MP के किसानों के लिए खुशखबरी, फसलों को मिलेगा सिंचाई के लिए पानी, बांध का काम हुआ शुरू, इन जिलों को होगा सबसे ज्यादा फायदा
By Ashish Meena
फ़रवरी 4, 2026
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती बुंदेलखंड अंचल के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ आ गया है। देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना, केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट (Ken-Betwa Link Project), के तहत सबसे महत्वपूर्ण ढोड़न बांध (Dhaudhan Dam) का निर्माण कार्य केन नदी पर तेजी से शुरू हो गया है। यह बांध न केवल सूखे बुंदेलखंड की प्यास बुझाएगा, बल्कि क्षेत्र के लाखों किसानों के लिए समृद्धि के द्वार भी खोलेगा।
अगले साल से मिलेगा सिंचाई का पानी
जल शक्ति मंत्रालय की निगरानी में बन रहे इस बांध का लक्ष्य बेहद स्पष्ट है—क्षेत्र में जल संकट को जड़ से खत्म करना। अधिकारियों के अनुसार, निर्माण कार्य जिस गति से चल रहा है, उससे उम्मीद है कि अगले साल से ही किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलना शुरू हो जाएगा।
इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना
छतरपुर जिले में केन नदी पर बन रहा यह बांध अपनी विशालता और क्षमता के कारण चर्चा में है।
ऊंचाई और लंबाई
यह बांध करीब 77 मीटर ऊंचा और 2.03 किलोमीटर लंबा होगा।
जल भराव क्षमता
इसमें 2853 मिलियन घन मीटर से भी अधिक पानी जमा करने की क्षमता होगी।
बहुउद्देशीय परियोजना
यह बांध केवल सिंचाई ही नहीं, बल्कि जलविद्युत (Hydroelectricity) उत्पादन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
Also Read – MP में सनसनीखेज वारदात! रेप की कोशिश के बाद युवती की हत्या, आरोपी की भी हुई मौत
इन 6 जिलों को होगा सीधा फायदा
ढोड़न बांध के निर्माण से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल के निम्नलिखित जिलों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा।
इन जिलों में मिलेगा लाभ
मध्य प्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और उत्तर प्रदेश के झांसी, बांदा, महोबा को सबसे अधिक लाभ मिलेगा।
बुंदेलखंड के लिए क्यों है यह ‘वरदान’?
बुंदेलखंड अंचल अपनी उपजाऊ भूमि के लिए जाना जाता है, लेकिन मानसून की अनिश्चितता और सिंचाई संसाधनों के अभाव में यहाँ की खेती पिछड़ रही थी। केन-बेतवा लिंक परियोजना के माध्यम से केन नदी के अतिरिक्त पानी को बेतवा नदी बेसिन में भेजा जाएगा। ढोड़न बांध इस पूरी प्रक्रिया का ‘पावर हाउस’ है, जहाँ पानी को संचित कर नहरों के माध्यम से खेतों तक पहुँचाया जाएगा।
ढोड़न बांध का निर्माण शुरू होना बुंदेलखंड के सुनहरे भविष्य की नींव है। केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से यह परियोजना न केवल कृषि उत्पादन बढ़ाएगी, बल्कि क्षेत्र में औद्योगिक विकास और पर्यटन के नए अवसर भी पैदा करेगी।
