर्ट ने दिया कर्मचारियों के पक्ष में फैसला
इस नियम के खिलाफ कई कर्मचारी संगठनों ने आवाज उठाई। उनका कहना था कि जब कर्मचारियों से पूरा काम लिया जा रहा है तो उन्हें पूरा वेतन क्यों नहीं दिया जा रहा। इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने मांग की कि प्रोबेशन पीरियड को फिर से दो साल किया जाए और कर्मचारियों को पूरा वेतन दिया जाए।
मामले की सुनवाई करते हुए एमपी हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस दीपक खोत की बेंच ने कहा कि सरकार का यह फैसला कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि जब कर्मचारियों से पूरा काम लिया जा रहा है तो उन्हें कम वेतन देना उचित नहीं है। इसे समानता के अधिकार का उल्लंघन माना गया।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन कर्मचारियों की सैलरी कम दी गई है, उन्हें पूरा वेतन और एरियर दिया जाए।
अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में राज्य सरकार
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब मध्य प्रदेश सरकार इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है। सरकार का कहना है कि एमपीपीएससी और कर्मचारी चयन मंडल की भर्ती प्रक्रिया में अंतर है।
सरकार के मुताबिक एमपीपीएससी के जरिए होने वाली भर्तियों में प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू जैसी कई प्रक्रियाएं होती हैं। जबकि कर्मचारी चयन मंडल के जरिए होने वाली भर्तियों में केवल एक परीक्षा होती है। सरकार का तर्क है कि दोनों भर्ती प्रक्रियाएं अलग हैं, इसलिए नियम भी अलग हो सकते हैं। इसी आधार पर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखने की तैयारी कर रही है।
400 करोड़ रुपये के एरियर पर लग सकता है ब्रेक
अगर यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचता है तो इसका सीधा असर कर्मचारियों के एरियर पर पड़ सकता है। हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार लगभग 1 लाख कर्मचारियों को करीब 400 करोड़ रुपये का एरियर मिलना था। लेकिन अगर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाती है तो यह भुगतान फिलहाल रुक सकता है। क्योंकि अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर निर्भर करेगा। ऐसे में जिन कर्मचारियों को एरियर मिलने की उम्मीद थी, उन्हें अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।
कर्मचारी संगठनों की क्या है प्रतिक्रिया
इस मामले को लेकर कर्मचारी संगठनों में भी चर्चा तेज हो गई है। कई संगठनों का कहना है कि कर्मचारियों के साथ न्याय होना चाहिए। उनका तर्क है कि जब कर्मचारी चार साल तक पूरी जिम्मेदारी के साथ काम कर रहे हैं तो उन्हें पूरा वेतन मिलना चाहिए। कर्मचारी संगठनों का यह भी कहना है कि हाईकोर्ट का फैसला कर्मचारियों के हित में है और सरकार को इसे लागू करना चाहिए।
इस फैसले का कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा
अगर सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबा चलता है तो कर्मचारियों को एरियर मिलने में देरी हो सकती है। इससे कई कर्मचारियों की आर्थिक योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। कई कर्मचारी लंबे समय से अपने एरियर का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में इस मामले का अंतिम फैसला उनके लिए काफी अहम माना जा रहा है।
