सरकारी शादी में गड़बड़ी! बारातियों को मिला सिर्फ आचार-पूरी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लौटीं भूखी

By Ashish Meena
मार्च 15, 2026

मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के शुजालपुर में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह सम्मेलन में प्रशासनिक अव्यवस्था की तस्वीर सामने आई है। सरकारी आयोजन में शामिल हुए बारातियों को जहां भोजन के नाम पर केवल आचार और पूरी के पैकेट दिए गए, वहीं कार्यक्रम को सफल बनाने में लगी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भोजन तक नहीं मिल पाया।

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई और कार्यक्रम की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे। खास बात यह है कि शुजालपुर क्षेत्र प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार का गढ़ माना जाता है। इसके बावजूद कार्यक्रम में ऐसी अव्यवस्था सामने आना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।

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मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह सम्मेलन में अव्यवस्था की तस्वीर

शनिवार को शुजालपुर में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में कई जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया और बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

सरकारी योजना के तहत आयोजित ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य गरीब परिवारों की बेटियों का विवाह सम्मानपूर्वक कराना होता है। लेकिन इस आयोजन में व्यवस्थाओं को लेकर कई शिकायतें सामने आईं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्यक्रम में आए बारातियों और मेहमानों के लिए भोजन की उचित व्यवस्था नहीं थी। उन्हें खाने के नाम पर केवल आचार और पूरी के पैकेट दिए गए, जिससे कई लोग नाराज दिखाई दिए।

बारातियों को मिला सिर्फ आचार-पूरी का पैकेट

कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों के अनुसार बारातियों को भोजन की जगह केवल आचार और पूरी के पैकेट बांटे गए। सरकारी कार्यक्रम में इस तरह की व्यवस्था देखकर कई लोगों ने नाराजगी जताई। लोगों का कहना है कि इतने बड़े आयोजन में मेहमानों के लिए उचित भोजन की व्यवस्था होना चाहिए थी।

कुछ लोगों ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह जैसे कार्यक्रम समाज के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन अगर व्यवस्थाएं ठीक न हों तो इससे सरकार की छवि पर भी असर पड़ता है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नहीं मिला भोजन

इस कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा उस समय हुई जब यह सामने आया कि आयोजन में मेहनत करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भोजन तक नहीं मिला।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरकारी योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह सम्मेलन को सफल बनाने में भी उन्होंने पूरी मेहनत से काम किया। लेकिन कार्यक्रम खत्म होने के बाद उन्हें भोजन तक नसीब नहीं हुआ और कई कार्यकर्ताओं को बिना खाना खाए ही वहां से लौटना पड़ा। इस घटना से कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी देखी गई।

प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी चुप

इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी कुछ भी बोलने से बचते नजर आए। जब इस विषय में अधिकारियों से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई तो किसी ने भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी लापरवाही के बावजूद यदि प्रशासन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आती है, तो यह और भी चिंताजनक बात है।

सरकारी योजनाओं की छवि पर सवाल

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह सम्मेलन जैसी योजनाएं समाज के गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य यह होता है कि गरीब परिवारों की बेटियों का विवाह सम्मानपूर्वक कराया जाए और उन्हें आर्थिक सहायता भी मिले। लेकिन यदि ऐसे कार्यक्रमों में व्यवस्थाएं कमजोर हों और मेहमानों को सही सुविधा न मिले, तो इससे योजना की छवि पर भी असर पड़ सकता है।

 

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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