मध्य प्रदेश के लिए केंद्र का बड़ा फैसला! जल जीवन मिशन को 4000 करोड़, कर्ज सीमा बढ़ाने पर भी हरी झंडी
By Ashish Meena
मार्च 13, 2026
मध्य प्रदेश के लिए दिल्ली से एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की केंद्रीय मंत्रियों से हुई महत्वपूर्ण बैठकों के बाद राज्य को वित्तीय मोर्चे पर बड़ी मदद मिलने जा रही है। केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के लिए करीब 4000 करोड़ रुपये जारी करने पर सहमति जताई है। इससे राज्य में चल रही जल आपूर्ति परियोजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही राज्य सरकार को एक और महत्वपूर्ण राहत मिली है। बढ़ती जीएसडीपी को देखते हुए मध्य प्रदेश की बाजार से कर्ज लेने की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को भी सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। यह फैसला आने वाले समय में राज्य के विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने में मदद करेगा।
जल जीवन मिशन को मिलेगी नई रफ्तार
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात कर राज्य में चल रहे जल जीवन मिशन की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने इस योजना को जारी रखने के लिए अपने संसाधनों से करीब 9000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि जल जीवन मिशन के तहत वर्ष 2024-25 के लगभग 4500 करोड़ रुपये और वर्ष 2025-26 के करीब 5000 करोड़ रुपये केंद्र के पास लंबित हैं। राज्य सरकार चाहती है कि यह राशि जल्द जारी की जाए ताकि योजना के काम को तेजी से पूरा किया जा सके।
जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने राज्य के प्रयासों की सराहना की और कहा कि मध्य प्रदेश ने इस योजना को लागू करने में अच्छा प्रदर्शन किया है। उन्होंने मार्च 2026 से पहले 4000 करोड़ रुपये जारी करने पर सहमति दे दी है। इससे राज्य में जल जीवन मिशन के कामों को और तेजी मिलेगी।
2026 तक लगभग पूरा हो सकता है मिशन
जल जीवन मिशन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक साफ पेयजल पहुंचाना है। इस योजना की राष्ट्रीय समय सीमा वर्ष 2028 तक निर्धारित की गई है।
लेकिन मध्य प्रदेश ने इस मिशन के क्रियान्वयन में तेजी दिखाई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के अनुसार राज्य में इस योजना का लगभग 99 प्रतिशत काम वर्ष 2026 तक पूरा हो जाने की संभावना है।
यदि ऐसा होता है तो मध्य प्रदेश उन राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां जल जीवन मिशन तय समय से पहले पूरा हो जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लाखों परिवारों को सीधे तौर पर फायदा होगा क्योंकि उन्हें घर-घर नल के माध्यम से स्वच्छ पानी मिलेगा।
कर्ज लेने की सीमा बढ़ाने को भी मिली मंजूरी
जल शक्ति मंत्री से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी बैठक की। इस दौरान वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री को बताया कि मध्य प्रदेश की आर्थिक स्थिति लगातार मजबूत हो रही है। राज्य की औसत विकास दर लगभग 10 प्रतिशत है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वर्ष 2026-27 तक राज्य का सकल घरेलू उत्पाद यानी जीएसडीपी लगभग 18 लाख 48 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
इसी आधार पर मुख्यमंत्री ने राज्य की बाजार से कर्ज लेने की सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है।
विकास कार्यों को मिलेगा आर्थिक सहारा
यदि कर्ज सीमा बढ़ती है तो राज्य सरकार को विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी। इससे सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट्स को गति मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यों को अधिक वित्तीय संसाधन मिलने से विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकता है। मध्य प्रदेश में भी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं चल रही हैं जिनके लिए अतिरिक्त धन की आवश्यकता होती है।
निकायों और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भी उठाई मांग
दिल्ली यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अन्य लंबित मांगों को भी केंद्रीय मंत्रियों के सामने रखा। उन्होंने 15वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित राशि को पूरी तरह जारी करने की मांग की। मुख्यमंत्री ने बताया कि नगरीय और ग्रामीण निकायों के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24 के लगभग 512 करोड़ रुपये अभी मिलने बाकी हैं। इसके अलावा वर्ष 2025-26 के करीब 1181 करोड़ रुपये भी अभी जारी नहीं हुए हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े फंड का मुद्दा भी बैठक में उठाया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि 15वें वित्त आयोग के तहत वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक स्वास्थ्य अधोसंरचना के लिए लगभग 4600 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। लेकिन अब तक केवल 3690 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार चाहती है कि शेष राशि भी जल्द जारी की जाए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाया जा सके।
