किसानों की किस्मत बदल सकता है ये पेड़, सोने से महंगी बिकती है लकड़ी

By Ashish Meena
फ़रवरी 2, 2026

Budget 2026 : बजट 2026-27 में सरकार ने खेती को फायदे का सौदा बनाने के लिए नई रणनीति अपनाई है. इस बार खेती, उससे जुड़े व्यवसायों और आधुनिक तकनीक को केंद्र में रखा गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किसानों की आमदनी बढ़ाने, गांवों में नए रोजगार पैदा करने और खेती को आधुनिक रूप देने के लिए कई अहम कदमों का ऐलान किया है. इसके तहत कृषि क्षेत्र के लिए 1,62,671 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

खास बात ये है कि उत्तर-पूर्वी राज्यों में अगरवुड को बढ़ावा दिया जाएगा. ये वही पेड़ है, जिसकी लकड़ी सोने भी महंगी होती है. आइए जानते हैं क्या होता है अगरवुड और क्यों है ये इतना महंगा?

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किनती होती है कीमत?

‘अगरवुड’ को ‘ऊद’ को नाम से भी जाना जाता है. एक गहरे रंग की, भारी और सुगंधित लकड़ी होती है, जिसमें राल (तेल जैसी गोंद) भरी होती है. यह तब बनती है जब एक्विलेरिया प्रजाति का स्वस्थ पेड़ किसी फंगल संक्रमण या किसी तरह की चोट से प्रभावित होता है. पेड़ अपनी सुरक्षा के लिए प्रतिक्रिया करता है और इसी दौरान यह सुगंधित राल बनती है. ऊद का तेल, ऊद की लकड़ी से हाइड्रो-डिस्टिलेशन प्रक्रिया के जरिए निकाला जाता है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अच्छी गुणवत्ता वाली ऊद की एक किलो लड़की की कीमत 70 लाख रुपए से ज्यादा बताई जाती है. वहीं इसके एक ग्राम तेल kii कीमत तो करीब ₹9000 हजार तक बताई जाती है.

भारत में अगरवुड

भारत में अगरवुड पेड़ प्राकृतिक रूप से असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और मेघालय में पाया जाता है. असम में अगर के पेड़ को जासी और सांची भी कहा जाता है. अब अगर के पेड़ की जैविक खेती भारत के पश्चिमी तटीय क्षेत्रों जैसे केरल, महाराष्ट्र और गुजरात में भी की जा रही है, जहां की मिट्टी और जलवायु इसके लिए अनुकूल है. अगर का पेड़ औसतन 21 मीटर ऊंचा होता है और इसका तना लगभग 1.5 से 2.4 मीटर मोटा होता है. इसका तना लगभग सीधा और धारियों वाला होता है.

अगर के तेल का उपयोग

अगर से निकाला गया ऊद तेल इत्र के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. इसे शुद्ध रूप में भी और चंदन, कस्तूरी, केसर और एंबर जैसे प्राकृतिक सुगंधित पदार्थों के साथ मिलाकर भी प्रयोग किया जाता है. यह इत्र उद्योग में इस्तेमाल होने वाली सबसे पुरानी और सबसे महंगी कच्ची सामग्रियों में से एक है. चीन, भारत और अरब देशों में ऊद तेल का उपयोग दवाओं के लिए भी सदियों से होता आ रहा है.

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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