मोदी सरकार में जल्द मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं, इन चेहरों को मिल सकती है जगह
By Ashish Meena
जून 8, 2026
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में जल्द मंत्रिमंडल विस्तार होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि इस महीने के अंत या अगले महीने की शुरुआत में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला कैबिनेट विस्तार किया जा सकता है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि आगामी विधानसभा चुनावों वाले राज्यों को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश हो सकती है।
विशेष रूप से पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों पर भाजपा की नजर मानी जा रही है, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। उत्तर प्रदेश में पार्टी पहले से मजबूत स्थिति में है, जबकि पंजाब में भाजपा संगठन को विस्तार देकर नए समीकरण तैयार करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को राज्यसभा भेजने के बजाय विधानसभा चुनाव में उतारने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
पंजाब से दो नेताओं के नाम चर्चा में
सूत्रों के हवाले से चर्चाएं हैं कि पंजाब कोटे से भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और हाल के दिनों में भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। हालांकि, इस संबंध में सरकार या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
तरुण चुघ को मिल सकती है अहम भूमिका
अमृतसर से ताल्लुक रखने वाले तरुण चुघ भाजपा संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और पार्टी नेतृत्व के करीबी नेताओं में उनकी गिनती होती है। संगठनात्मक अनुभव के चलते उन्हें सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है। वर्तमान में वे कई राज्यों में पार्टी के प्रभारी की भूमिका भी निभा रहे हैं और लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हैं।
राघव चड्ढा के नाम पर भी अटकलें
युवा चेहरों में लोकप्रिय और पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट राघव चड्ढा का नाम भी संभावित मंत्रियों की सूची में चर्चा में है। राजनीतिक हलकों में ऐसी अटकलें हैं कि पंजाब चुनाव से पहले भाजपा उन्हें एक बड़े चेहरे के तौर पर पेश कर सकती है। वित्तीय मामलों की समझ और युवाओं के बीच लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें किसी अहम जिम्मेदारी में शामिल किए जाने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। हालांकि, कैबिनेट विस्तार को लेकर फिलहाल किसी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है और अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व की रणनीति पर निर्भर करेगा।
