किसानों के लिए बड़ी खबर: नरवाई जलाने पर होगी कार्रवाई, सैटेलाइट से हो रही निगरानी, हरदा में प्रशासन ने लिया 10 हजार रुपए का जुर्माना
By Ashish Meena
मार्च 18, 2026
मध्य प्रदेश में अब खेतों में नरवाई जलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है। हरदा जिले में प्रशासन ने एक किसान पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाकर साफ संदेश दिया है कि फसल के अवशेष जलाने की आदत अब महंगी पड़ सकती है। प्रशासन का कहना है कि खेतों में नरवाई जलाने से न केवल पर्यावरण को नुकसान होता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होती है।
इस मामले ने प्रदेश के किसानों के बीच चर्चा बढ़ा दी है। कई किसान अब सोचने पर मजबूर हैं कि यदि वे भी खेतों में नरवाई जलाते हैं तो उन पर भी इसी तरह की कार्रवाई हो सकती है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब खेतों में लगने वाली आग पर सैटेलाइट के जरिए नजर रखी जाएगी और दोषी पाए जाने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
हरदा में नरवाई जलाने पर कार्रवाई क्यों हुई
हरदा जिले में एक किसान ने अपनी फसल कटने के बाद खेत में बची नरवाई को जलाने के लिए आग लगा दी। यह घटना प्रशासन की नजर में आ गई और जांच के बाद किसान पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
प्रशासन का कहना है कि नरवाई जलाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही थीं। कई बार किसानों को समझाने के बाद भी जब ऐसी घटनाएं नहीं रुकीं तो सख्त कार्रवाई करना जरूरी हो गया। इसी कारण प्रशासन ने उदाहरण पेश करते हुए जुर्माना लगाया है।
अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल दंड देने के लिए नहीं बल्कि किसानों को जागरूक करने के लिए भी की गई है। इससे बाकी किसानों को भी यह संदेश मिलेगा कि खेतों में नरवाई जलाना अब स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सैटेलाइट से हो रही खेतों की निगरानी
अब प्रशासन ने तकनीक की मदद से खेतों में लगने वाली आग पर नजर रखना शुरू कर दिया है। इसके लिए सैटेलाइट का उपयोग किया जा रहा है। सैटेलाइट के जरिए खेतों में लगी आग की जानकारी तुरंत मिल जाती है। जैसे ही किसी क्षेत्र में आग दिखाई देती है, संबंधित जिले और तहसील के अधिकारियों को अलर्ट भेज दिया जाता है। इसके बाद अधिकारी मौके पर पहुंचकर जांच करते हैं और यदि नरवाई जलाने की पुष्टि होती है तो किसान के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
इस तकनीक की मदद से प्रशासन को निगरानी करने में काफी आसानी हो गई है। पहले कई बार ऐसी घटनाओं की जानकारी देर से मिलती थी, लेकिन अब तुरंत पता चल जाता है कि किस खेत में आग लगी है।
नरवाई जलाने से पर्यावरण को होता है नुकसान
विशेषज्ञों के अनुसार खेतों में नरवाई जलाने से पर्यावरण को गंभीर नुकसान होता है। जब खेतों में फसल के अवशेष जलाए जाते हैं तो उससे धुआं और प्रदूषण फैलता है।यह धुआं हवा में मिलकर वातावरण को दूषित करता है और आसपास रहने वाले लोगों की सेहत पर भी असर डालता है। कई बार इससे सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
इसके अलावा नरवाई जलाने से खेत की मिट्टी की गुणवत्ता भी खराब हो जाती है। मिट्टी में मौजूद कई उपयोगी जीवाणु आग की वजह से नष्ट हो जाते हैं। यही जीवाणु फसलों की वृद्धि के लिए बहुत जरूरी होते हैं।
मिट्टी की उर्वरता पर भी पड़ता है असर
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है। आग की वजह से मिट्टी की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचता है और उसमें मौजूद पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
इसके अलावा मिट्टी की नमी भी कम हो जाती है, जिससे अगली फसल की पैदावार प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि कृषि विभाग लगातार किसानों को नरवाई जलाने से बचने की सलाह देता है। यदि किसान फसल के अवशेषों को खेत में ही मिलाकर जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल करें तो इससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है और उत्पादन भी बढ़ सकता है।
किसानों के लिए क्या है सरकार की सलाह
सरकार और कृषि विभाग किसानों से लगातार अपील कर रहे हैं कि वे खेतों में नरवाई जलाने से बचें। इसके बजाय फसल के अवशेषों का उपयोग जैविक खाद बनाने या अन्य कृषि कार्यों में किया जा सकता है।
कई जिलों में किसानों को इसके लिए मशीनें भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन मशीनों की मदद से फसल के अवशेषों को काटकर खेत में मिला दिया जाता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। इसके अलावा किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि वे आधुनिक खेती के तरीकों को अपनाकर अपनी फसल की पैदावार बढ़ा सकें।
