जबलपुर हादसे के बाद मोहन सरकार का बड़ा फैसला, MP में क्रूज संचालन बंद, कई कर्मचारी बर्खास्त

By Ashish Meena
मई 2, 2026

जबलपुर क्रूज हादसे में अबतक 9 लोगों को शव मिल चुके हैं. शुक्रवार की शाम को तेज बारिश के बाद सर्चिंग ऑपरेशन को रोकना पड़ा था. ऐसे में 2 मई को शनिवार सुबह 5 बजे से ही सर्चिंग ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है. क्योंकि अभी भी 4 लोग लापता बताए जा रहे हैं. इस बीच लापरवाही के आरोप में पायलट, हेल्पर और टिकट काउंटर प्रभारी (FOA) समेत 3 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है, जबकि बरगी बोट क्लब के मैनेजर सुनील मरावी को सस्पेंड कर दिया गया है। यह घटना तेज आंधी और सुरक्षा में लापरवाही के कारण हुई थी।

MP में क्रूज का संचालन बंद

एमपी में फिलहाल अगले आदेश तक क्रूज का संचालन बंद कर दिया गया है. सीएम मोहन यादव के निर्देश पर जबलपुर हादसे पर उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया गया है. पूरे प्रदेश में अगले आदेश तक मध्य प्रदेश सभी क्रूज, मोटर बोट और सभी तरह की वॉटर स्पोर्ट्स गतिविधियां तत्काल प्रभाव से बंद कर दी गई है. इसके अलावा जल परिवहन साधनों सेफ्टी ऑडिट भी प्रदेश में अनिवार्य कर दिया गया है. वहीं सुरक्षा मानकों की समीक्षा के बाद ही अब किसी तरह की संचालन की अनुमति दी जाएगी. वहीं सरकार ने भी साफ कर दिया है कि अब वॉटर के मामले में किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया है.

पर्यटन विभाग की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक जबलपुर में डूबा क्रूज करीब 20 साल पुराना था. जिसे 2006 में बनाया गया था. इसमें कुल यात्रियों की क्षमता 60 थी. जबकि घटना वाले दिन भी यहां 40 से ज्यादा यात्री बैठे हुए थे. घटना की जांच के बाद उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है. जिसकी जिम्मेदारी जबलपुर संभाग के कुछ प्रशासनिक अधिकारी महानिदेशक, होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा, सचिव, मध्यप्रदेश शासन और आयुक्त इस मामले की जांच करेंगे.

28 लोग सुरक्षित 9 के शव मिले

जबलपुर क्रूज हादसे में अब तक 28 लोग सुरक्षित बचा लिए गए हैं. जबकि घटना में 9 लोगों के शव मिल चुके हैं. वहीं अभी तक 4 लोग लापता बताए जा रहे हैं. शुक्रवार शाम तक सर्चिंग ऑपरेशन जारी है. लेकिन शाम को बारिश शुरू हो गई थी. लेकिन शनिवार सुबह 5 बजे से ही सर्चिंग ऑपरेशन शुरू हो गया है. क्योंकि अभी भी लगातार खोजने की तलाश जारी है.

घटना में मिली लापरवाही

जबलपुर क्रूज हादसे में अब तक कई तरह की लापरवाही मिली हैं. तेज आंधी और तूफान के बाद भी क्रूज को नर्मदा नदी में उतारा गया और चलाया गया. जबकि मौसम बिगड़ने के बाद क्रूज को किनारे पर लाने की कोशिश नहीं की गई. इसके अलावा जब यात्री क्रूज पर चढ़े थे. तब उन्हें शुरुआत में ही लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी. जब क्रूज में पानी भरने लगा तब कही जाकर लाइफ जैकेट दी गई.

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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