MP में डॉक्टरों की हड़ताल टली: सरकार से बातचीत के बाद मरीजों को राहत, 16 मार्च तक स्थगित आंदोलन

By Ashish Meena
मार्च 10, 2026

मध्य प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चिंता का माहौल बना हुआ था। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत जूनियर डॉक्टर अपनी लंबित मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए थे। इस हड़ताल का असर सबसे ज्यादा ओपीडी सेवाओं पर देखने को मिला, जिससे हजारों मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। कई जगहों पर मरीजों की कतारें लग गईं और कुछ लोगों को बिना इलाज के वापस लौटना पड़ा।

लेकिन अब मरीजों के लिए राहत की खबर सामने आई है। सरकार और जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (जूडा) के बीच हुई बातचीत के बाद जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल फिलहाल टाल दी गई है। जूडा ने आंदोलन को 16 मार्च तक स्थगित करने का फैसला लिया है। सरकार ने डॉक्टरों की मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए जल्द समाधान का भरोसा दिया है, जिसके बाद यह फैसला लिया गया।

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सरकार और जूडा के बीच बैठक के बाद बनी सहमति

जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को लेकर मध्य प्रदेश सरकार ने तुरंत पहल की। जूडा प्रतिनिधिमंडल की उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में डॉक्टरों की प्रमुख मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान सरकार की ओर से भरोसा दिलाया गया कि जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड संशोधन और एरियर भुगतान के मुद्दे पर जल्द कार्रवाई की जाएगी। जूडा प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और सकारात्मक रुख अपनाया।

सरकार के आश्वासन के बाद जूडा ने फिलहाल आंदोलन को 16 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया है। इस फैसले से मरीजों और अस्पताल प्रशासन दोनों को राहत मिली है।

5 से 7 दिनों में निर्णय की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद

बैठक के बाद जूडा प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया है कि अगले 5 से 7 दिनों के भीतर डॉक्टरों की मांगों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

डॉक्टरों का कहना है कि यदि इस अवधि में उनकी मांगों पर ठोस कदम उठाए जाते हैं तो स्थिति पूरी तरह सामान्य हो सकती है। लेकिन यदि फैसला लेने में देरी होती है तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जा सकता है।

फिलहाल जूनियर डॉक्टरों ने सरकार को समय देने के लिए आंदोलन स्थगित कर दिया है। इससे उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह सामान्य हो जाएंगी।

अस्पतालों में हड़ताल का असर साफ दिखा

जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल का असर प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में साफ दिखाई दिया। राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज से जुड़े हमीदिया अस्पताल में स्थिति सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आई।

ओपीडी सेवाएं प्रभावित होने के कारण सुबह से ही मरीजों की लंबी कतारें लग गई थीं। कई मरीज इलाज के इंतजार में घंटों बैठे रहे, लेकिन डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण उनका इलाज नहीं हो पाया। कुछ मरीजों को मजबूरी में बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ा। इससे मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी भी देखने को मिली।

सिर्फ गंभीर मरीजों का इलाज जारी रहा

हालांकि हड़ताल के दौरान जूनियर डॉक्टरों ने पूरी तरह से काम बंद नहीं किया था। जूडा ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि आपातकालीन सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।

ऑपरेशन थिएटर में केवल गंभीर मरीजों का इलाज किया जा रहा था। जिन मरीजों की हालत गंभीर थी, उनका ऑपरेशन किया गया। लेकिन सामान्य सर्जरी और पहले से तय ऑपरेशन को फिलहाल टाल दिया गया था। इसमें हर्निया, रॉड इंप्लांट और अन्य निर्धारित सर्जरी शामिल थीं।

हड़ताल का कारण क्या था

जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल का मुख्य कारण स्टाइपेंड संशोधन और एरियर भुगतान का मुद्दा था। जूडा एसोसिएशन के मुताबिक प्रदेश सरकार के आदेश के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड में संशोधन 1 अप्रैल 2025 से लागू होना था। लेकिन अब तक यह आदेश लागू नहीं किया गया। इसके साथ ही अप्रैल 2025 से मिलने वाला एरियर भी जारी नहीं किया गया। डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने कई बार शासन और स्वास्थ्य विभाग को इस बारे में जानकारी दी, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसी वजह से उन्हें विरोध प्रदर्शन और हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।

जूडा ने पहले भी सरकार को चेतावनी दी थी

जूडा एसोसिएशन ने हड़ताल से पहले कई बार सरकार को चेतावनी दी थी। संगठन के पदाधिकारियों ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन और विभागाध्यक्षों को ज्ञापन भी सौंपा था।

इस ज्ञापन में साफ कहा गया था कि यदि स्टाइपेंड संशोधन और एरियर भुगतान का निर्णय जल्द नहीं लिया जाता है तो जूनियर डॉक्टर ओपीडी और अन्य सामान्य सेवाओं का बहिष्कार करेंगे। जब लंबे समय तक कोई फैसला नहीं हुआ तो जूनियर डॉक्टरों ने सोमवार से हड़ताल शुरू कर दी थी।

स्वास्थ्य सेवाओं में जूनियर डॉक्टरों की अहम भूमिका

सरकारी मेडिकल कॉलेजों और उनसे जुड़े अस्पतालों में जूनियर डॉक्टरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। अस्पतालों में मरीजों की जांच, इलाज और उनकी नियमित निगरानी का बड़ा हिस्सा इन्हीं डॉक्टरों के जिम्मे होता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी अस्पतालों में लगभग 60 से 70 प्रतिशत काम जूनियर डॉक्टरों के भरोसे चलता है। ऐसे में जब ये डॉक्टर हड़ताल पर चले जाते हैं तो अस्पतालों की कार्यप्रणाली प्रभावित होना स्वाभाविक है।

मरीजों को क्यों हुई परेशानी

जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर आम मरीजों पर पड़ा। सरकारी अस्पतालों में रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ओपीडी सेवाएं बंद होने के कारण मरीजों को डॉक्टरों से मिलने में परेशानी हुई। कई मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कत हुई क्योंकि वे खासतौर पर सस्ते इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में आते हैं।

सरकार के सामने बड़ी चुनौती

जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल ने मध्य प्रदेश सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी। यदि यह हड़ताल लंबे समय तक चलती तो स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर पड़ सकता था। इसलिए सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप किया और जूडा प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश की। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह है कि डॉक्टरों की मांगों पर जल्द निर्णय लेकर स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह सामान्य किया जाए।

 

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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