MP में होली से पहले बसों की हड़ताल, मालिक-ऑपरेटर्स हुए नाराज, आम यात्रियों पर होगा सीधा असर

By Ashish Meena
फ़रवरी 26, 2026

होली का त्योहार जैसे-जैसे करीब आ रहा है, वैसे-वैसे घर जाने की तैयारी भी तेज हो जाती है। लोग टिकट बुक करते हैं, बैग पैक करते हैं और परिवार से मिलने की खुशी मन में बसाए रखते हैं। लेकिन इस बार मध्य प्रदेश में बसों की हड़ताल ने इन खुशियों पर ब्रेक लगा दिया है।

2 मार्च को, यानी होली से ठीक दो दिन पहले, प्रदेश के 55 जिलों में बसों के पहिए थम जाएंगे। करीब 20 हजार बसें सड़कों पर नहीं उतरेंगी। इसका सीधा असर उन लाखों यात्रियों पर पड़ेगा, जो त्योहार पर अपने गांव या शहर लौटने की योजना बना रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर यह हड़ताल क्यों हो रही है और आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ेगा?

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2 मार्च को क्यों हो रही है मध्य प्रदेश में बसों की हड़ताल?

मध्य प्रदेश बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने साफ किया है कि 2 मार्च को सुबह 6 बजे से बसों का संचालन बंद रहेगा। इस हड़ताल में 12,780 परमिट वाली बसें और 7 हजार से अधिक कॉन्ट्रैक्ट बसें शामिल होंगी। यानी कुल मिलाकर लगभग 20 हजार बसें नहीं चलेंगी।

बस मालिकों का विरोध राज्य सरकार की नई परिवहन नीति को लेकर है। इस नीति के तहत सरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के जरिए सात कंपनियों को बस संचालन से जुड़े टेंडर देगी। इन कंपनियों को किराया तय करने और संचालन की निगरानी का अधिकार दिया जाएगा।

बस ऑपरेटरों का कहना है कि नई नीति से उनकी कमाई पर असर पड़ेगा और वे कंपनियों पर निर्भर हो जाएंगे। इसलिए मध्य प्रदेश में बसों की हड़ताल को वे अपनी मजबूरी बता रहे हैं।

नई परिवहन नीति पर विवाद, किराया कौन तय करेगा?

मध्य प्रदेश बस ओनर्स एसोसिएशन के महामंत्री जयकुमार जैन के अनुसार, नई नीति के तहत लोकल रूट के लिए परमिट सरकार देगी, लेकिन किराया सात निजी कंपनियां तय करेंगी। बस, ड्राइवर, कंडक्टर और ईंधन का खर्च बस ऑपरेटरों का ही रहेगा। इसके बावजूद कंपनियां किराए का 10 प्रतिशत तक कमीशन लेंगी।

अभी प्रदेश में प्रति किलोमीटर किराया 1.25 रुपए है। नई नीति के बाद इसे बढ़ाकर 1.75 रुपए प्रति किलोमीटर करने का प्रस्ताव है। बस मालिकों का कहना है कि इससे यात्रियों पर भी बोझ बढ़ेगा और ऑपरेटरों की स्वतंत्रता भी कम होगी।

यह विवाद ही मध्य प्रदेश में बसों की हड़ताल की मुख्य वजह बना है। बस संचालकों ने सरकार को ज्ञापन सौंप दिया है और मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।

होली पर घर जाना 5 से 7 गुना महंगा पड़ सकता है

सबसे ज्यादा चिंता आम यात्रियों की है। होली जैसे बड़े त्योहार पर लोग बड़ी संख्या में यात्रा करते हैं। अगर बसें नहीं चलेंगी, तो ट्रेनों पर दबाव बढ़ेगा। पहले से ही होली के दौरान ट्रेनों में भारी भीड़ रहती है।

ऐसी स्थिति में लोगों के पास निजी ट्रैवल्स और कैब ही विकल्प बचेंगे। उदाहरण के तौर पर भोपाल से होशंगाबाद का सामान्य बस किराया 100 रुपए है। लेकिन हड़ताल और भीड़ के कारण यही किराया 1500 से 2000 रुपए तक पहुंच सकता है।

एक कैब में चार लोग बैठ सकते हैं, तो प्रति व्यक्ति खर्च 500 से 600 रुपए तक आ सकता है। यानी सामान्य किराए से 5 से 7 गुना ज्यादा। यही हाल अन्य रूटों पर भी हो सकता है। इसलिए मध्य प्रदेश में बसों की हड़ताल का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।

सरकार का पक्ष

प्रदेश के परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने विधानसभा में कहा कि नई परिवहन नीति से किसी का नुकसान नहीं होगा। उनके अनुसार, बस और कंडक्टर ऑपरेटर के ही रहेंगे, सिर्फ सुपरविजन सरकार का होगा।

उन्होंने कहा कि अभी प्रदेश में 14 हजार बसें चल रही हैं, जबकि जरूरत 16 हजार बसों की है। ऐसे में नई नीति से व्यवस्था बेहतर होगी और यात्रियों को सुविधा मिलेगी। मंत्री का दावा है कि सब कुछ व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है। सरकार का यह बयान मध्य प्रदेश में बसों की हड़ताल के बीच आया है। अब देखना यह है कि बातचीत से समाधान निकलता है या आंदोलन और बढ़ता है।

आम यात्रियों के लिए क्या मायने?

1. अगर 2 मार्च को बसें नहीं चलतीं, तो यात्रा की योजना पहले से बनाएं।
2. ट्रेन टिकट की उपलब्धता चेक करें।
3. कैब या कारपूल विकल्प पर विचार करें।
4. जरूरी हो तो यात्रा की तारीख बदलें।

 

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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