RSS कहेगा तो पद छोड़ दूंगा…75 के बाद पद न रखने की परंपरा पर बोले संघ प्रमुख मोहन भागवत, जानिए और क्या क्या कहा

By Ashish Meena
फ़रवरी 8, 2026

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के चीफ मोहन भागवत ने रविवार को साफ किया कि वह उम्र के इस पड़ाव पर भी संगठन की आज्ञा का पालन करेंगे. संघ के एक शताब्दी कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि 75 साल की उम्र पूरी करने के बाद उन्होंने संघ को अपनी स्थिति के बारे में बताया, लेकिन संघ ने उन्हें कार्य जारी रखने को कहा है.

मोहन भागवत ने जोर देकर कहा, “जब भी आरएसएस मुझसे पद छोड़ने के लिए कहेगा, मैं ऐसा तुरंत करूंगा.” पिछले कई दिनों से संघ के अगले प्रमुख और मोहन भागवत कब तक इस पद बने रहेंगे, इसपर चर्चाएं हो रही थी. मोहन भागवत के इस बयान ने काफी हद तक इन चर्चाओं पर विराम लगा दिया है.

Also Read – भारत के बजट जितना खर्च केवल AI पर, ये कंपनियां बदल देंगी टेक्नोलॉजी की दुनिया, 54 लाख करोड़ के निवेश से कांप उठेगी दुनिया

“75 के बाद पद न रखने की परंपरा, पर संघ ने कहा – काम जारी रखें”

भागवत ने बताया कि संघ प्रमुख के पद के लिए कोई चुनाव नहीं होता, बल्कि क्षेत्रीय और प्रांतीय प्रमुख मिलकर सरसंघचालक की नियुक्ति करते हैं. उन्होंने कहा, “आम तौर पर कहा जाता है कि 75 साल के बाद बिना किसी पद के ही काम करना चाहिए. मैंने 75 साल पूरे कर लिए हैं और आरएसएस को सूचित किया, लेकिन संघ ने मुझे काम जारी रखने को कहा.”

Also Read – Gold-Silver Price Today: सोना-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, चांदी 1.70 लाख सस्ती हुई, सोना भी टूटा, जानें अब कितना है 22 और 24 कैरेट सोने का भाव

उन्होंने हल्के अंदाज़ में यह भी जोड़ा कि संघ अपने स्वयंसेवक से ख़ून का आख़िरी कतरा तक काम लेता है और अब तक संघ के इतिहास में किसी को रिटायर होने की नौबत नहीं आई है.

अंग्रेज़ी कभी नहीं बनेगी संघ की कार्यभाषा, मगर महारत ज़रूरी- RSS चीफ

संघ के कामकाज में भाषा को लेकर साफ रुख़ जाहिर करते हुए भागवत ने कहा कि अंग्रेज़ी कभी भी आरएसएस की कार्यभाषा नहीं बनेगी, क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है. उन्होंने कहा, “हम भारतीयों के साथ काम करना चाहते हैं. जहां अंग्रेज़ी ज़रूरी होती है, हम उसका इस्तेमाल करते हैं. हम इसके विरोधी नहीं हैं.”

उन्होंने आगे कहा कि लोगों को अंग्रेज़ी इतनी अच्छी तरह बोलनी चाहिए कि अंग्रेज़ी भाषी भी सुनने को तैयार हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम अपनी मातृभाषा भूल जाएं. भागवत ने कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा कि संघ का काम संस्कार देने का है, प्रचार का नहीं. उन्होंने माना कि संघ ने स्वयं के प्रचार में पिछड़े रहने की बात कही, साथ ही यह चेतावनी भी दी कि अत्यधिक प्रचार से प्रसिद्धि और फिर अहंकार पैदा होता है, जिससे बचने की ज़रूरत है.

आगे ये भी पढ़ें :
Ashish Meena

Ashish Meena

ashish-meena

आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

»