खातेगांव के दिव्या नर्सिंग होम पर सनसनीखेज आरोप, आयुष्मान योजना के नाम पर हो रहा फर्जीवाड़ा, पैसों का लालच देकर खड़े किए जा रहे फर्जी मरीज!
By Admin@News
जून 26, 2026
मालवा जंक्शन, खातेगांव। गरीबों को मुफ्त और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के उद्देश्य से शुरू की गई सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी ‘आयुष्मान भारत योजना’ में सेंधमारी का एक बेहद संगीन और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। देवास जिले के खातेगांव में संचालित दिव्या नर्सिंग होम पर सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा और वित्तीय अनियमितता करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस पूरे खेल में एक सुव्यवस्थित दलाल नेटवर्क और अस्पताल प्रबंधन की मिलीभगत की बात सामने आ रही है, जिसने स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
1,000 रुपए का लालच और बेड पर ‘फर्जी मरीज’
उजागर हुई जानकारी के अनुसार, इस पूरे घोटाले की कार्यप्रणाली (मोडस ऑपेरंडी) बेहद चौंकाने वाली है। दिव्या नर्सिंग होम से जुड़े कुछ दलाल ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को निशाना बनाते हैं। इन मासूम और जरूरतमंद लोगों को महज 1,000 रुपये का नगद लालच देकर अस्पताल लाया जाता है।
इसके बाद, जिन लोगों को कोई बीमारी या शारीरिक समस्या नहीं होती, उन्हें भी जबरन मरीज बताकर अस्पताल के वार्डों और बेड पर लिटा दिया जाता है। वहां उनके हाथों में ड्रिप या पट्टियां बांधकर इलाज का नाटक किया जाता है और बकायदा तस्वीरें खींची जाती हैं। डिजिटल साक्ष्य तैयार करने के बाद, इन व्यक्तियों के सरकारी पहचान पत्र जैसे समग्र आईडी, बैंक पासबुक और अन्य दस्तावेज की प्रतियां ले ली जाती हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर सरकार के आयुष्मान पोर्टल पर क्लेम (दावा) अपलोड कर दिया जाता है और बिना किसी वास्तविक इलाज के सरकारी खजाने से हजारों-लाखों रुपये ऐंठ लिए जाते हैं।
दलालों का सिंडिकेट और बीएमओ के नाम पर सस्पेंस
इस पूरे फर्जीवाड़े को जमीन पर उतारने के लिए दलालों का एक सक्रिय नेटवर्क काम कर रहा है। स्थानीय दावों के अनुसार, अमजद खान नामक व्यक्ति पर ग्रामीण इलाकों से ऐसे ‘फर्जी मरीज’ ढूंढकर अस्पताल तक लाने के मुख्य आरोप लगे हैं।
मामला केवल दलालों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसकी आंच प्रशासनिक गलियारों तक पहुंच रही है। इस पूरे प्रकरण में खातेगांव के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) डॉ. शुभम तिवारी का नाम भी स्थानीय स्तर पर तेजी से उछाला जा रहा है। क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि दिव्या नर्सिंग होम का वास्तविक स्वामित्व या संलिप्तता बीएमओ डॉ. शुभम तिवारी से जुड़ी है। हालांकि, इस बात की पुष्टि के लिए अभी तक कोई आधिकारिक दस्तावेज या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है, और न ही अस्पताल के मालिकाना हक को लेकर कोई पुख्ता प्रशासनिक बयान आया है। लेकिन जल्द ही इस मामले का विस्तृत खुलासा होगा।
निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
यह मामला सीधे तौर पर टैक्सपेयर्स के पैसे और गरीबों के हक पर डाका डालने जैसा है। सरकारी योजनाओं का लाभ पात्रों तक पहुँचने के बजाय इस तरह निजी जेबों में जाना पूरी व्यवस्था की मॉनिटरिंग पर सवाल खड़े करता है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन और राज्य स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की उच्च स्तरीय व निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल के दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज और आयुष्मान क्लेम के रिकॉर्ड को जब्त कर जांच की जाए, ताकि इस रैकेट के पीछे छिपे बड़े चेहरों को बेनकाब कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।
