मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी, कई जिलों में 8 दिन वेटिंग, किसान स्लॉट और लंबी कतारों से परेशान, केंद्रों में वसूली के भी आरोप

By Ashish Meena
मई 3, 2026

मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का अभियान तेज है, लेकिन जमीनी हालात लगातार किसानों की परेशानी और अव्यवस्था को उजागर कर रहे हैं। 100 लाख टन लक्ष्य के मुकाबले अब तक करीब 20 लाख टन खरीदी हो चुकी है, जबकि 5 लाख किसान प्रक्रिया में शामिल हैं। स्लॉट बुकिंग की तारीख 9 मई तक बढ़ा दी गई है, लेकिन कई जिलों में हालात अभी भी गंभीर हैं।

स्लॉट बुकिंग बनी सबसे बड़ी समस्या

राज्यभर में किसानों को स्लॉट बुकिंग में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कहीं सर्वर स्लो है तो कहीं OTP और पंजीयन की समस्या। कई जिलों में किसान 2 से 8 दिन तक वेटिंग में फंसे हैं। डबरा जैसे कुछ स्थानों पर सुधार दिखा है, लेकिन अधिकांश जगह सिस्टम दबाव में है।

केंद्रों पर लंबी कतार और तुलाई में देरी

सतना, खंडवा, रतलाम और नर्मदापुरम जैसे जिलों में किसान ट्रॉलियों के साथ घंटों से लेकर दिनों तक इंतजार कर रहे हैं। कई जगह तुलाई धीमी है, तो कहीं पूरी तरह ठप। भीड़ और संसाधनों की कमी से खरीदी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

अवैध वसूली और कटौती के आरोप

कई जिलों में किसानों ने सैंपल, पल्लेदारी और पोर्टल एंट्री के नाम पर पैसे लेने के आरोप लगाए हैं। कटनी में ₹810 तक की वसूली का मामला सामने आया है, वहीं हरदा और देवास में प्रति ट्रॉली गेहूं की कटौती की शिकायतें भी दर्ज हुई हैं।

बुनियादी सुविधाओं का टोटा

आगर मालवा, देवास और नीमच जैसे केंद्रों पर न छांव है, न पीने का पानी। किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली के नीचे बैठकर या पेड़ों की छांव में इंतजार करने को मजबूर हैं। कई जगह टेंट और टैंकर होने के बावजूद पानी गर्म मिल रहा है।

बारदाना और उठाव का संकट

कटनी, खजुराहो और अन्य कई केंद्रों पर बारदाने की कमी या खराब गुणवत्ता से खरीदी प्रभावित है। कई जगह गेहूं खुले में पड़ा है, जिससे बारिश का खतरा बना हुआ है।

साहूकारों से कर्ज ले रहे किसान

लंबा इंतजार, ट्रैक्टर किराया और देरी से भुगतान किसानों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं। कई किसान मजबूरी में साहूकारों से 3–5% ब्याज पर कर्ज लेकर काम चला रहे हैं या कम दाम पर उपज बेच रहे हैं।

रतलाम: “पुराने सिस्टम से हो खरीदी, किसान परेशान”

रतलाम में किसान नेता राजेश पुरोहित ने जिले में चल रही गेहूं उपार्जन व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसान रोज अलग-अलग उपार्जन केंद्रों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, लेकिन व्यवस्था में कई खामियां बनी हुई हैं।

पुरोहित के मुताबिक, केंद्रों पर न तो पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही छांव की सुविधा। किसानों को किराए पर ट्रैक्टर लेकर आना पड़ रहा है, जिसके लिए उन्हें घंटे के हिसाब से अतिरिक्त भाड़ा देना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑनलाइन स्लॉट आधारित व्यवस्था से किसान परेशान हैं और इसे जमीनी हकीकत के हिसाब से आसान बनाने की जरूरत है। पुरोहित ने मांग की कि पुरानी पारंपरिक व्यवस्था को फिर से लागू किया जाए, जिससे किसानों को राहत मिल सके।

आगर मालवा: किसानों की लंबी कतार, रातभर इंतजार

आगर मालवा जिले के ग्राम निपानिया बैजनाथ स्थित गेहूं उपार्जन केंद्र पर किसानों की भारी भीड़ देखने को मिली। ट्रैक्टर-ट्रॉली की लंबी कतारें लगी हुई हैं और कई किसान कल रात से ही अपना गेहूं लेकर केंद्र पर पहुंच गए थे।

किसानों को अपनी बारी का इंतजार ट्रैक्टर-ट्रॉली के नीचे बैठकर और वहीं सोकर करना पड़ा। उनका कहना है कि केंद्र पर छांव और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जिससे परेशानी और बढ़ गई है। वहीं बैजनाथ बायपास रोड पर कई किसान पेड़ों की छांव में आराम करते नजर आए, जहां वे गर्मी और थकान से राहत पाने की कोशिश करते दिखे।

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Ashish Meena

Ashish Meena

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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