MP में आसमानी आफत! बिजली गिरने से किसान की मौत, कई जिलों में हो रही बारिश, ओलावृष्टि से फसल हुई बर्बाद, इन जिलों के लिए अलर्ट जारी
By Ashish Meena
फ़रवरी 3, 2026
बिजली गिरने से किसान की मौत: मध्य प्रदेश में सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) ने पूरे प्रदेश के मौसम का मिजाज बिगाड़ दिया है। बीती रात से शुरू हुआ ओलावृष्टि, बारिश और गरज-चमक का सिलसिला मंगलवार सुबह तक जारी रहा। इस प्राकृतिक आपदा के बीच शिवपुरी से एक दर्दनाक खबर सामने आई है, जहाँ खेत में बनी झोपड़ी पर बिजली गिरने से एक किसान की जिंदा जलकर मौत हो गई।
ग्वालियर-मंदसौर में गिरे ओले
प्रदेश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में मौसम का सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है। ग्वालियर और मंदसौर जिलों में बड़े आकार के ओले गिरे हैं, जिससे खेतों में खड़ी रबी की फसलों (गेहूं, चना और सरसों) को व्यापक नुकसान की आशंका है। वहीं, भोपाल, भिंड, छतरपुर, राजगढ़, आगर-मालवा और गुना में रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी है। रायसेन में कड़ाके की ठंड के कारण सुबह ओस की बूंदें जमी हुई नजर आईं।
कोहरे के आगोश में आधा मध्य प्रदेश
बारिश और नमी के कारण प्रदेश के कई हिस्से घने कोहरे की चपेट में हैं। भोपाल और सीहोर में दृश्यता (Visibility) घटकर मात्र 50 मीटर रह गई है।
प्रभावित जिले: दतिया, रायसेन, उज्जैन, मुरैना, देवास, इंदौर, खजुराहो, सतना, और श्योपुर जैसे शहरों में सुबह ‘जीरो विजिबिलिटी’ जैसे हालात रहे।
यातायात पर असर: घने कोहरे के कारण दिल्ली से भोपाल और इंदौर आने वाली कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 3 से 6 घंटे की देरी से चल रही हैं।
मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) ने मंगलवार को भोपाल, ग्वालियर, रीवा, और चंबल संभाग सहित 20 जिलों में ‘मावठा’ (सर्दियों की बारिश) गिरने का येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अरब सागर से आ रही नमी और पश्चिमी विक्षोभ के मिलन से यह स्थिति बनी है।
अगले 3 दिनों का सटीक पूर्वानुमान
मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल राहत के आसार कम हैं:
4 फरवरी: ग्वालियर-चंबल संभाग और बुंदेलखंड के जिलों (टीकमगढ़, निवाड़ी) में मध्यम से घना कोहरा रहेगा।
5 फरवरी: रीवा, मऊगंज और सतना समेत विंध्य क्षेत्र में कोहरे का प्रभाव बढ़ेगा।
6 फरवरी: पूरे उत्तरी मध्य प्रदेश में शीतलहर और घने कोहरे की चेतावनी जारी की गई है।
आने वाली है कड़ाके की ठंड
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में हो रही भारी बर्फबारी का सीधा असर मध्य प्रदेश पर पड़ने वाला है। जैसे ही यह वर्तमान वेदर सिस्टम (पश्चिमी विक्षोभ) आगे बढ़ेगा, उत्तर से आने वाली सर्द हवाएं मैदानी इलाकों में ठिठुरन बढ़ा देंगी। फरवरी के पहले सप्ताह में तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है।
मध्य प्रदेश के किसानों के लिए यह मौसम दोहरी चुनौती लेकर आया है। एक ओर ‘मावठा’ कुछ फसलों के लिए अमृत है, तो वहीं ओलावृष्टि ने चिंता बढ़ा दी है। आम नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और कोहरे में वाहन चलाते समय सावधानी बरतें।
