अंधविश्वास के खिलाफ उठी आवाज…इस गांव में बाबाओं की एंट्री पर लगा बैन, पंचायत में प्रस्ताव पारित

By Ashish Meena
अप्रैल 7, 2026

महाराष्ट्र के नासिक में सामने आए ढोंगी बाबा अशोक खरात कांड ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है. महिलाओं के यौन शोषण और करोड़ों रुपये की ठगी के इस मामले के बाद अब गांव‑गांव में अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठने लगी है. इसी कड़ी में धुले जिले के निमगुल गांव ने ऐसा फैसला लिया है, जिसकी चर्चा हर ओर हो रही है. यहां गांव की महिलाओं ने एकजुट होकर तय किया है कि अब उनके गांव में किसी भी बाबा की एंट्री नहीं होगी.

अशोक खरात कांड से जागा गांव

नासिक में ढोंगी बाबा अशोक खरात की काली करतूतें सामने आने के बाद लोगों में डर के साथ‑साथ गुस्सा भी है. महिलाओं के साथ छल, शोषण और व्यापारियों से ठगी की खबरों ने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया. निमगुल गांव की महिलाओं ने इस डर को अपनी ताकत बना लिया और ठोस कदम उठाने का फैसला किया.

पंचायत में पास हुआ “नो एंट्री” प्रस्ताव

निमगुल गांव की महिलाओं ने पंचायत में विशेष प्रस्ताव पास कर साफ कहा कि अब किसी भी ढोंगी बाबा को गांव में कदम रखने की इजाजत नहीं दी जाएगी. महिलाओं का कहना है कि आशीर्वाद, तंत्र‑मंत्र और सम्मोहन के नाम पर अब किसी को भी बहू‑बेटियों की इज्जत और परिवार की गाढ़ी कमाई से खेलने नहीं दिया जाएगा.

अंधविश्वास के खिलाफ संगठित लड़ाई

इस मुहिम को मजबूत करने के लिए अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (ANIS) भी गांव के साथ खड़ी हो गई है. समिति के पदाधिकारियों ने गांव की महिलाओं को घर‑घर जाकर जादू‑टोना विरोधी कानून से जुड़ी किताबें बांटीं. इसका मकसद महिलाओं को उनके अधिकारों और कानून की ताकत से अवगत कराना है, ताकि वे किसी भी ढोंगी के बहकावे में न आएं.

समिति के पदाधिकारी दिलीप खिवसरा ने बताया कि अशोक खरात जैसे ढोंगियों ने समाज को नुकसान पहुंचाया है. महिलाओं को अब यह समझाया गया है कि अंधविश्वास या सम्मोहन के नाम पर डरने की जरूरत नहीं है. अगर कोई गलत हरकत करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना ही सही रास्ता है.

गांव में सख्त निगरानी कर रही महिलाएं

निमगुल गांव में अब पहरा पहले से ज्यादा सख्त है. गांव की सीमा में अगर कोई भी तथाकथित बाबा घुसने की कोशिश करता है, तो महिलाएं तुरंत उसकी सूचना देंगी और कानूनी कार्रवाई कराएंगी. गांव की महिलाओं ने साफ कर दिया है कि अब चुप बैठने का समय खत्म हो चुका है. स्थानीय महिला सिंधुबाई मोरे का कहना है कि उन्होंने यह फैसला सोच‑समझकर लिया है. उनके मुताबिक जो बाबा आशीर्वाद के नाम पर घर की शांति और महिलाओं की इज्जत से खेलते हैं, उनके लिए इस गांव के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हैं.

महाराष्ट्र के लिए बना नया मॉडल

निमगुल गांव का यह फैसला अब पूरे महाराष्ट्र में मिसाल बन रहा है. जब महिलाएं संगठित होकर कानून और समाज के साथ खड़ी होती हैं, तो अंधविश्वास और पाखंड की जड़ें अपने‑आप कमजोर पड़ने लगती हैं. अशोक खरात जैसे ढोंगियों के लिए यह साफ संदेश है कि अब समाज जाग चुका है और उनकी दुकान ज्यादा दिन चलने वाली नहीं है.

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।