सीहोर जिले के भैरूंदा में हर आंख हुई नम, मां की अर्थी को तीन बेटियों ने दिया कंधा, नीलकंठ में हुआ अंतिम संस्कार

By Ashish Meena
मई 18, 2026

सीहोर जिले के भैरूंदा की शास्त्री कॉलोनी में एक ऐसा दृश्य देखने को मिल, जिसने हर किसी की आंख को नम कर दिया। जिस समाज में बरसों से अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी केवल बेटों तक सीमित मानी जाती रही, वहां बेटियों ने अपने साहस, संवेदनाओं और कर्तव्य से एक मिसाल कायम कर दी।

स्वर्गीय विजय सिंह परिहार की पत्नी कमला देवी के निधन के बाद घर में शोक की गहरी लहर थी। आंगन में मां की यादें थीं, आंखों में आंसू थे और दिलों में बिछड़ने का दर्द, लेकिन इसी दर्द के बीच उनकी बड़ी बेटी हेमलता ने वह जिम्मेदारी उठाई, जिसे समाज अक्सर बेटों के हिस्से का कर्तव्य मानता आया है। हेमलता ने मां की अर्थी को कंधा दिया। हर कदम पर उनकी आंखों में आंसू थे, लेकिन हौसला अडिग था।

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नर्मदा तट स्थित नीलकंठ श्मशान घाट पहुंचकर उन्होंने मां को मुखाग्नि दी और अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूरी कीं। इस भावुक पल में उनकी बहनें चिंतामणि बिसेन और माया राजपूत भी साथ रहीं। तीनों बेटियां मां को अंतिम विदाई देते हुए जैसे यह संदेश दे रही थीं कि प्रेम, जिम्मेदारी और संस्कार किसी रिश्ते या परंपरा की सीमाओं में बंधे नहीं होते।

बेटी ने कांपते हाथों और भरे गले के साथ अंतिम विदाई दी श्मशान घाट पर लोगों की आंखें उस वक्त नम हो गईं, जब बेटी ने कांपते हाथों और भरे गले से मां को अंतिम विदाई दी। वहां मौजूद हर व्यक्ति इस दृश्य को सिर्फ एक संस्कार नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने वाली प्रेरणादायक घटना के रूप में देख रहा था। लोगों का कहना था कि बेटियां आज हर जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हैं। माता-पिता के प्रति उनका समर्पण, प्रेम और उनका त्याग बेटे से कम नहीं है।

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आशीष मीणा हिंदी पत्रकार हैं और राष्ट्रीय तथा सामाजिक मुद्दों पर लिखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वह तथ्यात्मक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

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