MP में 700 करोड़ का नशीली कफ सिरप रैकेट! 12 राज्यों में फैले ड्रग सिंडिकेट का बड़ा खुलासा

By Ashish Meena
मार्च 15, 2026

MP के मऊगंज जिले से सामने आया नशीली कफ सिरप कांड पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह कोई छोटा-मोटा अवैध कारोबार नहीं, बल्कि 700 करोड़ रुपये से अधिक का अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट था। इस नेटवर्क का जाल देश के 12 राज्यों तक फैला हुआ था।

पुलिस ने जब इस मामले की गहराई से जांच शुरू की तो कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए। फर्जी दवा कंपनियों, नकली बिलिंग और कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध सप्लाई के जरिए यह गिरोह करोड़ों रुपये का कारोबार कर रहा था। अब इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड को पकड़कर पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है।

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मऊगंज में कार्रवाई से खुला करोड़ों का ड्रग नेटवर्क

इस पूरे मामले की शुरुआत 28 मार्च 2025 को हुई थी। उस दिन मऊगंज थाना पुलिस ने गाडा मोड़ के पास एक संदिग्ध ब्रेजा कार को घेराबंदी कर रोका। कार में सवार लोगों की तलाशी लेने पर पुलिस को बड़ी मात्रा में नशीली ऑनरेक्स कफ सिरप की बोतलें मिलीं।

कार से कुल 2160 शीशी कफ सिरप बरामद की गई, जिसकी कीमत करीब 4.21 लाख रुपये बताई गई। मौके से अमित सिंह, अमोल तिवारी और आशीष पटेल को गिरफ्तार कर लिया गया और NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।

शुरुआत में यह एक सामान्य तस्करी का मामला लग रहा था, लेकिन जब पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ की तो पता चला कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा अंतरराज्यीय नेटवर्क काम कर रहा है।

फर्जी कंपनियों के जरिए चल रहा था अवैध कारोबार

जांच के दौरान वाराणसी निवासी सुमित केसरी का नाम सामने आया। सुमित केसरी ‘नीलकंठ’ और ‘बालाजी’ नाम की फर्जी दवा कंपनियों के जरिए नशीली सिरप की सप्लाई करता था।

उत्तर प्रदेश के ड्रग इंस्पेक्टर्स की जांच में यह खुलासा हुआ कि ये कंपनियां केवल कागजों में मौजूद थीं। असल में इनका कोई वास्तविक कारोबार नहीं था। इन फर्जी कंपनियों के नाम पर नकली बिल बनाए जाते थे और कोडीन युक्त कफ सिरप की सप्लाई पूरे देश में की जाती थी।

पूछताछ में सुमित केसरी ने बताया कि यह पूरा नेटवर्क कानपुर निवासी विनोद अग्रवाल के निर्देश पर चलाया जा रहा था। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में विनोद अग्रवाल को मुख्य आरोपी के रूप में चिन्हित किया।

704 करोड़ का टर्नओवर और लाखों बोतलें जब्त

जांच में सामने आया कि गिरोह का सरगना विनोद अग्रवाल अपने बेटे शिवम अग्रवाल के साथ मिलकर इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहा था। ये लोग दवा लाइसेंस की आड़ में दिल्ली, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की दवा कंपनियों से कोडीन युक्त कफ सिरप मंगाते थे। इसके बाद करीब 65 से ज्यादा फर्जी कंपनियों के नाम पर नकली बिल बनाकर पूरे देश में इसकी सप्लाई की जाती थी।

उत्तर प्रदेश के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की जांच में इस नेटवर्क का टर्नओवर करीब 704 करोड़ रुपये सामने आया। पुलिस कार्रवाई के दौरान करीब 89 लाख बोतलें जब्त की गईं, जिनकी कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। यह देश के सबसे बड़े नशीली कफ सिरप रैकेट में से एक माना जा रहा है।

कई राज्यों में एक साथ छापेमारी

इस मामले में कार्रवाई के लिए रीवा जोन के आईजी के निर्देशन में मऊगंज पुलिस और उत्तर प्रदेश पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाया। पुलिस टीमों ने बनारस, कानपुर, मिर्जापुर और प्रयागराज समेत कई शहरों में लगातार छापेमारी की। इस अभियान में 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी शामिल रहे। अब तक इस मामले में 79 केस दर्ज किए जा चुके हैं और 225 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें से 78 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

इसके अलावा 134 दवा कंपनियों पर छापे मारे गए हैं। पुलिस ने मुख्य आरोपी विनोद अग्रवाल की करीब 10 करोड़ रुपये की संपत्ति भी कुर्क कर ली है। उस पर पहले से ही 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था।

युवाओं और खिलाड़ियों को बनाया जाता था तस्करी का जरिया

जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। गिरोह युवाओं और खिलाड़ियों को लालच देकर तस्करी के लिए इस्तेमाल करता था। खास तौर पर वॉलीबॉल खिलाड़ियों और अन्य युवाओं के जरिए नशीली कफ सिरप की सप्लाई की जाती थी। इन युवाओं के माध्यम से सिरप को रीवा, मऊगंज, सतना, सीधी और सिंगरौली जैसे जिलों में पहुंचाया जाता था।

इस नेटवर्क में शुभम जायसवाल और सीधी निवासी राहुल द्विवेदी की भी अहम भूमिका सामने आई है। मुख्य आरोपी विनोद अग्रवाल को हरियाणा के महेंद्रगढ़ से गिरफ्तार किया गया था और उसे कानपुर जेल भेज दिया गया था। अब मऊगंज पुलिस ने 9 मार्च 2026 को उसे पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू की है।

आगे और बड़े खुलासे की उम्मीद

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अभी जांच जारी है और पूछताछ के दौरान कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि इस नेटवर्क में कई और लोग शामिल हो सकते हैं, जिनमें दवा कंपनियों से जुड़े लोग और अन्य तस्कर भी हो सकते हैं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह अवैध कारोबार कितने समय से चल रहा था और इसमें कौन-कौन शामिल था।

 

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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