मध्यप्रदेश में अगले 5 साल में बंद होंगे 7 हजार स्कूल, हर 15 किलोमीटर में खुल रहे सांदीपनि विद्यालय

By Ashish Meena
सितम्बर 3, 2026

मध्य प्रदेश में सर्वसुविधायुक्त स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए शासकीय सांदीपनि विद्यालयों का विस्तार तेजी से हो रहा है। इसके साथ ही कम छात्र संख्या वाले छोटे सरकारी स्कूलों के भविष्य पर संकट छा रहा है।

भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय ऑनलाइन डिजिटल डाटाबेस के यूनीफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफार्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) प्लस के अनुसार पिछले शैक्षणिक सत्र में प्रदेश के 2,426 सरकारी स्कूल बंद हुए, जो देश में सबसे ज्यादा हैं। अब अगले पांच साल में करीब सात हजार स्कूल बंद होने या मर्ज होने का अनुमान है। इन स्कूलों के बच्चों को आसपास के सांदीपनि विद्यालयों में भेजा जा सकता है।

दो चरणों में 773 विद्यालयों पर ₹24,915 करोड़ खर्च का प्लान

सांदीपनि योजना के पहले चरण में 370 स्कूल शामिल हैं। इनमें 274 स्कूल शिक्षा विभाग और 94 जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत हैं। इन पर ₹13,525 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किया जा रहा है। इन स्कूलों में करीब 4.43 लाख विद्यार्थियों को प्रवेश देने का लक्ष्य है।

योजना के दूसरे चरण में 405 स्कूल प्रस्तावित हैं। इन पर 11,390 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होंगे। इनमें करीब 4.05 लाख अतिरिक्त विद्यार्थियों को प्रवेश देने की योजना है। दोनों चरणों में कुल 773 सांदीपनि विद्यालय, करीब 24,915 करोड़ रुपये का बजट और 8.48 लाख विद्यार्थियों की क्षमता तैयार करने की योजना है।

15 हजार से अधिक स्कूलों में 20 से कम बच्चे

प्रदेश में 15,170 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां 20 से कम विद्यार्थी हैं। इन स्कूलों में फिलहाल अतिथि शिक्षकों के माध्यम से पढ़ाई करवाई जा रही है। सांदीपनि विद्यालयों के पूरी तरह शुरू होने के बाद इनके आसपास के कम छात्र संख्या वाले प्राथमिक और मिडिल स्कूलों को मर्ज किए जाने की संभावना है। योजना के तहत एक से पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले छोटे स्कूलों के विद्यार्थियों को सांदीपनि विद्यालयों में भेजा जा रहा है।

स्कूल शिक्षा के पूर्व संयुक्त संचालक राव कुलदीप सिंह कहते हैं कि संख्यात्मक और गुणात्मक शिक्षा की बहस हमेशा रही है। विद्यार्थियों की सुगम पहुंच के लिए अधिक संख्या में स्कूल खोलना भी आवश्यक है लेकिन सीमित संसाधनों के कारण सभी में समान स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सुनिश्चित किया जाना कठिन होता है। ऐसी स्थिति में हमेशा ही यह निर्णय दुविधाकारी रहता है कि विस्तार को माना जाए या गुणवत्ता को। इतना जरूर है कि व्यवस्था पारदर्शी हो, गुणात्मक हो और स्थानीय समुदाय की सहभागिता उसमें होना चाहिए।

मध्य प्रदेश में इस तरह कम होते गए सरकारी स्कूल

2019-20: 99,411
2020-21: 99,152
2021-22: 92,695
2022-23: 92,441
2023-24: 92,439
2024-25: 92,250
2025-26: 89,824

बजट बढ़कर हुआ ₹36,730 करोड़, छात्र संख्या बढ़ाना फिर भी बड़ी चुनौती
स्कूल शिक्षा पर मध्य प्रदेश सरकार का खर्च लगातार बढ़ा है। दो साल में स्कूल शिक्षा का बजट करीब नौ हजार करोड़ बढ़कर 36,730 करोड़ रुपये हो गया। इसके बावजूद सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाना चुनौती बना हुआ है।

मध्य प्रदेश में गुणवत्तायुक्त शिक्षा के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इसमें सांदीपनि विद्यालय की स्थापना सबसे बड़ा कदम है। सर्वसुविधायुक्त इस विद्यालय के मॉडल को सराहना मिल रही है। इस विद्यालय में आसपास के स्कूलों के विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जा रहा है। बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए बस की सुविधा भी दी जा रही है। जिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बेहद कम रही है, उन्हें पास के स्कूलों में मर्ज किया गया है। इसका लाभ यह हुआ कि जिन स्कूलों में विद्यार्थी कम होने के बाद भी शिक्षक अधिक थे, उन्हें दूसरे स्कूलों में भेजा गया।

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Ashish Meena

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।