CM मोहन यादव का बड़ा अल्टीमेटम! गेहूं खरीदी में गड़बड़ी हुई तो कौन होगा बाहर?

By Ashish Meena
मार्च 6, 2026

मध्य प्रदेश में गेहूं उपार्जन का सीजन शुरू होने से पहले ही सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट कहा है कि इस बार गेहूं खरीदी प्रक्रिया में किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए जिला प्रशासन को पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा।

मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में आयोजित राज्य स्तरीय बैठक के बाद सभी जिला कलेक्टरों से वर्चुअल संवाद करते हुए सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गेहूं उपार्जन व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि जो अधिकारी बेहतर प्रदर्शन करेंगे, वही प्रशासनिक जिम्मेदारियों में बने रहेंगे।

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गेहूं उपार्जन प्रक्रिया को लेकर मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गेहूं उपार्जन को लेकर जिला कलेक्टरों को कई अहम निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों के पंजीयन, सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने निर्देश दिए कि पंजीकृत किसानों का सही तरीके से सत्यापन किया जाए और उपार्जन केंद्रों पर सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गेहूं खरीदी के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसानों को समय पर भुगतान मिले। इसके लिए प्रशासन को पहले से ही पूरी तैयारी करनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि उपार्जन केंद्रों पर बारदानों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि किसानों को किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।

प्रदेश में कब से शुरू होगी गेहूं खरीदी

मध्य प्रदेश में इस बार गेहूं उपार्जन दो चरणों में किया जाएगा। इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में गेहूं खरीदी 16 मार्च से शुरू होकर 5 मई तक चलेगी। वहीं जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, शहडोल, चम्बल और सागर संभाग में गेहूं खरीदी 23 मार्च से शुरू होगी और 12 मई तक जारी रहेगी। किसानों के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि 7 मार्च तय की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक किसान समय पर पंजीयन कराएं और बिना किसी परेशानी के अपनी उपज बेच सकें।

उपार्जन केंद्रों पर बेहतर व्यवस्था के निर्देश

मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि सभी उपार्जन केंद्रों का समय पर निर्धारण और स्थापना सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि केंद्रों पर किसानों के लिए बैठने, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था भी होनी चाहिए। इसके अलावा उपार्जन कार्य में लगे कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला उपार्जन समिति नियमित बैठक कर समस्याओं का तुरंत समाधान करे ताकि किसानों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

प्रशासनिक कार्यों में प्रदर्शन को मिलेगी प्राथमिकता

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं और गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारी ही मैदान में बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यह सिद्धांत केवल कलेक्टरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सभी अधिकारी और कर्मचारियों पर लागू होगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय और परिणाम देने वाली हो।

संकल्प से समाधान अभियान की समीक्षा

मुख्यमंत्री ने बैठक में संकल्प से समाधान अभियान की भी समीक्षा की। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत अब तक करीब 40 लाख आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है। अब 16 मार्च तक जिला स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन शिविरों की सघन मॉनिटरिंग की जाए और लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए।

खाड़ी देशों में रह रहे प्रदेशवासियों पर नजर रखने के निर्देश

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने खाड़ी देशों की वर्तमान स्थिति को देखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्देश भी दिया। उन्होंने जिला कलेक्टरों से कहा कि जिन जिलों के विद्यार्थी या नागरिक खाड़ी देशों में रह रहे हैं, उनके परिवारों के साथ संपर्क बनाए रखें। प्रदेशवासियों की सहायता के लिए नई दिल्ली स्थित मध्यप्रदेश भवन और वल्लभ भवन मंत्रालय में कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। कलेक्टरों को निर्देश दिए गए कि जरूरत पड़ने पर तुरंत समन्वय स्थापित किया जाए।

सोशल मीडिया अफवाहों पर सतर्क रहने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अगर शासन या प्रशासन से जुड़ी कोई गलत या भ्रामक जानकारी फैलती है तो उसका तुरंत खंडन किया जाना चाहिए। सोशल मीडिया के दौर में गलत सूचना तेजी से फैलती है, इसलिए प्रशासन को सक्रिय रहना जरूरी है।

परीक्षाओं के दौरान शैक्षणिक संस्थानों पर नजर

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय स्कूल और कॉलेजों में परीक्षाओं का दौर चल रहा है। इसलिए जिला अधिकारी शैक्षणिक संस्थानों, छात्रावासों और विश्वविद्यालय परिसरों का आकस्मिक निरीक्षण करें। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि परीक्षाएं पूरी तरह शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संचालित हों।

कार्यालयीन समय का पालन अनिवार्य

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यालयीन समय का पालन करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने बताया कि हाल ही में मंत्रालय में अचानक निरीक्षण कराया गया था जिसमें कार्यालयीन समय के पालन की स्थिति देखी गई। जिला कलेक्टरों को भी अपने जिलों में इस तरह के निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि समय पालन में सुधार नहीं हुआ तो प्रदेश में छह दिन का कार्य सप्ताह लागू किया जा सकता है।

किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा 2026

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 को प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिलों में आयोजित होने वाले पारंपरिक मेलों में कृषि और पशुपालन क्षेत्र में नवाचार करने वाले किसानों को मंच दिया जाए। इन मेलों में ऐसे किसानों की प्रदर्शनी भी लगाई जाए जिन्होंने कृषि क्षेत्र में विशेष उपलब्धि हासिल की है।

नवाचार और होम-स्टे को भी मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने जिला अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर नवाचार करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके साथ ही उन्होंने जिलों में होम-स्टे को बढ़ावा देने के भी निर्देश दिए। सरकार का उद्देश्य है कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाए।

 

 

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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