शिवराज सिंह चौहान को मिली बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट में खत्म हुई कानूनी जंग! कांग्रेस सांसद ने दर्ज किया था मुकदमा
By Ashish Meena
फ़रवरी 3, 2026
मध्य प्रदेश की राजनीति के दो कद्दावर चेहरों के बीच चल रही लंबी कानूनी लड़ाई का आखिरकार अंत हो गया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कांग्रेस सांसद और देश के दिग्गज वकील विवेक तन्खा ने उनके खिलाफ दर्ज मानहानि के सभी मुकदमे वापस लेने का फैसला किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस आपसी समझौते को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले का निस्तारण (Dispose) कर दिया है, जिससे शिवराज सिंह चौहान को अब अदालती पेशी और कानूनी उलझनों से पूरी तरह मुक्ति मिल गई है।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ था जब विवेक तन्खा ने आरोप लगाया था कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह ने मीडिया में उनके खिलाफ गलत बयानबाजी की है। तन्खा का दावा था कि इन बयानों से उनकी सामाजिक और पेशेवर प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुंचा है। इसी आधार पर उन्होंने तीनों नेताओं के खिलाफ आपराधिक मानहानि (Criminal Defamation) और सिविल सूट दायर किया था।
हाईकोर्ट से मिली थी मायूसी, सुप्रीम कोर्ट ने दिया सहारा
शुरुआत में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने तीनों बीजेपी नेताओं की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने निचली अदालत की पेशी से छूट मांगी थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नरम रुख अपनाते हुए शिवराज सिंह चौहान समेत तीनों नेताओं को व्यक्तिगत पेशी से अंतरिम छूट प्रदान की थी।
समझौते की मेज पर सुलझा विवाद
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान विवेक तन्खा ने अपनी ओर से स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर उनका और शिवराज सिंह चौहान का समझौता (Settlement) हो गया है। तन्खा ने कोर्ट को बताया कि वे अब इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते और मानहानि के मुकदमे वापस ले रहे हैं। कोर्ट ने दोनों पक्षों की सहमति के बाद मामले की सुनवाई औपचारिक रूप से बंद कर दी।
वीडी शर्मा और भूपेंद्र सिंह का क्या होगा?
हालांकि विवेक तन्खा ने शिवराज सिंह चौहान के साथ समझौते की पुष्टि कर दी है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या वीडी शर्मा और भूपेंद्र सिंह के खिलाफ मामले भी इसी तरह खत्म होंगे। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि यह मामला एक ही बयान या घटनाक्रम से जुड़ा था, इसलिए समझौते का लाभ अन्य सह-आरोपियों को भी मिलने की पूरी संभावना है।
विवेक तन्खा और शिवराज सिंह चौहान के बीच का यह समझौता मध्य प्रदेश की राजनीति में एक सकारात्मक संदेश है। इससे न केवल अदालती समय की बचत हुई है, बल्कि दोनों नेताओं के बीच कटुता भी कम होने की उम्मीद है।
