MP विधानसभा में नई नियुक्ति की तैयारी, ये सीनियर विधायक दावेदार, कैबिनेट मंत्री का रहेगा दर्जा

By Ashish Meena
फ़रवरी 9, 2026

मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी 2026 से शुरू होने जा रहा है। इस सत्र से पहले प्रदेश की सियासत में एक महत्वपूर्ण नियुक्ति को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच ‘मुख्य सचेतक’ (Chief Whip) के पद को लेकर मंथन शुरू हो चुका है। यह नियुक्ति न केवल सदन के अनुशासन के लिए जरूरी है, बल्कि इसके जरिए बीजेपी कई क्षेत्रीय और राजनीतिक समीकरणों को साधने की कोशिश में है।

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क्यों अहम है मुख्य सचेतक का पद?

विधानसभा में मुख्य सचेतक का पद केवल एक पदवी नहीं, बल्कि अनुशासन का डंडा होता है। खास बात यह है कि इस पद पर नियुक्त विधायक को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है।

व्हिप जारी करना: महत्वपूर्ण मतदान या चर्चा के दौरान पार्टी लाइन तय करना और विधायकों की उपस्थिति सुनिश्चित करना इनकी मुख्य जिम्मेदारी होती है।

संसदीय कार्य में मदद: वर्तमान में संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ही यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, नई नियुक्ति से उनका कार्यभार कम होगा और सदन का संचालन अधिक प्रभावी होगा।

रेस में ये 4 बड़े नाम

सूत्रों की मानें तो मुख्य सचेतक की दौड़ में उन वरिष्ठ विधायकों के नाम सबसे आगे हैं, जिन्हें मोहन मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाई थी। फिलहाल तीन नाम चर्चा के केंद्र में हैं।

गोपाल भार्गव (रहली): सदन के सबसे अनुभवी विधायक और पूर्व मंत्री। संसदीय नियमों के प्रकांड विद्वान माने जाते हैं।

सीताशरण शर्मा (नर्मदापुरम): पूर्व विधानसभा अध्यक्ष। इनका लंबा अनुभव सदन की गरिमा और संचालन में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

अजय विश्नोई (पाटन): प्रखर वक्ता और पूर्व मंत्री। वे अक्सर अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं, उन्हें यह जिम्मेदारी देकर पार्टी असंतोष को भी थाम सकती है।

सीएम और प्रदेश अध्यक्ष लेंगे आखिरी फैसला

ये चारों ही नेता बीजेपी के कद्दावर नेता हैं, लेकिन इन्हें डॉ. मोहन यादव के मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी। अब पार्टी इनमें से किसी एक को मुख्य सचेतक की बड़ी जिम्मेदारी सौंपकर उन्हें सरकार में एक महत्वपूर्ण भूमिका देने की योजना बना रही है।

इस नियुक्ति पर अंतिम मुहर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और बीजेपी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच विचार-विमर्श के बाद ही लगेगी।

सदन में दलीय स्थिति और बजट सत्र का शेड्यूल

मध्य प्रदेश विधानसभा का आगामी सत्र काफी हंगामेदार रहने की उम्मीद है। 18 फरवरी को वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा राज्य का पूर्ण बजट पेश करेंगे। वर्तमान में सदन की स्थिति कुछ इस प्रकार है।

बीजेपी (BJP): 165 विधायक
कांग्रेस (Congress): 65 विधायक
भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP): 01 विधायक

मुख्य सचेतक का कार्य और प्रभाव

मुख्य सचेतक पार्टी आलाकमान और विधायकों के बीच एक सेतु (Bridge) का काम करता है। सदन के भीतर मुख्यमंत्री के प्रमुख सलाहकार के तौर पर यह सुनिश्चित करते हैं कि पार्टी का कोई भी सदस्य दलीय सीमाओं का उल्लंघन न करे। यदि बजट सत्र के दौरान विपक्षी दल सरकार को घेरने की कोशिश करता है, तो मुख्य सचेतक की रणनीति ही सरकार को सुरक्षित बाहर निकालती है।

16 फरवरी से शुरू हो रहे सत्र से पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव इस नियुक्ति के जरिए वरिष्ठों को सम्मान और युवाओं को संदेश देने की कोशिश करेंगे। अब देखना यह है कि दिल्ली दरबार की मुहर के बाद किसके सिर यह ‘ताज’ सजता है।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।