MP का ऐसा हाईवे, जिसे देख देश के कई राज्य करने लगे कॉपी!
By Ashish Meena
मार्च 5, 2026
मध्य प्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर किया गया एक नया प्रयोग अब पूरे देश में मिसाल बन गया है। जबलपुर और डिंडौरी के बीच बने हाईवे पर लागू की गई ‘टेबल टॉप मार्किंग’ तकनीक ने सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर नई उम्मीद जगाई है। इस अनोखे प्रोजेक्ट की चर्चा अब देशभर में हो रही है और कई राज्य इसे अपने यहां लागू करने की योजना बना रहे हैं।
दरअसल, जबलपुर-डिंडौरी मार्ग के एक संवेदनशील जंगल क्षेत्र में यह प्रयोग किया गया था। यहां सड़क की सतह पर खास लाल रंग की मोटी परत बनाई गई है, जिससे वाहन चालक को तुरंत झटका महसूस होता है और वह अपनी गति नियंत्रित कर लेता है। यही वजह है कि मध्य प्रदेश का यह ‘टेबल टॉप मार्किंग’ हाईवे अब देश के लिए एक रोल मॉडल बन गया है।
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टेबल टॉप मार्किंग तकनीक क्या है और कैसे करती है काम
मध्य प्रदेश में लागू की गई टेबल टॉप मार्किंग तकनीक सड़क सुरक्षा के लिहाज से एक अनोखा प्रयोग है। इस तकनीक के तहत सड़क के एक खास हिस्से पर लगभग 5 मिलीमीटर मोटी लाल रंग की परत बनाई जाती है। यह लाल परत सड़क के उस हिस्से पर लगाई जाती है जहां हादसों की संभावना ज्यादा होती है। जैसे जंगल वाले इलाके, तीखे मोड़ या ऐसे स्थान जहां अचानक खतरा पैदा हो सकता है।
जब कोई वाहन इस लाल परत वाले हिस्से से गुजरता है तो चालक को हल्का झटका महसूस होता है। यह झटका वाहन चालक को संकेत देता है कि वह एक संवेदनशील क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है और उसे अपनी गति कम करनी चाहिए।
लाल रंग का इस्तेमाल इसलिए किया गया क्योंकि यह खतरे का संकेत माना जाता है। जैसे ही वाहन चालक सड़क पर लाल रंग देखता है, वह खुद ही सतर्क हो जाता है और गाड़ी की रफ्तार धीमी कर देता है। इस तकनीक का उद्देश्य सड़क पर गति नियंत्रण बढ़ाना और दुर्घटनाओं को कम करना है।
जबलपुर-डिंडौरी हाईवे पर क्यों किया गया यह प्रयोग
मध्य प्रदेश के जबलपुर और डिंडौरी के बीच बना हाईवे घने जंगलों से होकर गुजरता है। इस इलाके में नौरादेही अभयारण्य के आसपास का क्षेत्र काफी संवेदनशील माना जाता है।
पहले यहां अक्सर सड़क हादसे होते थे। कई बार तेज रफ्तार वाहनों से जंगली जानवर टकरा जाते थे। इससे न केवल लोगों की जान को खतरा रहता था बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा भी प्रभावित होती थी।
इसी समस्या को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई ने इस इलाके में नई तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला किया। लगभग 12 किलोमीटर लंबे जंगल क्षेत्र में करीब 2 किलोमीटर के अत्यधिक संवेदनशील हिस्से पर टेबल टॉप मार्किंग तकनीक लागू की गई। इस तकनीक का मकसद यह था कि वाहन चालक यहां पहुंचते ही सतर्क हो जाएं और अपनी गति नियंत्रित कर लें।
122 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ प्रोजेक्ट
जबलपुर-डिंडौरी हाईवे का यह प्रोजेक्ट सड़क सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस परियोजना को बनाने में करीब 122 करोड़ रुपये की लागत आई है। इस प्रोजेक्ट पर काम साल 2021 में शुरू हुआ था और अक्टूबर 2025 में यह पूरी तरह तैयार हो गया।
इस हाईवे के निर्माण के दौरान केवल सड़क बनाने पर ही ध्यान नहीं दिया गया बल्कि सड़क सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई। सड़क के दोनों किनारों पर खास पैवर शोल्डर लाइन बनाई गई है। यह लाइन भी ड्राइवर को सतर्क करने का काम करती है। अगर वाहन चालक को नींद आने लगे और गाड़ी किनारे की तरफ जाने लगे तो इस लाइन से टकराकर झटका महसूस होता है और चालक तुरंत सतर्क हो जाता है।
देशभर में चर्चा का विषय बना MP का यह प्रोजेक्ट
मध्य प्रदेश का यह टेबल टॉप मार्किंग प्रोजेक्ट देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में इसे एक नया और प्रभावी प्रयोग माना जा रहा है।
सोशल मीडिया पर भी इस हाईवे के कई वीडियो और तस्वीरें वायरल हुई थीं। कई लोग इस सड़क से गुजरते समय वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे थे। इन वीडियो के जरिए यह प्रोजेक्ट तेजी से लोगों के बीच लोकप्रिय हो गया। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी इस प्रोजेक्ट की तारीफ की थी। उन्होंने इसे देश का पहला ‘वाइल्ड लाइफ सेफ’ हाईवे बताया था।
कई राज्यों ने दिखाई इस तकनीक में रुचि
मध्य प्रदेश का यह प्रोजेक्ट अब दूसरे राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन गया है। तमिलनाडु, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्यों ने इस तकनीक को अपने यहां लागू करने की इच्छा जताई है। इन राज्यों का मानना है कि टेबल टॉप मार्किंग तकनीक सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में काफी मददगार साबित हो सकती है।
खासकर ऐसे इलाकों में जहां जंगल या संवेदनशील क्षेत्र होते हैं, वहां यह तकनीक बहुत उपयोगी साबित हो सकती है। अगर दूसरे राज्यों में भी यह तकनीक लागू होती है तो सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
सड़क सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण की नई दिशा
टेबल टॉप मार्किंग तकनीक केवल सड़क दुर्घटनाओं को कम करने तक सीमित नहीं है। इसका एक बड़ा उद्देश्य वन्यजीवों की सुरक्षा भी है। जंगल वाले इलाकों में अक्सर जंगली जानवर सड़क पार करते समय वाहनों की चपेट में आ जाते हैं। अगर वाहन चालक पहले से ही सतर्क हो जाएं और गाड़ी की गति कम कर दें तो ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसी सोच के साथ मध्य प्रदेश में इस तकनीक को लागू किया गया था और अब इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं।
