खातेगांव के दिव्या नर्सिंग होम का लाइसेंस निरस्त, संचालक दीपक विश्नोई पर FIR दर्ज, BMO को भी पद से हटाया

By Ashish Meena
जुलाई 3, 2026

मालवा जंक्शन, खातेगांव।
देवास जिले के खातेगांव स्थित ‘दिव्या नर्सिंग होम’ पर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी और सख्त कार्रवाई करते हुए अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान योजना में वित्तीय अनियमितताओं और उपचार में भारी लापरवाही की शिकायतों के बाद हुई इस कार्रवाई से पूरे क्षेत्र के निजी चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल के संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, वहीं लापरवाही बरतने के आरोप में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) को भी पद से हटा दिया गया है।

जांच में खुली पोल- मरीजों की जान से खिलवाड़

जिला स्तरीय जांच दल द्वारा किए गए निरीक्षण में नर्सिंग होम के भीतर बदहाली का मंजर सामने आया। अस्पताल में न तो प्रशिक्षित चिकित्सक मौजूद थे और न ही नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता थी। सबसे चिंताजनक बात यह थी कि ऑपरेशन थिएटर की छत से पानी टपक रहा था, जो गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता था।

अस्पताल में आईसीयू की कोई व्यवस्था नहीं थी और मरीजों के उपचार का रिकॉर्ड भी मनमाने तरीके से रखा जा रहा था। अस्पताल के पास न तो फायर एनओसी थी और न ही बिजली विभाग की वैध अनापत्ति प्रमाण पत्र। साथ ही, बायो-मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में बरती गई लापरवाही जनस्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनी हुई थी।

नाम किसी और का, संचालन कोई और कर रहा

जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि अस्पताल का पंजीयन डॉ. यशोवर्धन काग के नाम पर था, जबकि वास्तव में इसका संचालन दीपक विश्नोई द्वारा किया जा रहा था। जांच में पाया गया कि डॉ. काग वर्तमान में भोपाल में पीजी की पढ़ाई कर रहे हैं और लंबे समय से अस्पताल में उपस्थित ही नहीं थे। बिना किसी अधिकृत डॉक्टर के अस्पताल का संचालन करना सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ है।

सरकारी योजना में लूट का खेल

मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान योजना के तहत लाभ लेने वाले 20 मरीजों के बयानों और रिकॉर्ड की जांच में बड़ी धोखाधड़ी सामने आई है। आरोप है कि अस्पताल ने योजना के बिलों में डॉक्टर की भारी-भरकम फीस दर्शाई, जबकि हकीकत में उस राशि का भुगतान संबंधित डॉक्टरों को किया ही नहीं गया। कई मामलों में तो मरीजों को बिना इलाज किए ही सरकारी राशि डकारने के सबूत मिले हैं।

पुलिस ने दर्ज किया केस, बीएमओ पर गिरी गाज

स्वास्थ्य विभाग की स्पष्ट शिकायत पर खातेगांव पुलिस ने संचालक दीपक विश्नोई के विरुद्ध बीएनएस की धारा 318(2) और 336(3) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उन सभी दस्तावेजों को खंगाल रही है, जिनके आधार पर सरकारी राशि का गबन किया गया। इस पूरे मामले में पर्यवेक्षणीय लापरवाही बरतने के लिए बीएमओ डॉ. शुभम तिवारी को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है और उनके स्थान पर डॉ. तुषार गुप्ता को प्रभार सौंपा गया है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शाहिद शेख के नेतृत्व में गठित जांच दल ने स्पष्ट किया है कि जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। यदि साक्ष्यों में अन्य लोगों की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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