बारिश-ओले से फसल हो गई बर्बाद? 32 हजार रुपए हेक्टेयर के हिसाब से मिलेगा मुआवजा, जानें सर्वे की पूरी प्रक्रिया
By Ashish Meena
जनवरी 31, 2026
मुआवजा: मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में अचानक आए मौसम के बदलाव ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है. मध्य प्रदेश में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि के कारण कई जिलों में फसलों को नुकसान हुआ है. इसे लेकर राज्य सरकार ने प्रशासन को अलर्ट किया गया है. मध्य प्रदेश में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ की वजह से मौसम बिगड़ा है और 60 प्रतिशत हिस्से में बारिश, ओलावृष्टि और आंधी की वजह से गेहूं, चना और सरसों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है.
इसके बाद सीएम मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं और कहा है कि जिला प्रशासन नुकसान का आकलन करे. उन्होंने कहा कि किसी भी किसान का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा और मुआवजा दिया जाएगा. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि बारिश और ओले जैसी प्राकृतिक आपदा से फसल को होने पर कैसे और कितना मुआवजा मिलता है? इसका प्रोसेस क्या है? सरकार नुकसान की भरपाई की सीमा कैसे तय करती है?
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किसानों को कितना मिलेगा मुआवजा?
मध्य प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि सभी जिलों के कलेक्टरों से 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी गई है और जो भी नुकसान हुआ है, उसका भुगतान किसानों को किया जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने RBC 4 का जिक्र किया और राहत का ब्रेकअप साझा किया.
उन्होंने बताया कि जिन जगहों पर 50 फीसदी से ज्यादाफसल का नुकसान हुआ है, वहां 32 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से राहत राशि दी जाएगी. इसके अलावा अगर नुकसान 50 फीसदी से कम हुआ है तो किसानों को राहत राशि 16 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से दी जाएगी. अगर नुकसान 25 प्रतिशत से 33 प्रतिशत के बीच हुआ है तो किसानों को ₹9,500 प्रति हेक्टेयर राहत राशि दी जाएगी.
आखिर RBC 4 क्या, जिसका जिक्र राजस्व मंत्री ने किया?
एमपी के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने मीडिया से बातचीत के दौरान RBC 4 का जिक्र किया, जिसे तकनीकी रूप से RBC 6-4 कहा जाता है. इसका मतलब राजस्व पुस्तक परिपत्र (Revenue Book Circular) खंड 6, क्रमांक 4 है. आसान भाषा में समझें तो यह सरकार की ‘आपदा राहत नियमावली’ यानी एक सरकारी नियम की किताब की तरह है, जिसके आधार पर यह तय किया जाता है कि प्राकृतिक आपदा आने पर किसे, कब और कितना मुआवजा यानी आर्थिक सहायता दी जाएगी.
नुकसान की भरपाई कैसे तय करती है सरकार?
जब भी किसी प्रकार की प्राकृतिक आपदा आती है या किसानों पर कोई कुदरती कहर टूटता है तो सरकार अपनी मर्जी से पैसा नहीं बांटती, बल्कि उसे एक नियम का पालन करना होता है, जिसके बारे में RBC 6-4 का नियम बताता है. प्राकृतिक आपदा में ओलावृष्टि, बाढ़, सूखा या आंधी-तूफान शामिल है. आरबीसी-4 के तहत ही तय किया जाता है कि नुकसान का आकलन (सर्वे) कैसे होगा? कितने प्रतिशत नुकसान पर कितना पैसा मिलेगा? और पैसा पाने का हकदार कौन है?
ये आर्थिक सहायता बीमा से कैसे अलग?
आरबीसी-4 के तहत सिर्फ फसल नुकसान ही नहीं, अन्य चीजों को भी शामिल किया गया है. अगर आपदा में किसी इंसान की जान चली जाए. अगर गाय, भैंस या बकरियों समेत अन्य पशुओं की मौत हो जाए. बाढ़ में घर या घर का सामान बह जाए, तूफान में मकान गिर जाए. ऐसी स्थिति में भी मुआवजा मिलता है.
अक्सर सरकार की तरफ से मिलने वाली इस राशि को लोग फसल बीमा समझ लेते हैं, लेकिन यह उससे पूरी तरह अलग है. बीमा की राशि बीमा कंपनियों द्वारा दी जाती है और इसके लिए प्रीमियम भरना पड़ता है. लेकिन, आरबीसी-4 के तहत सरकार से मिलने वाली आर्थिक मदद के लिए किसानों को कोई प्रीमियम नहीं देना पड़ता और यह एक तरह से तत्काल सहायता है. यह सरकार का दायित्व होता है कि प्राकृतिक आपदा में होने वाले नुकसान की भरपाई की जाए.
कैसे किया जाता है फसल नुकसान का सर्वे?
मध्यप्रदेश में बारिश और आंधी के साथ हुई ओलावृष्टि ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है और इस वजह से किसानों की चिंता बढ़ गई है. इसके बाद किसानों की मांग है कि जल्द से जल्द सर्वे कराया जाए और फसलों के नुकसान को लेकर मुआवजे का ऐलान किया जाए. इस बीच सरकार भी तुरंत एक्टिव हो गई है और फसलों को हुए नुकसान के आंकलन को लेकर सीएम मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा है कि किसानों को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने प्रशासन को नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं.
अब सवाल उठता है कि आखिर फसलों के नुकसान का सर्वे कैसे होता है. बता दें कि जब भी कोई प्राकृतिक आपदा (ओला, बारिश, बाढ़, तूफान या सूखा) आती है तो जिला कलेक्टर सर्वे के आदेश देते हैं. इसके लिए एक संयुक्त टीम नियुक्त की जाती है, जिसमें आमतौर पर तीन विभागों के लोग शामिल होते हैं. सर्वे टीम में राजस्व विभाग से पटवारी शामिल होते हैं, जिनकी मुख्य भूमिका होती है. इसके अलावा कृषि विभाग से ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी और पंचायत से ग्राम सहायक या सचिव शामिल होते हैं. टीम खेतों में जाकर फसल को देखती है और नुकसान का आकलन करती है.
आकलन के बाद ग्रामीणों की मौजूदगी में एक रिपोर्ट तैयारी की जाती है, जिसमें नुकसान के प्रकार और उसके प्रतिशत का जिक्र होता है. रिपोर्ट में यह जानकारी दी जाती है कि किसानों का कितना नुकसान हुआ है. इसके साथ ही आजकल इसमें तकनीक का भी इस्तेमाल होने लगा है और नुकसान के आकलन के साथ ही खेत की फोटो भी अपलोड करनी पड़ती है. मध्य प्रदेश और कई अन्य राज्यों में ‘सारा ऐप’ (Saara App) या अन्य सरकारी ऐप के जरिए पटवारी खेत पर खड़े होकर जियो-टैग यानी स्थान की जानकारी के साथ फोटो अपलोड करते हैं.
सर्वे के दौरान किसान किन बातों का रखें ध्यान?
सही मुआवजा पाने के लिए किसानों को भी सक्रिय रहना जरूरी है और सर्वे के दौरान किसानों को कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए. इसमें सबसे महत्वपूर्ण है कि जब सर्वे का काम चल रहा हो, तब खेत में खुल मौजूद रहें. यह तय करें कि जब भी सर्वे टीम आए तो आप खुद या आपके परिवार का कोई जानकार व्यक्ति खेत पर मौजूद रहे. इसके साथ ही नुकसान के आकलन के बाद यह सुनिश्चित करें कि पटवारी के रिकॉर्ड में वही फसल दर्ज हो, जो खेत में लगी है. अगर खेत में गेहूं है तो रिकॉर्ड में भी गेहूं दर्ज हो.
रिपोर्ट बनने के बाद यह जरूर चेक करें कि नुकसान का प्रतिशत सही लिखा हो. यानी अगर फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है तो रिपोर्ट में भी 100 प्रतिशत नुकसान लिखा हो. अगर कम नुकसान लिखा होगा तो मुआवजा का पैसा भी उसी आधार पर मिलेगा. रिकॉर्ड में सिंचित (पानी वाली) और असिंचित (बिना पानी वाली) जमीन का रिकॉर्ड ठीक से दर्ज हो, क्योंकि दोनों जमीनों पर मुआवजे की राशि अलग-अलग हो सकती है. सर्वे टीम के आने से पहले ही खराब हुई फसल का वीडियो या फोटो बना लें. कोशिश करें कि फोटो और वीडियो में उस दिन की तारीख और खेत के आसपास का कोई लैंडमार्क भी दिखे.
सर्वे के दौरान किसान के पास कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट भी होने जरूरी हैं, जो पटवारी को दिखाने पड़ सकते हैं. इसमें आधार कार्ड, बैंक पासबुक (IFSC कोड के साथ), भू-अधिकार पुस्तिका (पावती/ऋण पुस्तिका) और खसरा नंबर की जानकारी शामिल है. सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार अब मुआवजे की राशि सीधे किसाने किसान के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी (DBT) के जरिए करती है. इसलिए, पहले ही सुनिश्चित कर लें कि आपका बैंक अकाउंट आधार से लिंक हो.अगर बैंक अकाउंट आधार से लिंक नहीं होगा तो पैसा अटक सकता है.
