कर्नाटक में CM की कुर्सी पर घमासान, क्या ढह जाएगा कांग्रेस का सबसे बड़ा किला? माहौल तैयार कर रही बीजेपी
By Ashish Meena
November 28, 2025
Karnataka Congress : देश में कांग्रेस के लिए सबसे महत्वपूर्ण राज्य कर्नाटक में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच जारी आर-पार की जंग अब निर्णायक मोड़ पर आ गई है। सरकार के ढाई साल पूरे होते ही, सत्ता के वर्चस्व की यह लड़ाई कांग्रेस हाईकमान के दिल्ली दरबार तक पहुँच चुकी है। इस सियासी टकराव ने कांग्रेस के एकमात्र प्रभावी किले को ढहाने का खतरा पैदा कर दिया है और राज्य का शासन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला
कर्नाटक में यह राजनीतिक भूचाल तब तेज़ हुआ जब सिद्धारमैया सरकार के ढाई साल पूरे हो गए। सूत्रों के अनुसार, 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की अप्रत्याशित जीत के बाद, मुख्यमंत्री पद को लेकर लंबी खींचतान चली थी। उस समय कथित तौर पर यह ‘ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला’ तय हुआ था:
पहला चरण: सिद्धारमैया पहले ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री रहेंगे।
दूसरा चरण: शेष ढाई साल के लिए डीके शिवकुमार सत्ता संभालेंगे।
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चूंकि सिद्धारमैया का कार्यकाल पूरा हो चुका है, डीके शिवकुमार खेमे के विधायक अब खुलकर उन्हें सीएम बनाने की मांग कर रहे हैं। वहीं, सिद्धारमैया ने अपनी स्थिति मजबूत करते हुए कहा है कि 2023 का जनादेश पाँच साल के लिए था और उनकी ताकत घटी नहीं, बल्कि बढ़ी है।
कांग्रेस दो धड़ों में विभाजित
कर्नाटक कांग्रेस इस समय स्पष्ट रूप से दो गुटों में बंटी हुई है। एक खेमा डीके शिवकुमार के लिए सीएम पद की मांग कर रहा है, तो दूसरा सिद्धारमैया के साथ खड़ा है।
बयानबाजी: दोनों नेता सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं, जिससे पार्टी की छवि और राज्य के शासन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
दिल्ली दौड़: डीके शिवकुमार के समर्थक विधायक और नेता सक्रिय रूप से लॉबिंग कर रहे हैं। वहीं, सिद्धारमैया भी अपनी कुर्सी बचाने के लिए कांग्रेस हाईकमान से मुलाकात करने दिल्ली पहुँचे हैं।
यह सियासी टकराव ऐसे ही जारी रहा तो देश के तीन महत्वपूर्ण राज्यों (कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना) में से कांग्रेस के सबसे बड़े गढ़ को भारी सियासी नुकसान हो सकता है।
बीजेपी ‘वेट एंड वॉच’ के मूड में, कर रही माहौल तैयार
कर्नाटक कांग्रेस की इस आतंरिक कलह पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाई है। बीजेपी नेता इसे कांग्रेस का ‘घर का झगड़ा’ बता रहे हैं और खुद मैदान में कूदने से बच रहे हैं।
बीजेपी की रणनीति: बीजेपी को पता है कि यह मामला जितना लंबा खिंचेगा, उतना ही कांग्रेस विरोधी माहौल बनाने का मौका मिलेगा।
पूर्व केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा है कि कर्नाटक की जनता ने इससे भ्रष्ट सरकार नहीं देखी है और कांग्रेस ‘पावर शेयरिंग के ड्रामे’ में उलझी हुई है।
बीजेपी का दाँव: बीजेपी को लग रहा है कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ की तरह ही कर्नाटक में भी सत्ता-परिवर्तन का दाँव उसे फायदा देगा, जहाँ कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई का सीधा लाभ बीजेपी को 2023 के चुनावों में मिला था।
गेंद अब हाईकमान के पाले में
कर्नाटक के संकट को सुलझाने की ज़िम्मेदारी अब पूरी तरह से कांग्रेस हाईकमान (सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे) के पाले में है।
सीएम सिद्धारमैया के दिल्ली दौरे के बाद, डीके शिवकुमार भी जल्द ही गांधी परिवार से मिलने आ सकते हैं। पार्टी नेतृत्व को यह फैसला करना होगा कि क्या वे ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले को लागू करते हैं, या सिद्धारमैया को पूर्ण कार्यकाल की अनुमति देते हैं। इस राजनीतिक संकट का हल क्या निकलता है और क्या दोनों नेता हाईकमान के फैसले पर रज़ामंद होंगे, इस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।
